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हिमाचल में आंदोलन का असर, 40 हजार JBT-DLD डिप्लोमा धारकों के पक्ष में SC जा सकती है सरकार

हिमाचल में आंदोलन का असर, 40 हजार JBT-DLD डिप्लोमा धारकों के पक्ष में SC जा सकती है सरकार

जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी सरकार,

जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी सरकार,

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन का सरकार पर असर देखने को मिला है. कैबिनेट मंत्री सुरेश भारद्वाज ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि आंदोलन कर रहे प्रशिक्षुओं के पक्ष में सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है. जोधपुर हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद इसकी उम्मीद बंधी है. इस मामले पर कैबिनेट में चर्चा कर शिक्षा विभाग को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं. बता दें कि कैबिनेट बैठक के एजेंडे में ये मामला नहीं था, लेकिन फिर भी महत्व को देखते हुए इस पर चर्चा की गई.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन का असर देखने को मिला है. सरकार अब 40 हजार जेबीटी और डीएलएड (JBT and DLD) डिप्लोमा धारक प्रशिक्षुओं को राहत देने की तैयारी में है. मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इनके मुद्दे पर चर्चा हुई. सरकार ने शिभा विभाग को सभी कानूनी पक्षों को खंगालने के निर्देश दे दिए हैं. शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने ये जानकारी दी.

बता दें कि मंगलवार सुबह अपनी मांगों को लेकर राज्य सचिवालय घेराव के लिए जा रहे प्रशिक्षुओं को पुलिस ने टॉलैंड के पास ही रोक दिया था. पुलिस की ओर से रोके जाने पर उन्होंने वहीं पर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने टोलैंड में सड़क किनारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया.

हाईकोर्ट का आदेश प्रशिक्षुओं के पक्ष में नहींः प्रशिक्षु संघ

जेबीटी डीएलएड बेरोजगार प्रशिक्षु संघ के उपाध्यक्ष गुलाब ठाकुर ने कहा कि उच्च न्यायलय के आदेश उनके पक्ष में नहीं है. सरकार से मांग की गई है कि उनके पक्ष को कोर्ट में मजबूती के साथ रखा जाए. जेबीटी के लिए बने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों से छेड़छाड़ न की जाए. जेबीटी प्रशिक्षु संघ ने अपने स्तर पर सुप्रीम कोर्ट जाने का मन भी बनाया है. उनका कहना है कि राज्य में 12वीं पास युवा, जो आर्थिक व भोगौलिक परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, वे राज्य में डाइट के माध्यम से जेबीटी, डीएलएड शिक्षा लेकर प्राथमिक स्तर पर अध्यापक नियुक्ति की योग्यता रखता है.

अस्तित्व पर खतरे के बादल

अन्य राज्यों में भी जेबीटी-डीएलएड को ही प्राथमिक स्तर के लिए मान्य करार दिया है. बीएड को माध्यमिक स्तर के लिए योग्य माना गया है. जेबीटी शिक्षक संघ का कहना है कि इसमें बीएड को जोड़ने के लिए जेबीटी नियमों से छेड़छाड़ की गई, तो राज्य में इस समय 40000 प्रशिक्षित जेबीटी के साथ-साथ जिला के डाइट संस्थान व निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा.

क्या है हाईकोर्ट का फैसला

बता दें कि हिमाचल हाई कोर्ट ने जेबीटी भर्ती मामलों पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई द्वारा निर्धारित नियम एलिमेंटरी शिक्षा विभाग के साथ साथ अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं. न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने याचिकाओं को स्वीकारते हुए प्रदेश सरकार को आदेश दिए कि वह 28 जून 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार जेबीटी पदों की भर्ती के लिए नियमों में जरूरी संशोधन करे.

Tags: CM Jairam Thakur, Jairam Thakur

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