हिमाचल मानवाधिकार आयोग को 15 साल बाद मिला अध्यक्ष, जस्टिस पीएस राणा ने ली शपथ
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हिमाचल मानवाधिकार आयोग को 15 साल बाद मिला अध्यक्ष, जस्टिस पीएस राणा ने ली शपथ
जस्टिस पीएस राणा शपथ लेते हुए हैं.

पीएस राणा ने गुरुवार को आयोग में सेल्फ शपथ ली और पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि प्रदेश में 2005 से अब तक करीब 2500 मामले लंबित पड़े हुए हैं. अब मामलों को चरणबद्ध तरीक़े से निपटाया जाएगा.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग (Himachal Human Right Commission) को 15 साल बाद अध्यक्ष मिल गया है. जस्टिस पीएस राणा ने प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद की शपथ लेकर पदभार ग्रहण कर लिया है. वहीं अजय भंडारी को मानवाधिकार आयोग का सदस्य बनाया गया है. प्रदेश कैबिनेट ने आयोग में 42 कर्मचारियों की नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों के बाद 2005 के बाद अब फिर से हिमाचल में मानवाधिकार आयोग काम करना शुरू कर देगा.

कोर्ट के निर्देश है कि हर राज्य में मानवाधिकार आयोग होना चाहिए, ताकि नागरिकों के हितों का हनन न हो. इसी के चलते हिमाचल प्रदेश में 15 साल बाद फिर से आयोग की कार्यकारिणी का गठन किया गया.

क्या बोले राणा
पीएस राणा ने गुरुवार को आयोग में सेल्फ शपथ ली और पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि प्रदेश में 2005 से अब तक करीब 2500 मामले लंबित पड़े हुए हैं. अब मामलों को चरणबद्ध तरीक़े से निपटाया जाएगा. कोई भी व्यक्ति अगर मानवाधिकार आयोग में सादे पत्र में भी शिकायत देकर अपनी अपील कर सकता हैं. इसके लिए कोर्ट फ़ीस की ज़रूरत भी नहीं पड़ती है.
आयोग के दायरे में सभी तरह के संस्थान


आयोग के दायरे में सभी तरह के निज़ी व सरकारी संस्थान आते है. आयोग में यदि मामले में बात नही बनती है तो आयोग सीधा उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में मामले को स्थानांतरित कर सकता है. मनुष्य के अधिकारों की रक्षा करना मानव अधिकार आयोग का कार्य रहेगा.
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