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पच्छाद सीट: कांग्रेस का परांपरागत गढ़, इस बार त्रिकोणीय मुकाबला!

News18 Himachal Pradesh
Updated: October 21, 2019, 9:19 AM IST
पच्छाद सीट: कांग्रेस का परांपरागत गढ़, इस बार त्रिकोणीय मुकाबला!
पच्छाद सीट पर अब तक 13 बार चुनाव हुए हैं.

Pacchad Assembly Seat: भाजपा की ओर से रीना कश्यप और कांग्रेस की ओर से यहां गंगूराम मुसाफिर मैदान में हैं. मुसाफिर सात बार विधायक रह चुके हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की पच्छाद विधानसभा (Pacchad Assembly Seat) में सीट पर सोमवार को उपचुनाव (By-Election) के लिए वोट डाले जा रहे हैं. यह सीट कांग्रेस का परांपरागत गढ़ रही है. कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले यहां मैदान मारा है. हालांकि, इस बार भाजपा (BJP) से बागी हुई दयाल प्यारी (Dayal Pyari) की वजह से मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है.

पच्छाद सीट पर अब तक हुए 13 चुनाव में 9 बार कांग्रेस (Congress) की जीत हुई है, इसके अलावा दो बार भाजपा (Bjp), एक बार जनता पार्टी और एक बार निर्दलीय को विजय मिली है. पच्छाद सीट पर साल 1952 से 1977 तक लगातार कांग्रेस का कब्जा रहा और साल 1977 में पहली बार यहां से जनता पार्टी के प्रत्याशी ने खाता खोला.

आजाद जीते थे गंगूराम मुसाफिर
साल 1982 में गंगूराम मुसाफिर निर्दलीय चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे औ लगातार इस सीट पर जीतते रहे. साल 2012 में पहली बार भाजपा ने पच्छाद में खाता खोला और यहां से सुरेश कश्यप विधायक बने. 2017 में भी सुरेश कश्यप यहां से जीते. 2019 लोकसभा चुनाव में सुरेश कश्यप शिमला लोकसभा सीट से चुनाव जीते और इस कारण अब यह सीट खाली हुई है.

परमार थे पहले विधायक
साल 1952 में हिमाचल निर्माता और सूबे के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार पच्छाद के पहले विधायक रहे. 1957 से 1962 तक मंगाराम और जीत सिंह मनोनीत विधायक रहे. हिमाचल में 1952 से 2017 तक 13 विधानसभा चुनाव हुए हैं. जब हिमाचल प्रदेश टेरिटोरियल काउंसिल होता था, तो पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से दो विधायक होते थे. एक विधायक जनता चुनती थी और दूसरा विधायक टेरिटोरियल काउंसिल के लिए प्रदेश सरकार की ओर से मनोनीत किया जाता था. कांग्रेस की सरकार ने पच्छाद के विधायक गंगूराम मुसाफिर को हर बार मंत्री बनाया गया है. हालांकि, 2012 से भाजपा का इस सीट पर कब्जा है.

इस बार त्रिकोणीय मुकाबला
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पच्छाद सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है. क्योंकि भाजपा से बागी हुई दयाण प्यारी ने समीकरण बदल दिए हैं. वह दो बार जिला परिषद सदस्य और एक बार चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं. उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह आजाद मैदान में उतरी हैं. भाजपा की ओर से रीना कश्यप और कांग्रेस की ओर से यहां गंगूराम मुसाफिर मैदान में हैं. मुसाफिर सात बार विधायक रह चुके हैं.

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First published: October 21, 2019, 9:13 AM IST
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