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सरकारी सिस्टम का शिकार बना दिव्यांग, वीडियो बनाकर मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार

दिव्यांग युवक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक गया है और अब उसने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है

परेशान-हताश हो विनय जैन ने अब सोशल मीडिया (Social Media) पर मुख्यमंत्री के नाम एक वीडियो पोस्ट कर गुहार लगाई है. वीडियो में विनय जैन ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुहार लगाते हुए कहा है कि उनके काम में सरकारी अड़ंगे को खत्म किया जाए

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पांवटा साहिब. दिव्यांगों के कल्याण के लिए और उनकी सहायता के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है. दिव्यांगजनों के सरकारी दफ्तरों में काम जल्दी हो सके इसके लिए सरकार ने सख्त निर्देश दे रखे हैं. लेकिन सरकारी विभागों के अधिकारी शासन के आदेशों को पलीता लगा रहे हैं. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सिरमौर जिले के पांवटा साहिब (Paonta Sahib) निवासी विनय कुमार जैन सरकारी अड़ंगा झेलने को मजबूर हैं. शारीरिक रूप से 80 प्रतिशत दिव्यांग विनय की पत्नी ज्योति भी उनकी ही तरह दिव्यांग हैं.

विनय जैन के स्वर्गीय दादा जगरोशन लाल जैन ने शिमला के सेक्टर-1 न्यू शिमला में हाउस B-87 में वर्ष 1996 में हिमुड़ा से ग्राउंड फ्लोर एक स्कीम के तहत टेनेंसी डीड से खरीदा था. वर्ष 1999 में नगर निगम शिमला से नक्शा मंजूर करवा कर उन्होंने पहली और दूसरी मंजिल का निर्माण करवाया. जून 2016 में जगरोशन लाल जैन के देहांत के बाद परिवार के अन्य सदस्यों के साथ विनय जैन को भी संपत्ति का मालिकाना हक मिला. अगस्त 2017 में सबने इस संपत्ति को हिमुड़ा से फ्री होल्ड करवा कर नवंबर 2019 में पहली मंजिल का मालिकाना हक ले लिया.

हिमुडा क अधिकारी काम में अड़चन डाल रहे 

विनय जैन का मकान शिमला में हिमुडा कॉलोनी में बना है. लिहाजा मकान बेचने के लिए विनय जैन को हिमुडा से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती. सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद भी हिमुडा के अधिकारी उन्हें संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं करवा रहे और बार-बार इसमें कोई ना कोई अड़चन डाल रहे हैं. परेशान-हताश हो विनय जैन ने अब सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के नाम एक वीडियो पोस्ट कर गुहार लगाई है. वीडियो में विनय जैन ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुहार लगाते हुए कहा है कि उनके काम में सरकारी अड़ंगे को खत्म किया जाए.

विनय के मुताबिक कोरोना काल में पांवटा साहिब से राजधानी शिमला तक का सफर करना और वहां दिन भर सरकारी दफ्तरों में धक्के खाना बड़ी मुसीबत है. लेकिन मजबूरी में उन्हें यह सभी काम करने पड़ रहे हैं. विनय जैन के मुताबिक उन्होंने और उनकी मां ने मकान बेचने संबंधित सभी सरकारी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली हैं. हिमुडा ने जो ऑब्जेक्शन लगाए थे उन्हें भी पूरा कर लिया है. लेकिन इसके बावजूद भी वही ऑब्जेक्शन दोबारा लगाया गया है. सरकारी अड़ंगे से परेशान अब यह दिव्यांग परिवार सिस्टम पर सवाल उठा रहा है.

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