जीरो बजट फार्मिंग में हिमाचल ने कायम की मिसाल, राज्यपाल ने केंद्र सरकार का जताया आभार

हिमाचल प्रदेश में शुरू किए गए शून्य लागत प्राकृतिक खेती का मॉडल देशभर में शुरू किया जाएगा.

G.S. Tomar | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 6, 2019, 11:58 AM IST
जीरो बजट फार्मिंग में हिमाचल ने कायम की मिसाल, राज्यपाल ने केंद्र सरकार का जताया आभार
आचार्य देवव्रत, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश
G.S. Tomar
G.S. Tomar | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 6, 2019, 11:58 AM IST
हिमाचल प्रदेश में शुरू किए गए शून्य लागत प्राकृतिक खेती (जीरो बजट फार्मिंग) का मॉडल देशभर में शुरू किया जाएगा. इसका एलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में किया. बता दें कि प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों से प्रदेश में शून्य लागत प्राकृतिक खेती पहले से ही की जा रही है. शिमाल में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने केंद्र सरकार का आभार प्रकट किया और कहा कि हिमाचल और हिमाचलवासियों के लिए यह गर्व का ‌विषय है कि देश आज हिमाचल का अनुसरण कर रहा है. हिमाचल देश के लिए कृषि क्षेत्र में मॉडल के रूप में उभर रहा है. राज्यपाल ने प्रदेश के किसान-बागवानों का भी आभार जताया जो प्राकृतिक कृषि के लिए देश भर में मिसाल बने.

बीमारियों से बचाएगा जैविक कृषि
प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों के रंग राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहे हैं. प्रदेश को शून्य लागत प्राकृतिक कृषि बनाने के लिए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अभियान शुरू किया है. इसमें प्रदेश भर के हजारों किसान-बागवानों को जोड़ा गया है और राज्यपाल के प्रयासों के सकारात्मक परिणाण आने लगे हैं. राज्यपाल ने कहा कि जैविक कृषि करने से भंयकर बीमारियों से बचा जा सकता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से ज्यादा उत्पादन के लिए दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है उससे जमीन की उत्पादक क्षमता घट रही है और बीमारियां बढ़ रही हैं.

इस पद्धति से पेड़ भी स्वस्थ रहता है

आचार्य देवव्रत ने कहा कि उन्होंने हाल ही में देश के राज्यपालों को गुरुकुल क्षेत्र में बुलाया था. राज्यपालों को खेत दिखाए गए. उन्होंने कहा कि यहां कृषि मंत्री, सांसद और कृषि से जुड़े लोग भी आए. सभी ने अपनी आंखों से खेतों को देखा. राज्यपाल ने कहा कि वह जो काम कर रहे हैं वह प्रैक्टिकल है और दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि सेब के हमारे सैकड़ों किसान इस पद्धति को अपना रहे हैं. इन किसानों के अनुभव सभी के संज्ञान में हैं. इस पद्धति से सेब का आकार बढ़ता है और उसका कलर स्वाभाविक रूप से आता है. इस पद्धति से पेड़ भी स्वस्थ रहता है. उन्होंने कहा कि निश्चितरूप से बागवानी में जैसे अन्य फसलें हैं उसमें उतना ही लाभकारी प्राकृतिक पद्धति है.

ये भी पढ़ें - बजट-19: हिमाचल के CM जयराम ने सराहा, कांग्रेस बोली-निराशाजनक

ये भी पढ़ें - हिमाचल: शादी के 13 साल बाद पैदा हुआ बच्चा, नाम रखा ‘बाहुबली’
First published: July 5, 2019, 7:11 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...