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हिमाचल विधानसभा हंगामा : पुलिस से की गई शिकायत, कांग्रेसी विधायकों पर दर्ज हो सकता है मामला

विधानसभा में हुए हंगामे को लेकर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष होने का मतलब संविधान से ऊपर होना नहीं होता.

विधानसभा में हुए हंगामे को लेकर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष होने का मतलब संविधान से ऊपर होना नहीं होता.

विधानसभा सचिवालय ने पुलिस को हंगामे की पूरी जानकारी लिखित में दी है. विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा ने इसकी पुष्टि की है. मामला दर्ज हुआ है या नहीं, इस पर फिलहाल शिमला पुलिस ने चुप्पी साध ली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 9:39 PM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा (Himachal Pradesh Assembly) के बजट सत्र (Budget Session) के दौरान जो घटना हुई है, उस मामले पर कांग्रेसी विधायकों (Congress MLAs) पर पुलिस केस (FIR) दर्ज हो सकता है. विधानसभा सचिवालय ने पुलिस को घटना की पूरी जानकारी लिखित में दी है. विधानसभा के सचिव यशपाल शर्मा ने इसकी पुष्टि की है. मामला दर्ज हुआ है या नहीं इस पर फिलहाल शिमला पुलिस ने चुप्पी साध ली है. तय नियमों के अनुसार विधानसभा सचिवालय की शिकायत के आधार पर ही पुलिस की ओर से कार्रवाई अमल में लाई जाती है. आपको बता दें कि इस घटना के बाद सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) ने विधानसभा स्पीकर (Vidhan Sabha Speaker) विपिन सिंह परमार (Vipin Singh Parmar) के साथ एक हाई लेवल बैठक भी की है. इस बैठक में पुलिस के आला नेता भी मौजूद रहे. शुक्रवार को सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सीएम ने राज्यपाल से भी मुलाकात की है. वहीं दूसरी ओर निलंबित कांग्रेसी विधायकों और नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने इस कार्रवाई को तानाशाहपूर्ण और एकतरफा करार दिया है.

ये हुआ सत्र के शुरू में

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन का हंगामे के साथ आगाज हुआ है. शुक्रवार को सदन की कार्यवाही महज 10-15 मिनट के बाद ही रोकनी पड़ी. कांग्रेस ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान खूब हंगामा किया. अभिभाषण को पूरा पढ़ने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए विपक्ष सदन के बाहर निकल गया और गेट नंबर तीन पर जहां से राज्यपाल को वापस राजभवन के लिए निकलना था, वहां पर धरने पर बैठ गया. इस दौरान सत्ता-पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोंक-झोंक हुई और धक्का-मुक्की भी. विपक्षी विधायकों ने गाड़ी रोक दी और घेराव किया. इस दौरान मार्शल-पुलिस और कांग्रेस विधायकों में जमकर धक्का-मुक्की हुई. इस बीच मंत्री सुरेश भारद्वाज नीचे गिर गए. अब कांग्रेस के 5 विधायकों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है. इस गहमागहमी में विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज भी कांग्रेस विधायकों को धक्का देते हुए नजर आए. बाद में राज्यपाल किसी तरह से वहां से निकले और सदन की कार्यावाही दोबारा शुरू हुई. हालांकि, विपक्ष सदन में नहीं लौटा. सदन में कांग्रेस के नेता विपक्ष सहित 5 विधायकों को सत्र से निलंबित करने के लिए प्रस्ताव लाया गया है और इस पर चर्चा की गई.



स्पीकर ने की निंदा
विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने घटना की निंदा की. साथ ही संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सदन में कहा, 'कांग्रेस ने सदन ही नहीं, संविधान के ऊपर हमला किया है और कांग्रेसियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.' उन्होंने कहा कि राज्यपाल के बजट अभिभाषण पर चर्चा के लिए 4 दिन का समय था. राज्यपाल का रास्ता रोकना शर्मनाक है. सीएम का रास्ता रोकते, मंत्रियों का रास्ता रोकते. यह राज्यपाल का एक तरह से फिजिकल एसॉल्ट किया गया है.

ये हुए सस्पेंड

इसके बाद सुरेश भारद्वाज ने सदन में प्रस्ताव रखा और कहा कि नेता प्रतिपक्ष समेत 5 विधायकों को निलंबित किया जाएगा. नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, विधायक हर्षवर्धन, सतपाल रायजादा, विनय कुमार, सुंदर सिंह ठाकुर को निलंबित करने के प्रस्ताव पर विधानसभा के नियम-319 के तहत सदन में चर्चा के लिए लाया गया और पारित कर दिया गया. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि राज्यपाल के एडीसी के गले पर हाथ डाला गया. वन मंत्री राकेश पठानिया, नरेंद्र बरागटा, गोबिंद ठाकुर, मंत्री राजेंद्र गर्ग ने प्रस्ताव का समर्थन किया था.

सीएम ने कहा

सदन में सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि आज तक के इतिहास में ऐसी घटना नहीं हुई है. राज्यपाल के साथ इस तरह का व्यवहार देश की किसी भी विधानसभा में नहीं हुआ. सीएम ने कहा कि पांच विधायकों को सस्पेंड किया गया है और पूरे सदन ने प्रस्ताव का समर्थन किया है. कांग्रेस नेतृत्व में लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने की क्षमता खत्म हो गई है. पूरे देश में कांग्रेस की यही स्थिति है. खबर बनाने के लिए इस तरह के हालात पैदा किए गए हैं. गौरतलब है कि 17 बैठकों का यह दौर 20 मार्च तक चलेगा.
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