स्कूली बच्चों से मोबाइल-टीवी की लत छुड़वाने के लिए ये कदम उठाएगी हिमाचल सरकार

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज (Suresh Bhardwaj) ने कहा कि मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से छात्रों का लर्निंग आउटकम कम हुआ है.

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: September 12, 2019, 11:46 AM IST
स्कूली बच्चों से मोबाइल-टीवी की लत छुड़वाने के लिए ये कदम उठाएगी हिमाचल सरकार
स्कूलों में मोबाइल फोन का प्रयोग. (सांकेतिक तस्वीर)
Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: September 12, 2019, 11:46 AM IST
शिमला. हिमाचल (Himachal Pradesh) में युवाओं में फैलता नशे का जहर सूबे के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. स्कूली छात्र भी इसकी जद में आ रहे हैं. जिसे देखते हुए सरकार ने अगले शैक्षणिक सत्र से पाठ्यक्रम में नशे का चैप्टर शुरू करने की मन बनाया है. साथ ही मोबाइल (Smartphone) भी स्कूली छात्रों के लिए नशे की डोज जैसा काम कर रहा है. इसके लिए भी सरकार पहल करने जा रही है.

यह करेगी सरकार
हिमाचल धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में जा रहा है. समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हिमाचल भी उड़ता पंजाब बन जाएगा. नशे की जद में युवा आ रहे हैं जिनमें सबसे ज्यादा संख्या स्कूली छात्रों की है. हिमाचल में कई बार ऐसे वीडियोज भी सामने आए हैं, जिसमें स्कूली छात्र खुलम खुला नशा करते हुए देखे गए हैं. बहरहाल, यह अब सरकार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है. जिसे देखते हुए सरकार ने अगले शैक्षणिक सत्र से पाठ्यक्रम में नशे का चैप्टर डालने का मन बनाया है. एनसीईआरटी के तहत राज्यों को कुछ चैप्टर जोड़ने का अधिकार होता है.

यह बोले शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज (Suresh Bhardwaj) ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि नवमीं और दसवीं के छात्रों को नशे के चैप्टर में नशे के दुष्प्रभावों और छात्र जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी जाएगी.शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज का मानना है कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों की अपेक्षा निजी स्कूलों के छात्र नशे की गिरफ्त में ज्यादा हैं. क्योंकि सरकारी स्कूलों के बच्चों के पास कम पैसे होते हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों के छात्रों के पैसे ज्यादा होते हैं, इसलिए वो नशा बेचने वालों के जाल में जल्दी फंस जाते हैं. सरकार की कोशिश रहेगी कि नशे पर चारों ओर से अटैक किया जाए.

सरकार को मिली रिपोर्ट
नशा तो छात्र जीवन खराब कर रही रहा है लेकिन मोबाइल भी नशे से कम नहीं है. सरकार को मिली रिपोर्टस में स्कूलों-कालेजों में मोबाइल का प्रयोग बढ़ रहा है. जिससे छात्रों की मैमोरी और स्टडी ऑवर घट रहे हैं. शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि सरकार मोबाइल फोन को कानूनी तौर पर प्रतिबंधित करने का विचार कर रही है. इसके लिए कानूनी पहलुओं को देखा जाएगा. मोबाइल फोन को या तो बैन किया जाएगा या फिर ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि स्कूल-कालेजों में पढ़ाई के समय मोबाइल एक ही जगह पर रखे जाएं.
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मोबाइल का असर
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से छात्रों का लर्निंग आउटकम कम हुआ है. छात्र पढ़ाई का अर्थ नहीं जानता है. पुरानी शिक्षा पद्धति में पढ़ाई कंठस्थ की जाती थी, लेकिन अब कई छात्र यह भी नहीं जानते कि देश आजाद कब हुआ और महात्मा गांधी कौन हैं? वे गूगल में जाकर सर्च करते हैं. नशा और मोबाइल का छात्र जीवन में पड़ रहा दुष्प्रभाव चिंताजनक है. ऐसे में सरकार की ओर से सख्त कदम उठाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि देखना यह होगा कि इसे सरकार कितना प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है.

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First published: September 12, 2019, 11:36 AM IST
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