Unlock-5: छात्रों को स्कूल बुलाने पर सस्पेंस बरकरार, अभिभावकों से पूछेगी हिमाचल सरकार

हिमाचल प्रदेश में स्कूल. (सांकेतिक तस्वीर)
हिमाचल प्रदेश में स्कूल. (सांकेतिक तस्वीर)

School opening in Himachal: अगस्त माह में ही 48 हजार अध्यापकों ने अभिभावकों और छात्रों से संवाद किया था, जिसमें 92 प्रतिशत अभिभावकों ने हिस्सा लिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 6:38 AM IST
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शिमला. कोरोना संकट (Corona virus) के बीच शुरू हो हुए अनलॉक चरण 5 में केंद्र सरकार ने स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने के निर्देश दिए हैं. राज्य (State) सरकारें शिक्षा मंत्रालय की एसओपी के तहत स्कूल खोल सकती है, लेकिन हिमाचल (Himachal Pradesh) सरकार अभी स्कूल खोलने में जल्दबाजी नहीं करेगी. 15 अक्तूबर के बाद स्कूलों (Schools) को चरणबद्ध तरीके से खोलने के निर्देश थे.

क्या बोले शिक्षा मंत्री गोविंद
हिमाचल के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने साफ किया कि छात्रों को स्कूलों में तब तक नहीं बुलाया जाएगा, जब तक अभिभावकों की सहमति नहीं होगी. इसके लिए ईपीटीएम यानी ऑनलाइन तरीके से अध्यापक-अभिभावकों की बैठके करने के निर्देश दिए गए हैं. जहां संख्या कम है. वहां पर फिजिकली भी बैठक हो सकती है. इसमें स्कूलों को माइक्रो प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें अभिभावकों की राय शामिल होगी.

केवल दो कक्षाएं बुलाई जाएंगी
पहले चरण में 10 वीं और 12 वीं बोर्ड कक्षाओं वाले छात्रों को ही स्कूल बुलाया जाएगा. उसके बाद छोटी कक्षाओं पर विचार किया जाएगा. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल बुलाने में समय लग सकता है. सरकार के ताजा निर्देशों के तहत 18 सितंबर तक ईपीटीएम बैठकें होंगी.



100 फीसदी स्टॉफ आ रहा है स्कूल
हिमाचल में अब 100 फीसदी स्टाफ स्कूल आ रहा है. इसमें शिक्षक और गैर शिक्षक दोनों शामिल हैं. ऑनलाइन पढ़ाई भी स्कूलों से ही करवाई जा रही है, लेकिन अब स्कूलों में छात्रों को बुलाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. ईपीटीएम के जरिए पहले भी अध्यापकों-अभिभावकों और छात्रों की बैठकें हुई थी. अगस्त माह में ही 48 हजार अध्यापकों ने अभिभावकों और छात्रों से संवाद किया था, जिसमें 92 प्रतिशत अभिभावकों ने हिस्सा लिया था. उसी का दूसरा दौर अब चल रहा है. इस वक्त स्कूल में गाइडेंस लेने के लिए ही छात्र आ रहे हैं लेकिन बोर्ड कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों की कक्षाएं शुरू हों, इसकी तैयारी की जा रही है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हों मदरसे
असम सरकार ने मदरसो की फंडिंग रोकने को लेकर फैसला लिया है. इस फैसले पर हिमाचल के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि असम सरकार ने क्या फैसला किया है उसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन हमारा मानना यह है कि मदरसे हों या धार्मिक शिक्षण संस्थान, वो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हों. बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें आधुनिक शिक्षा दी जानी चाहिए.
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