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22 दिन बाद PGI चंडीगढ़ से इलाज करवाकर लौटे पूर्व CM वीरभद्र सिंह IGMC में भर्ती

News18 Himachal Pradesh
Updated: October 11, 2019, 3:33 PM IST
22 दिन बाद PGI चंडीगढ़ से इलाज करवाकर लौटे पूर्व CM वीरभद्र सिंह IGMC में भर्ती
वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के सीएम रह चुके हैं.

Virbhadra Singh in IGMC: जानकारी के अनुसार, हिमाचल के छह बार के सीएम रहे और कांग्रेस के दिग्गज नेता का आईजीएमसी में डायलिसिस होगा. पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें शिमला में डायलिसिस की सलाह दी थी.

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शिमला. 22 दिन बाद पीजीआई चंडीगढ़ (PGI Chandigarh) से इलाज कर लौटे हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह (CM Virbhadra Singh) को एक बार फिर से शिमला (Shimla) के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) और अस्पताल ले जाया गया है. हालांकि, डायलिसिस के लिए  उन्हें भर्ती किया गया है. गुरुवार को ही वह चंडीगढ़ से शिमला पहुंचे थे. आईजीएमसी अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनके भर्ती होने की पुष्टि की गई है. हालांकि वीरभद्र सिंह स्वस्थ हैं, लेकिन उनका रूटीन डायलिसिस होना है.

जानकारी के अनुसार, हिमाचल के छह बार के सीएम (Chief Minister of Himachal Pradesh) रहे और कांग्रेस के दिग्गज नेता का आईजीएमसी में डायलिसिस होगा. पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें शिमला में डायलिसिस की सलाह दी थी.

22 दिन तक पीजीआई में इलाज
जानकारी के अनुसार, बीते 19 सितंबर को पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह को शिमला से चंडीगढ़ रेफर किया गया था. उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी. इससे पहले, वह करीब तीन दिन तक आईजीएमसी में भर्ती रहे थे. 22 दिन तक चंडीगढ़ पीजीआई में उनका इलाज चला और गुरुवार को छुट्टी के बाद वीरभद्र सिंह शिमला लौटे थे.

सीएम ने भेजा था हेलिकॉप्टर
पीजीआई के डॉक्टरों ने वीरभद्र सिंह को सड़क मार्ग से जाने से मना किया था. इसके बाद उन्होंने प्रदेश सरकार से एयरलिफ्ट करने की मदद मांगी थी. बाद में सरकार की ओर से सरकारी हेलिकॉप्टर चंडीगढ़ भेजा गया था और इसमें वीरभद्र सिंह शिमला लौटे थे.

क्या होता है डायलिसिस
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जानकारी के अनुसार, जब एक इंसान की किडनियां नेचुरल तरीके से काम करना बंद कर देती हैं तो डायलिसिस किया जाता है. डायलिसिस में कृत्रिम तरीके से रक्त शोधन किया जाता है. इस प्प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है, जब किसी व्यक्ति गुर्दे (किडनी) सही से काम नहीं कर रहे होते हैं. ऐसा तब होता है, जब शख्स लंबे समय से मधुमेह, उच्च रक्तचाप से जूझ रहा हो. डायलसिस स्थायी और अस्थाई होता है. यदि रोगी के गुर्दे बदल कर नये गुर्दे लगाने हों, तो प्रक्रिया अस्थाई होती है और यदि गुर्दे इस स्थिति में न हों कि उसे प्रत्यारोपित किया जाए, तो यह प्रकिया अस्थायी होती है.

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First published: October 11, 2019, 11:53 AM IST
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