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BJP सरकार ने 2 साल में उठाया 8821 करोड़ कर्ज, पुराना लोन चुकाने को भी लिया नया ऋण

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सूबे की जयराम सरकार ने दो साल में लिए कर्ज के आंकड़े रखे हैं.(सांकेतिक तस्वीर)

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सूबे की जयराम सरकार ने दो साल में लिए कर्ज के आंकड़े रखे हैं.(सांकेतिक तस्वीर)

हिमाचल पर 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है. ऐसे में सवाल यह उठता कि कर्जे से सरकार चलाने का काम रुकेगा. हालांकि, जयराम सरकार दावा कर रही है कि इन्वेस्टर मीट और केंद्रीय सहायता से इस विकट स्थिति से पार पाया जाएगा.

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शिमला. ‘कर्ज लो और घी पीयो’ की परंपरा हिमाचल में लंबे समय से चल रही है. जो टूटने का नाम नहीं ले रही है. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की जयराम सरकार (Jairam Government) ने दो साल में 8821 करोड़ 85 लाख रुपये का कर्ज (Loan) लिया है. खुले बाजार से कर्ज लेने के साथ-साथ नाबार्ड और दूसरी फंडिंग एजेंसियों से भी कर्ज लिया है. इसमें वो कर्ज भी है, जिसे पुराने कर्ज को चुकाने के लिए लिया गया है.

विधानसभा के बजट सत्र (Budget Session) के दौरान सूबे की जयराम सरकार ने दो साल में लिए कर्ज के आंकड़े रखे हैं. इसमें सरकार ने बताया कि दो साल में 8821 करोड़ 85 लाख रुपये कर्ज लिया है. खुले बाजार के साथ-साथ कर्ज देने वाली सरकारी एंजेसियों से भी कर्ज लिया है.
आंकड़ों को देखें तो सरकार ने पुराने कर्ज को चुकाने के लिए 5152 करोड़ 11 लाख कर्ज लिया. विधानसभा में यह प्रश्न नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने लगाया था, जिसके लिखित जवाब ने सरकार ने आंकड़े पेश किए हैं.

सरकार ने 7710 करोड़ रुपये खुले बाजार से कर्ज लिया, जबकि 920 करोड़ 61 लाख नाबार्ड, 52 करोड़ 30 लाख राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, 138 करोड़ 94 लाख भारत सरकार से कर्ज लिया है. ऐसे में सरकार का शुद्ध ऋण 3669 करोड़ 74 लाख लाख रूपये दर्ज हुआ है. अपने जवाब में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के बोर्ड या निगम से कोई कर्ज नहीं लिया है. हालांकि, यह माना कि कर्ज राहत के लिए सरकार ने 15 वित्तायोग से फरियाद लगाई है.

बढ़ते कर्ज पर सत्तापक्ष का यह तर्क
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने बढ़ते कर्ज के लिए विपक्ष को ही निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा कि कर्ज की स्थिति में लाने के लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है. प्रदेश में वित्तीय समस्या तब पैदा हुई जब 9 वे वित्तायोग के चैयरमेन और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनपीके साल्वे ने हिमाचल को मिलने वाला 90 प्रतिशत प्रशासनिक खर्चा अनुदान खत्म किया था. उस वक्त प्रदेश में वीरभद्र सिंह सरकार थी. इसके बाद ही हिमाचल में कर्ज लेने की परंपरा शुरू हुई है. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी सरकारों की तुलना करें तो कांग्रेस सरकार में ज्यादा कर्ज लिया गया है. पूर्व में बिना वित्तीय मंजूरी के भी सरकार ने घोषणाएं कर दी हैं., अभी दो साल ही हुए हैं और कर्ज लेना एक रेगुलर फीचर है. कर्ज लिए भी जाते हैं और उन्हें वापस भी किया जाता है.

विपक्ष ने सरकार को दी यह नसीहत
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने बढ़ते कर्ज पर सरकार को नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि सरकार को अपने खर्चे नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने चाहिए. यह पहले भी उठाए गए हैं. बीजेपी सरकार में रहते सीएम शांता कुमार ने गाड़ी रोकी थीं और रविवार को गाड़ियों का चलन बंद किया था. अब भी कई कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान सरकार कंपनी की तरह काम कर रही है. इनको खर्चों से कोई लेना देना नहीं है. बीजेपी को लग रहा है कि सरकार हाथ में आ गई है, ऐसे में जो मर्जी करो. सरकार इन्वेस्टर मीट, खिचड़ी पकाने और जनमंच में चूल्हा जलाने पर लाखों खर्च कर रही है. सरकार में चैयरमेनों की फौज लगा दी है.

सूबे पर इतना कर्ज
गौरतलब है कि हिमाचल पर 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है. ऐसे में सवाल यह उठता कि कर्जे से सरकार चलाने का काम रुकेगा. हालांकि, जयराम सरकार दावा कर रही है कि इन्वेस्टर मीट और केंद्रीय सहायता से इस विकट स्थिति से पार पाया जाएगा.

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