हिमाचल में संस्कृत यूनिवर्सिटी के लिए कसरत तेज, 9 जगहों पर देखी जा रही जमीन
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हिमाचल में संस्कृत यूनिवर्सिटी के लिए कसरत तेज, 9 जगहों पर देखी जा रही जमीन
हिमाचल में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा पिछले ही साल मिला है. (सांकेतिक तस्वीर)

हिमाचल सरकार (Himachal Government) संस्कृत विश्वविद्यालय (Sanskrit University) खोलने के लिए जोर-शोर से कवायद कर रही है. इसके लिए भूमि चयन का काम चल रहा है. सूबे में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में संस्कृत विश्वविद्यालय (Sanskrit University) के लिए सरकार ने कसरत तेज कर दी है. प्रदेश के नौ स्थानों पर भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है. इनमें से किसी एक उपयुक्त स्थान पर संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित होगा. इसकी पुष्टि शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर (Govind Singh Thakur) ने की है. हिमाचल में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है. पिछले साल 8 सितंबर को संस्कृत को हिंदी के बाद दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला था. इसके बाद प्रदेश में संस्कृत को बढ़ावा देने की बात कही गई थी.

रिटायर्ड अधिकारी केसी शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था. जिसकी बैठक 5 सितंबर को ही हुई है. अब संस्कृत को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए योजना तैयार की जाएगी. ताकि संस्कृत को दूसरी राजभाषा के रूप में कार्यान्वित किया जा सके.

सरकारी कामकाज में संस्कृत का उपयोग नहीं 



हिमाचल में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा बेशक मिल चुका है. लेकिन अभी सरकारी कार्यालयों में इसका उपयोग न के बराबर है. ज्यादातर काम हिंदी या अंग्रेजी में हो रहा है. अब तक केवल मंत्रिमंडल की शपथ के दौरान ही कुछेक मंत्रियों ने संस्कृत में शपथ ली है. बहरहाल अब संस्कृत दूसरी राजभाषा बन चुकी है. ऐसे में देखना यह है कि सरकार इसे सरकारी कार्यों में भी कामकाज की भाषा बना पाती है या नहीं. इसके अलावा प्रदेश में संस्कृत की तरफ युवाओं का रूझान कैसे होगा. इस पर भी सरकार को काम करना होगा.
नई शिक्षा नीति में मां बोली से भी पढ़ाई

हिमाचल के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत मां बोली में भी पढ़ाई करने का प्रावधान है. हिमाचल भी इस दिशा में काम कर रहा है. लोगों के सुझाव भी लिए जा रहे हैं. चूकिं प्रदेश की अपनी कोई सर्वमान्य बोली नहीं है. हर क्षेत्र की अलग-अलग बोलियां हैं. ऐसे में शिक्षा विभाग इस योजना पर काम कर रहा है कि जिस क्षेत्र में जिस मां बोली में बात होती है उसके जरिये ही शिक्षा दी जा सके.
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