हिमाचल में कोरोना काल में धरने पर बैठेंगे CPIM विधायक सिंघा, ‘ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण में भेदभाव’

शिमला जिले के ठियोग से माकपा विधायक राकेश सिंघा.

शिमला जिले के ठियोग से माकपा विधायक राकेश सिंघा.

राकेश सिंघा ने ऐलान किया है कि 31 मई तक स्वास्थ्य विभाग अगर टीकाकरण केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ाता है तो वे जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुरेखा चोपड़ा के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठेंगे.

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शिमला. कोरोना टीकाकरण अभियान को लेकर केंद्र के साथ साथ हिमाचल सरकार पर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस बीच अब सरकार पर ग्रामीण इलाकों के साथ भेदभाव के आरोप लग रहे हैं. शिमला जिले के ठियोग से माकपा विधायक राकेश सिंघा ने आरोप लगाया है कि वैक्सीन को लेकर गांव देहात के इलाकों के साथ स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार भेदभाव कर रही है.

क्या आरोप लगाए

राकेश सिंघा ने कहा कि टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शिमला जिले में 27 केंद्र बनाए हैं लेकिन हैरानी इस बात की है कि इन 27 में से 12 केंद्र शहरी क्षेत्रों में हैं और वैक्सीन की मात्र 2702 डोज हैं. उन्होंने कहा कि ये स्थिति बरकरार रही तो 2023 में जाकर ये अभियान खत्म होगा. इस इलाके की 80 फीसदी आबादी को टीका लगवाने में ही 5 साल निकल जाएंगे. उन्होंने कहा कि विभाग की कारगुजारी ये है कि चौपाल इलाके में मात्र एक टीकाकरण केंद्र बनाया गया है और यही हाल ठियोग समेत जिले के कई इलाकों का है. जिले दूर-दराज के इलाके अब तक वैक्सीन से वंचित हैं.

धरने का ऐलान किया
राकेश सिंघा ने ऐलान किया है कि 31 मई तक स्वास्थ्य विभाग अगर टीकाकरण केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ाता है तो वे जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुरेखा चोपड़ा के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठेंगे. सिंघा का कहना है कि आपदा प्रबंधन कानून में स्पष्ट है कि आपदा की घड़ी में राहत देने के लिए रंग, जाति, धर्म, भाषा, लिंग और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता, लेकिन यहां पर सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. साथ ही आरोप लगाया कि जहां-जहा विपक्षी दल के विधायक है वहां इस तरह की स्थिति है.

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