हिमाचल में अज्ञात शवों के लिए आधार डाटाबेस क्यों एक्सेस करना चाहती है पुलिस?

अज्ञात शव. (सांकेतिक तस्वीर)
अज्ञात शव. (सांकेतिक तस्वीर)

डीजीपी ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि हिमाचल में अलग-अलग स्थानों पर हर साल करीब 100 अज्ञात शव मिलते हैं.

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शिमला. हिमाचल में अज्ञात शवों की पहचान करने में पुलिस को खासी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है. अज्ञात शवों की सही पहचान के लिए हिमाचल पुलिस आधार कार्ड बनाने वाले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की मदद लेगा. इस संबंध में डीजीपी संजय कुंडू ने UIDAI के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पंकज कुमार चिठ्ठी लिखी है. पुलिस मुख्यालय से जानकारी दी है कि हिमाचल में हर साल लगभग 100 अज्ञात शव मिलते हैं. बहुत से केस में शवों की शिनाख्त करने में खासी मुश्किलों की सामना करना पड़ता है.

डीजीपी की चिट्ठी
डीजीपी ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि हिमाचल में अलग-अलग स्थानों पर हर साल करीब 100 अज्ञात शव मिलते हैं. ज्यादातर शवों की शिनाख्त जरूरी डॉक्यूमेंट न होने और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों के न मिल पाने के कारण नहीं हो पाती. दस्तावेजों के अभाव के कारण पुलिस के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचते. मृत व्यक्तियों के उनके धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाता. इस स्थिति को देखते हुए पुलिस UIDAI के डाटाबेस का प्रयोग करना चाहती, ताकि अज्ञात शवों की सही पहचान हो सके.

ये बोले कुंडू
इस बावत डीजीपी संजय कुंडू ने कहा कि मृत्यु के पश्चात निजता का अधिकार तो समाप्त हो जाता है, लेकिन अन्तिम संस्कार तक मानव गरिमा का अधिकार बना रहता है. इसलिए UIDAI के डेटाबेस से मृत व्यक्तियों के बायोमेट्रिकस् मिलान करने की अनुमति दी जाए. इससे किसी जीवित व्यक्ति के निजता का अधिकार प्रभावित नहीं होगा. साथ ही कहा कि इससे लाश की पहचान करके मृतक के परिवार को सौंपा जा सकेगा और यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मृत व्यक्ति के धर्म के अनुसार उसका क्रियाक्रम हो.
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