फिर विवादों में HPU: पहले से चल रहे कोर्स के लिए बना दिया नया विभाग, दुविधा में स्टूडेंट्स

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी. (सांकेतिक फोटो)

Himachal Pradesh University Controversy: एनएसयूआई ने भी वही सवाल उठाए जो एसएफआई उठा रही है. NSUI के छात्र नेता वीनू मेहता ने भी इस कोर्स पर सवाल उठाया है. मेहता ने कहा कि यह कोर्स कुछ साल पहले चल रहा तो दूसरा कोर्स शुरू करने की क्या जरूरत है.

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शिमला. विवादों से घिरा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (Himachal Pradesh Uneversity) हमेशा से चर्चा का केंद्र बना रहता है. इस बार एचपीयू प्रशासन चर्चा में आया है नए कोर्स को लेकर. एक ऐसा कोर्स (Course) शुरू किया जा रहा है, जो पहले करवाया जा रहा है, उसके लिए विभाग भी नया खोला जाएगा. एचपीयू ने पर्यावरण विज्ञान विषय में एमएससी (MSC) के लिए एक नया विभाग बनाया है, जबकि पहले से इंटर डिस्पलीनरी विभाग में ये कोर्स चल रहा है. ये खेल समझ से परे है. इसके पीछे क्या मकसद है, कोई नहीं जानता है.

पहले से चल रहे कोर्स के लिए 332 आवेदन

अहम बात है यह है कि जो कोर्स पहले से चल रहा है उसके लिए इस साल 332 छात्रों ने आवेदन किया है. प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला मिलता है, लेकिन अब जिस विभाग में 31 अगस्त तक आवेदन मांगे गए हैं, उसमें दाखिला मेरिट के आधार पर मिलेगा. इस कारनामे पर एचपीयू प्रशासन को छोड़ सबका सर चकरा रहा है. छात्र परेशान हैं कि किस विभाग में दाखिला लें, कोर्स एक ही है और विभाग दो.

फैसले पर सवाल

इस फैसले पर छात्र संगठन लगातार सवाल उठा रहे हैं. नए कोर्स और विभाग शुरू करने को लेकर अपनाई गई प्रकिया भी सवालों के घेरे में है. कब बोर्ड ऑफ स्टडीज ने प्रपोजल तैयार किया, स्टेंडिग कमेटी में क्या हुआ, अकेडमिक कॉउंसिल ने किस आधार पर प्रपोजल पास कर कार्यकारिणी को भेजा. बहुत से सवाल हैं जिनके जबाव नहीं मिल पा रहे हैं. वाइस चांसलर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

क्या कहते हैं नियम

नया विभाग शुरू करने के लिए, जो तय प्रकिया है उसके तहत कार्यकारिणी का प्रस्ताव चांसलर के पास मंजूरी के लिए जाता है. कोर्स भले ही शुरू कर दिया जाता है विभाग की मंजूरी बाद में भी ली जा सकती है, लेकिन मंजूरी के लिए है कि जो भी विभाग या कोर्स अप्रूवल के लिए आया है वो पहले से मौजूद न हो और न ही उसकी पुनर्वावृति होनी चाहिए.

एसएफआई बोली- 420 का मामला

SFI का कहना है कि नियमों की उल्लंघना कर एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने की कोशिश की जा रही है. इस संबंध में डीन ऑफ स्टडीज को भी मांग पत्र सौंपा गया है. एसएफआई का कहना है कि  2013 से एमएससी पर्यावरण विज्ञान विषय अंतर्विषयक अध्ययन विभाग के माध्यम से हो रही है. 2019 से पीएचडी भी इसी कोर्स के लिए शुरू की गई है. एसएफआई के राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिनियम अनुसार भी एक ही विषय के दो अलग अलग कोर्स चलाना गैर कानूनी है. विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद राजनीति का शिकार हो चुकी है और नए विभाग के माध्यम से सरकार के चहेते लोगों को पिछले दरवाजे से इन विभागों में प्रवेश देने के लिए इस कारनामे को कानून को दरकिनार करते हुए अंजाम दिया जा रहा है. ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद और कुलपति के द्वारा विश्वविद्यालय की वित्त कमेटी और राज्यपाल को गुमराह कि जा रहा है, इस मामले पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए.

NSUI ने ये कहा

एनएसयूआई ने भी वही सवाल उठाए जो एसएफआई उठा रही है. NSUI के छात्र नेता वीनू मेहता ने भी इस कोर्स पर सवाल उठाया है.  मेहता ने कहा कि यह कोर्स कुछ साल पहले चल रहा तो दूसरा कोर्स शुरू करने की क्या जरूरत है. उन्होंने कहा कि एक ही विवि में अलग-अलग विभागों में एक ही कोर्स रेगुलर कैसे पढ़ाया जा सकता है. साथ ही सवाल किया कि ये कोर्स किन संकाय, विभागों के अंतर्गत संचालित किए जाएंगे.

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