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Kisan Andolan: केंद्र को तीनों कानून रद्द करने चाहिए, इसी में किसानों की भलाई: राकेश सिंघा

हिमाचल से सीपीआईएमस विधायक राकेश सिंघा.
हिमाचल से सीपीआईएमस विधायक राकेश सिंघा.

सिंघा ने कहा कि हिमाचल का किसान जागरूक जरूर हैं, लेकिन केंद्र की नीतियों के चलते अब नकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो जाएगा.

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शिमला. नए कृषि कानूनों (Agriculture Bills) के विरोध में धीरे-धीरे देश के हर कोने से आवाजें उठना शुरू हो गई हैं. इस बीच हिमाचल में किसान सभा (Kisan Sabha) और सीटू ने पहले ही एलान कर रखा है कि केंद्र से बातचीत सफल नहीं होती या फिर सरकार मांगे पूरी नहीं करती तो, हिमाचल (Himachal Pradesh) से भी हजारों किसान दिल्ली कूच करेंगे. ठियोग से विधायक, मजदूर और किसान नेता राकेश सिंघा ने भी केंद्र सरकार को घेरा है. सिंघा ने कहा कि ये तीनों कानून किसान के हित्त में नहीं हैं, इसका खेती-किसानी पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा,इसलिए केंद्र को ये तीनों कानून वापस लेने चाहिए.

‘किसान की जमीन पर प्रश्न चिन्ह’

राकेश सिंघा ने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग को बढ़ावा देने से अब प्रश्न चिन्ह इस बात पर खड़ा हो रहा है कि किसान की जमीन बचेगी या नहीं. उन्होंने कहा कि नए कानून से कम भूमि वाला गरीब किसान कुछ ही समय में निजी क्षेत्र की मनमानी का शिकार हो जाएगा और अपना खेत कॉरपोरेट को देने के लिए मजबूर हो जाएगा,जिससे उसकी भूमि पर मालिकाना हक तक छिनने का खतरा है. सिंघा ने कहा कि हिमाचल का किसान जागरूक जरूर हैं, लेकिन केंद्र की नीतियों के चलते अब नकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो जाएगा.




कोरोना की आड़ में किसानों पर हमला

साथ ही कहा कि केंद्र सरकार कोरोना की आड़ में मजदूरों और किसानों पर नए कानूनों के जरिए हमले कर रही है. इस संबंध में सिंघा ने मु्ख्यमंत्री जयराम ठाकुर को एक चिठ्ठी भी लिखी है,जिसमें विस्तार से नए कानूनों के नकारात्मक प्रभावों के बारे में लिखा है.
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