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हिमाचल में रिकॉर्ड तोड़ सेब का उत्पादन फिर भी हैं बागवान परेशान, जानें क्यों

Pradeep Thakur | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 16, 2019, 6:26 PM IST
हिमाचल में रिकॉर्ड तोड़ सेब का उत्पादन फिर भी हैं बागवान परेशान, जानें क्यों
हिमाचल में इस बार रिकॉर्ड सेब उत्पादन ने पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.

प्रदेश में सेब के रिकॉर्ड उत्पादन होने का खमियाजा बागवानों को झेलना पड़ रहा है. बागवानों को सेब के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं.

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शिमला. हिमाचल में इस बार रिकॉर्ड (Record Production) सेब उत्पादन ने पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इस बार रिकॉर्ड संख्या में सेब (Apple) की पेटियां बाजार पहुंची. हिमाचल में सेब सीजन अब समाप्ति की ओर है. प्रदेश में सेब के रिकॉर्ड उत्पादन होने का खमियाजा बागवानों को झेलना पड़ रहा है. बागवानों को सेब के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं. बागवानी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 2 करोड़ 74 लाख 79 हजार 669 पेटियां बाजार में बिक चुकी हैं, जबकि बीते वर्ष 2018 में 1 करोड़ 42 लाख पेटियां बाजार में उतरी ही थीं. वर्ष 2017 में 1 करोड़ 73 लाख सेब पेटियों का उत्पादन हुआ था.

मैदानी इलाकों में बारिश के चलते दाम कम मिल रहे हैं: डॉ. मनोहर लाल धीमान

बागवानी के निदेशक डॉ. मनोहर लाल धीमान (Dr. Manohar Lal Dheeman) का मानना है कि इस बार सेब का सीजन अच्छा रहा. उत्पादन भी संतोषजनक है. मैदानी इलाकों में बारिश के चलते दामों में थोड़ी कमी रही है. अगले साल से नई वेरायटी के सेब का उत्पादन शुरू हो जाने से पैदावार ज्यादा होने की उम्मीद की जा रही है.

'पिछले बार प्रति पेटी अधिक दाम मिले थे'

उधर बागवान संघों का मानना है कि बागवानों को इस बार अच्छे दाम नहीं मिल पाए हैं. फल, सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि रेट कम मिल रहे हैं. सीजन के दौरान अच्छे सेब के दाम 1600 रूपये से लेकर 2200 रूपये प्रति पेटी तक मिला करते थे जबकि इस बार 1 हजार से लेकर 1600 के बीच मिले हैं. कम दाम मिलने की एक प्रमुख वजह विभाग और दूसरी संस्थाओं द्वारा की जाने वाली प्री असेसमेंट भी है.

17 देशों से सेब का आयात किया गया इसलिए भाव कम मिल रहे हैं

फल उत्पादक संघ का कहना है कि इस बार तीन करोड़ पेटियां उत्पादित होने का पूर्वानुमान लगाया गया था. इसके चलते व्यापारियों ने पहले ही कम दाम में सेब खरीदना शुरू किया. इसी तरह बीते वर्ष 1 करोड़ 50 लाख पेटियों का अनुमान था, जिसके चलते व्यापारियों को लगा कि सेब का उत्पादन कम होगा और 17 देशों से सेब आयात किया गया और इसका नुकसान बागवानों को उठाना पड़ा है. ऐसे में कश्मीर की तर्ज पर सेब की प्री असेसमेंट बंद हो जानी चाहिए ताकि बाजार में किसी प्रकार की गलत धारणा न बन जाए.
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'अफवाहें फैलने के चलते भी कम मिल रहे हैं दाम'

डॉ. मनोहर लाल धीमान का मानना है कि प्री असेसमेंट जरूरी है और यह लंबे समय से हो रही है, लेकिन कुछ लोग प्री असेसमेंट के आंकड़ों को गलत तरीक से बाजार में पेश करते हैं. इस बार भी ऐसा ही हुआ है. विभाग ने तीन करोड़ पेटियों के उत्पादन का अनुमान लगाया था, जबकि बाजार में चार से साढ़े करोड़ पेटियों के उत्पादन होने की अफवाहें फैली हैं.

Dr. Manohar Lal Dheeman
बागवानी के निदेशक डॉ. मनोहर लाल धीमान का मानना है कि मैदानी इलाकों में बारिश के चलते दामों में थोड़ी कमी रही है.


'प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाएं ताकि बढ़िया दाम मिले'

बागवान हरीश चौहान ने बताया कि उत्पादन बढ़ने के साथ ही दाम कम होने का खतरा भी बना रहता है. ऐसे में अब बागवानों के सुझाव आ रहे हैं कि हिमाचल में ज्यादा से ज्यादा प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाएं ताकि जो सी या डी ग्रेड सेब हैं, उसकी सप्लाई प्रोसेसिंग यूनिट को की जा सके. ऐसे में अच्छी क्वालिटी के सेब को उचित दाम मिलेंगे.

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First published: October 16, 2019, 6:16 PM IST
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