हिमाचल: मार्केट में आया अरली वैरायटी का सेब, बागवानों को हो रहा जबरदस्त मुनाफा

इस बार पहले ही टाइडमैन की एंट्री हुई है. सेबों का राजा रॉयल 20 जुलाई के आसपास फल मंडियों में पहुंचेगा. (फाइल फोटो)
इस बार पहले ही टाइडमैन की एंट्री हुई है. सेबों का राजा रॉयल 20 जुलाई के आसपास फल मंडियों में पहुंचेगा. (फाइल फोटो)

हिमाचल (Himachal) में इस बार समय से पहले सेब सीजन शुरू हुआ है. टाइडमैन अमूमन जुलाई के दूसरे सप्ताह में बिकने के लिए पहुंचता था.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की पहचान बन चुका रसीला सेब अब मार्केट में उतर गया है. अरली वैरायटी का सेब (Arli Variety Apple) मार्केट में आ गया है, जिसे चोखे दाम मिल रहे हैं. खूबसूरत लाल-लाल सेब हिमाचल की पहचान है, जो फल मंडियों की शोभा बढ़ाने के लिए मार्केट में मिल रहे हैं. जी हां, हिमाचल में सेब सीजन शुरू हो गया है. अरली वैरायटी का टाइडमैन सेब शनिवार को भट्ठाकुफर फल मंडी (Bttakuphar Sabji Mandi) में बिकने के लिए पहुंचा, जिसके बागवानों को अच्छे खासे दाम मिले हैं. टाइडमैन सेब प्रति बॉक्स 1900 से 2 हजार के हिसाब से बिका, जो पिछले साल की तुलना में 400 रुपये से लेकर 500 रुपये ज्यादा है. बागवान भी अच्छे दाम मिलने से खुश हैं. सेब के साथ-साथ नाशपाती (Pear) के भी अच्छे दाम मिल रहे हैं. शनिवार को भट्ठाकुफर मंडी में नाशपाती का एक बॉक्स 3200 रुपये तक बिका.

बेशक दाम अच्छे मिल रहे हैं लेकिन बागवानों को इस बार मजदूरों की कमी खल रही है. दरअसल नेपाली मजदूर कम संख्या में आए हैं. इसलिए बागवानों को तुड़ान से लेकर सेब को मार्केट तक पहुंचाने की चिंता सता रही है. हालांकि बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर का दावा है कि इस बार बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिलेंगे, क्योंकि पैदावार कम होगी. लेबर की भी दिक्कत नहीं रहेगी. सरकार ने पूरे प्रयास किए हैं. दरअसल, हिमाचल में अप्पर और लोअर वैल्ट में अलग-अलग समय में सेब का उत्पादन होता है. इसलिए जैसे-जैसे एक वैली में सेब का तुड़ान हो जाएगा तो उसके बाद मजदूर दूसरी वैली की तरफ कूच करेंगे.

इस बार समय से पहले सेब का सीजन शुरू हुआ है
गौरतलब है कि हिमाचल में इस बार समय से पहले सेब का सीजन शुरू हुआ है. टाइडमैन अमूमन जुलाई के दूसरे सप्ताह में बिकने के लिए पहुंचता था. इस बार पहले ही टाइडमैन की एंट्री हुई है. सेबों का राजा रॉयल 20 जुलाई के आसपास फल मंडियों में पहुंचेगा. इस बार ढाई करोड़ सेब पेटियां होने का अनुमान है, जो पिछले साल करीब 4 करोड़ थी. ऐसे में दाम अच्छे होंगे. हिमाचल की आर्थिकी में अकेले सेब का योगदान 4 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा है. बहरहाल देखने वाली बात यह है कि लेबर की समस्या से जूझ रहे बागवानों को सरकार कैसे राहत पहुंचाएगी.
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