हिमाचल कांग्रेस बोली- Article 370 और धारा-118 को जोड़ना गलत

कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत में धारा-118 से छेड़छाड़ नहीं करने देगी और इसी के लिए पार्टी ने सेव हिमाचल अभियान शुरू किया है. राठौर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस किसी भी कीमत पर धारा 118 से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी.

News18 Himachal Pradesh
Updated: August 8, 2019, 11:52 AM IST
हिमाचल कांग्रेस बोली- Article 370 और धारा-118 को जोड़ना गलत
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर.
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Updated: August 8, 2019, 11:52 AM IST
हिमाचल भू संरक्षण अधिनियम की धारा-118 को लेकर दिए ताजा सियासी बयानबाजी पर प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि 370 की आड़ में जानबूझ कर धारा 118 को उछालने का प्रयास किया जा रहा है.

अनुछेद 370 कश्मीर को स्पेशल स्टेट के राज्य का दर्जा दिलाता था, जो जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य राज्यों से अगल करता था. लेकिन हिमाचल प्रदेश की धारा-118 गरीब-किसानों की जमीन को महफूज करती है. ऐसे में दोनों धाराओं को एक ही सियासी चश्में से देखना सही नहीं होगा.

सेव हिमाचल अभियान शुरू किया: राठौर
प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि हिमाचल का देश की सुरक्षा, बिजली और अन्य देशहित कार्यों के सहयोग में किसी भी बड़े राज्य से कम नहीं है. हिमाचल का किसान गरीबी में अपनी जमीन न बेंचे इसके लिए प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाईएस परमार ने यह प्रावधान किया था, कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत में धारा-118 से छेड़छाड़ नहीं करने देगी और इसी के लिए पार्टी ने सेव हिमाचल अभियान शुरू किया है. राठौर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस किसी भी कीमत पर धारा 118 से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी.

कांग्रेस हुई मुखर
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया एवं आईटी विभाग के प्रमुख अभिषेक राणा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि हिमाचली हितों से कुठाराघात करने वाले ऐसे विरोधाभाषी बयान देने से पहले बादल बताएं कि हिमाचल से धारा-118 हटाए जाने की पैरवी किस मंशा से की जा रही है? बादल बताएं कि उन्हें हिमाचल के हितों को सुरक्षित रखने वाली व शांति बनाए रखने वाली धारा-118 से इतनी चिढ़ क्यों है?

क्या है धारा-118
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साल 1972 में हिमाचल में एक विशेष कानून बनाया गया. ऐसा इसलिए किया गया, ताकि दूसरे राज्यों के पैसे वाले और सुविधा संपन्न लोग प्रदेश में जमीनें ना सकें. दरअसल, 70 के दशक में हिमाचल की जनता आर्थिक तौर पर इतनी मजबूत नहीं थी. आशंका जताई गई कि लोग जमीनें बेच देंगे और हिमाचली भूमिहीन हो जाएंगे. हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले सीएम डॉक्टर यशवंत सिंह परमार सरकार ने यह कानून बनाया था. हिमाचल प्रदेश टेनंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट 1972 में विशेष प्रावधान किया गया. एक्ट के 11वें चैप्टर 'कंट्रोल ऑन ट्रांसफर ऑफ लैंड' में धारा-118 के तहत 'गैर-कृषकों को जमीन बेचने पर रोक लगा दी गई. साथ ही ऐसे किसी भी व्यक्ति को जमीन ट्रांसफर नहीं की जा सकती है, जो कृषक नहीं है.

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First published: August 8, 2019, 11:26 AM IST
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