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हिमाचल के ‘ऑटो वाले बाबा’: पोती को पढ़ाने के लिए ऑटो को बनाया घर, सोशल मीडिया पर अपील से इकट्ठा हुए 24 लाख

कांगड़ा के देशराज मुंबई में कई साल से ऑटो चलाते हैं. (फोटो और वीडियो साभार-Humans of Bombay.)

कांगड़ा के देशराज मुंबई में कई साल से ऑटो चलाते हैं. (फोटो और वीडियो साभार-Humans of Bombay.)

Auto Wale Baba in Mumbai: 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' के फेसबुक पेज ने देशराज की स्टोरी शेयरी की गई थी और लोगों से आर्थिक मदद की अपील भी की गई थी. इस पहल से 20 लाख रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 24 लाख की राशि जमा हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 9:52 AM IST
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शिमला. सोशल मीडिया (Social Media) की ताकत का एहसास तो आप सभी को है. रानू मंडल, बाबा का ढाबा जैसे ऐसे किस्से हैं, जो सोशल मीडिया के प्रभाव को बताने के लिए काफी हैं. अब एक ऐसा ही मामला हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में भी सामने आया है. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के एक ऑटो चालक की तकदीर सोशल मीडिया ने बदल दी. यह सब हुआ फेसबुक पेज ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे की एक पोस्ट से. कहानी मुंबई में 35 साल से ऑटो चलाने वाले 74 साल के देशराज की है.

देशराज हिमाचल के कांगड़ा जिले के बैजनाथ के सगूर खास गांव के रहने वाले हैं. वह काम की तलाश में मुंबई गए और पिछले 35 साल से मायानगरी में ऑटो चला रहे हैं. देशराज सिंह 24 साल से ऑटो को ही अपना घर बनाकर रह रहे हैं. 74 साल के बुजुर्ग ऑटो चला कर अपने पोते-पोती के अच्छे भविष्य के लिए काम कर रहे हैं.
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दोनों बेटों की हो चुकी है मौत
देशराज के 4 बच्चे थे. 3 लड़के और एक लड़की. उनके सबसे बड़े बेटे की मौत साल 2016 में हो गई और उनके दो साल बाद उन्होंने अपने दूसरे बेटे को भी खो दिया. देशराज का कहना है कि वह एक दिन की भी छुट्टी नहीं ले सकते हैं, क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है. देशराज ने कहा, 'मेरी पोती आगे भी पढ़ेगी. वह 12 पास हो चुकी है और मैं चाहता हूं कि वह B.Ed करे, जब उसकी पढ़ाई पूरी हो जाएगी तो तब वह एक शिक्षक बन जाएगी और अपने पैरों पर खड़ी हो सकेगी.  देशराज आगे कहते हैं कि जिस दिन पोती शिक्षक बन जाएगी उस दिन वह एक हफ्ते तक सबको फ्री में ऑटो में घूमाएंगे. वह दिल्ली से बीएड करना चाहती है.



मुंबई में ऑटो चलाते हैं देशराज. वह कांगड़ा जिले से हैं. (फोटो-Humans of Bombay)


24 लाख की मदद दी
'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' के फेसबुक पेज पर उनकी स्टोरी साझा की गई और लोगों से मदद की अपील भी की गई. इस पहल के जरिये 20 लाख रुपये जुटाने का लक्ष्य था, लेकिन इससे कहीं ज्यादा पैसे इकट्ठा हो गए. इस पहल के जरिए अब तक 24 लाख रुपये एकत्र किए जा चुके हैं. 24 लाख रुपये का चेक देशराज को सौंप दिया गया है, ताकि वह अपनी पोती को पढ़ा सकें.
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