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हिमाचली वैज्ञानिक महावीर सिंह का दावा- मार्च 2021 से पहले COVID-19 वैक्सीन का आना संभव नहीं

हिमाचल के वैज्ञानिक प्रो. महावीर सिंह.
हिमाचल के वैज्ञानिक प्रो. महावीर सिंह.

COVID-19 Vaccine: प्रो. महावीर सिंह शीर्ष 2 फीसदी साइंटिस्ट में शामिल हैं और इन्हें मेडिसिन के क्षेत्र की इम्यूनोलॉजी श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है. इस श्रेणी में प्रो.महावीर सिंह के अलावा देश के 3 अन्य वैज्ञानिक भी शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 11:03 PM IST
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शिमला. देश और दुनिया के जाने-माने नैनो साइंटिस्ट प्रो. महावीर सिंह ने दावा किया है कि मार्च-2021 से पहले कोरोना की वैक्सीन आना संभव नहीं है. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला (Shimla) में फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर मेडिसिन फील्ड में इम्यूनोलॉजी पर शोध कार्य कर रहे प्रो. महावीर का कहना है कि वैक्सीन (Vaccine) बनाने की प्रकिया काफी लंबी और जटिल होती है. क्लीनिकल ट्रायल में लंबा वक्त लगता है, ये तीन स्टेज (Three Stage) में बनती है. लेवल वन, टू और थ्री स्टेज में वैक्सीन तैयार की जाती है.

भारत सहित कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे हैं. उन्होंने कहा कि रूस, अमेरिका, चीन और ऑक्सफॉर्ड की वैक्सीन अभी क्लीनिकल ट्रायल (Clinical trial) के लेवल थ्री पर है, जिसमें पूरी तरह तैयार होने में समय लगेगा. उन्होंने कहा कि जब तक वैक्सीन नहीं आती, तब तक अपने इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाना होगा. इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए विटामिन सी, डी, ई, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपुर आहार लेने की जरूरत है.





ये बोले प्रो.महावीर
News 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में प्रोफेसर महावीर सिंह ने कहा कि जिन देशों की लैब में कोविड वैक्सीन तैयार करने की प्रकिया लेवल थ्री पर पहुंची है, वहां पर बहुत सारे लोगों पर ये वैक्सीन आजमाई जा रही है. इसके पूरे परिणाम अब तक नहीं आए हैं. उन्होंने कहा कि डाटा के बिना अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि वैक्सीन की डोज किस व्यक्ति को कितनी देनी है. इसके साइड इफैक्ट है या नहीं? ये कितने समय में असर दिखाना शुरू करेगी, तो ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब आने में समय लगेगा. जब इन सवालों के जबाव वैज्ञानिकों को नहीं मिल जाते तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता. प्रो.महावीर ने कहा कि इस पूरी प्रकिया को देखते हुए मार्च या अप्रैल 2021 से पहले वैक्सीन आने की संभावना नहीं है. मार्च-अप्रैल में भी ये चुनिंदा स्थानों पर मिल पाएगी. उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते वैज्ञानिकों के साथ साथ सरकारों पर भी प्रेशर है, लेकिन इस प्रेशर के बीच किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा सकती, इसलिए समय लग रहा है.

कौन हैं प्रो.महावीर सिंह
प्रो.महावीर सिंह शिमला जिले के कुमारसैन क्षेत्र के घुमाना के रहने वाले हैं. एचपीयू में 1997 से फिजिक्स विभाग में पढ़ा रहे हैं. कॉमनवैल्थ फैलो रह चुके प्रो.महावीर 2004 में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी, 2006 में यूके, स्कॉटलैंड, 2007-08 में फ्रांस में शोध के सिलसिले में रहे हैं.इसके अलावा इटली,जर्मनी और जापान में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा ले चुके हैं. कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में इनके शोध पत्र छप चुके हैं. 2006 में यूके में तत्तकालीन ब्रिटिश ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने इन्हें कॉमनवेल्थ अवॉर्ड से नवाजा है. ग्लोबल अचीवर अवॉर्ड, बेस्ट पोस्टर अवॉर्ड अमेरिका और वर्ल्ड साइंस कांग्रेस की ओर से 100 मोस्ट इन्फ्लुएंशियल वाइस चांसलर अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं. राज्य सरकार ने इन्हें बेस्ट रिसर्चर से सम्मानित किया है. प्रो.महावीर हिमाचल में एक निजी विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर के रूप में सेवाएं दे चुके हैं और 2 दर्जन से ज्यादा छात्रों को पीएचडी करवा चुके हैं. प्रो. सिंह को हाल ही में अमेरिका की स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी की गई विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है.

कैंसर के इलाज पर भी रिसर्च
प्रो. महावीर सिंह शीर्ष 2 फीसदी साइंटिस्ट में शामिल हैं और इन्हें मेडिसिन के क्षेत्र की इम्यूनोलॉजी श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है. इस श्रेणी में प्रो.महावीर सिंह के अलावा देश के 3 अन्य वैज्ञानिक भी शामिल हैं. ये रैंकिग साइंटिस्ट के अब तक के रिसर्च वर्क, उसकी गुणवत्ता और कार्य क्षेत्र के आधार पर दी जाती है. ये नैनो टैक्नोलॉजी के माध्यम से कैंसर के इलाज पर भी रिसर्च कर रहे हैं.
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