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बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण: हिमाचल की विकास दर गिरी, 4 साल में सबसे कम हुई

बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण: हिमाचल की विकास दर गिरी, 4 साल में सबसे कम हुई

हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सीएम जयराम ठाकुर.

हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सीएम जयराम ठाकुर.

Himachal Economic survey: औद्योगिक क्षेत्र का योगदान हर वर्ष बढ़ रहा है, क्योंकि यह वर्ष 2014-15 में 26.69 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 29.79 प्रतिशत हो गया है.

शिमला. हिमाचल प्रदेश के आर्थिक रूझान अच्छे संकेत लेकर नहीं आए हैं. बजट पेश होने से एक दिन पहले विधानसभा (Assembly) में आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट रखी गई, जिसमें प्रदेश की विकास दर (Growth Rate) चिंताजनक तरीके से गिरी है. वर्ष 2020-21 का बजट सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) 6 मार्च को पेश करने जा रहे हैं. बजट (Budget) पेश करने से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survery) की रिपोर्ट रखी गई, जिसमें प्रदेश का आर्थिक प्रदर्शन अच्छा नहीं दिखा. सूबे की विकास दर गिरी है.

बीते साल 7.1 प्रतिशत विकास दर के साथ प्रदेश काफी बेहतर कर रहा था, लेकिन 2019-20 में विकास दर 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में कम है. हालांकि प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.

प्रति व्यक्ति आय बीते साल के मुकाबले कम
इस बीच सूबे की प्रति व्यक्ति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी बीते साल हुई बढ़ोतरी से कम है. वर्ष 2019-20 के लिए वास्तविक रूप से प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 46 हजार 268 रुपये का स्तर प्राप्त करने की संभावना है, जबकि वर्ष 2018-19 में यह 1 लाख 39 हजार 469 थी, जो 4.9 प्रतिशत की वृद्धि थी. वर्तमान कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2018-19 में संशोधित अनुमानों के अनुसार, 1 लाख 83 हजार 108 रुपये थी, जो वर्ष 2019-20 के तहत 1 लाख 95 हजार 255 रुपये तक बढ़ने की संभावना है. इसमें लगभग 6.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

विकास दर घटने पर यह बोले सीएम जयराम ठाकुर
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे विश्व में आर्थिक मंदी का दौर है, जिसका प्रभाव भारत में भी और हिमाचल पर भी पड़ा. मंदी का दौर है और कुछ समय तक ऐसी मंदी रहेगी. हमें पूरा विश्वास है कि मोदी जी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है. आर्थिक मंदी के इस दौर को मजबूती से पार करेंगे. हिमाचल में जो चीजें करने की होंगी, वो करेंगे. बीते साल संतोषनक ग्रोथ रेट रहा. प्रति व्यक्ति आय भी भी बढ़ी है. विकास दर पूर्व में भी कम हुई है. लेकिन सरकार नए इनिशिएटिव ले रही है और उम्मीद है कि सब अच्छा होगा.

विपक्ष ने कहा, विफलता का डॉक्यूमेंट
आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने जयराम सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा कि यह विफलता का डॉक्यूमेंट है. सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह फेल हुई. अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करके रख दिया गया है. अर्थव्यवस्था में 7.1 प्रतिशत से 5. 6 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. एक चार्ट ने सरकार का सारा रिपोर्ट कार्ड सामने रख दिया है. उन्होंने कहा कि बहुत देर से सीएम जयराम ठाकुर ईतरा रहे थे कि हमने आर्थिक मोर्चे पर पता नहीं क्या फतेह की है? सीएम को आज वैश्विक मंदी समझ में आ रही है, जबकि इन्वेस्टर मीट के समय में कह रहे थे कि आर्थिक मंदी का कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

बजट पेश करने से एक दिन पहले बजट की कॉपी पढ़ते हुए सीएम जयराम ठाकुर.
बजट पेश करने से एक दिन पहले बजट की कॉपी पढ़ते हुए सीएम जयराम ठाकुर.


कृषि का भाग घटा
वर्तमान मूल्य पर राज्य के सकल मूल्य वर्धित में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का भाग 2014-15 में 15.35 प्रतिशत से घटकर 2019-20 में 12.73 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2014-15 से 2019-20 तक फसलों का भाग, वानिकी और लॉगिंग का भाग भी घट गया है, हालांकि, पशुधन का भाग और मछली पकड़ने का भाग मामूली बढ़ गया है. राज्य के कुल जीवीए में कृषि और संबंद्ध क्षेत्रों की भागीदारी गैर-कृषि क्षेत्रों के अपेक्षाकृत उच्च विकास प्रदर्शन के कारण घट रही है. यह विकास प्रक्रिया का एक स्वाभाविक परिणाम है, जो अर्थव्यवस्था में होने वाले संरचनात्मक परिवर्तनों के कारण गैर-कृषि क्षेत्रों की तेजी से वृद्धि करता है.

प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन का 7 प्रतिशत योगदान
हिमाचल प्रदेश एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और राज्य की वृद्धि, विकास तथा अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बहुत योगदान है. राज्य सकल उत्पाद में पर्यटन क्षेत्र का योगदान लगभग 7 प्रतिशत है, जो काफी महत्वपूर्ण है. आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए, साकारात्मक परिणाम देने के लिए पर्यटन उद्योग पर निर्भरता देखी गई है. यह इस तथ्य से प्रमाणित होता है कि हिमाचल प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या 2004 में 6.55 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 17.21 मिलियन है.

औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 29.79 फीसदी
औद्योगिक क्षेत्र का योगदान हर वर्ष बढ़ रहा है, क्योंकि यह वर्ष 2014-15 में 26.69 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 29.79 प्रतिशत हो गया है, जिसका कारण राज्य सरकार की पहल के कारण प्रोएक्टिव इंडस्ट्रियल पॉलिसी के रुप में, निवेशकों को प्रोत्साहन, निवेश को आकर्षित करने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सक्षम करना है. राज्य सरकार द्वारा अवैध खनन की जांच करने के लिए सख्त कदम उठाने के कारण तथा अन्य क्षेत्रों के कारण भी अर्थव्यवस्था में वृद्धि हुई है.

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Tags: Annual Economic Survey, Bjp government, Himachal pradesh

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