Article-370: जम्मू एवं कश्मीर के बहाने हिमाचल में धारा-118 मुद्दा सुलगाने की कोशिश?

2007 में धूमल सरकार बनी तो उन्होंने धारा-118 में संशोधन किया और प्र‌ावधान किया कि बाहरी राज्य का व्यक्ति जो हिमाचल में 15 साल से रहता हो और बोनोफाइनड हों, वह जमीन खरीद सकता है. इसका विरोध हुआ. बाद में कांग्रेस सरकार ने इस शर्त को बढ़ाकर 30 साल कर दिया था.

News18 Himachal Pradesh
Updated: August 8, 2019, 11:01 AM IST
Article-370: जम्मू एवं कश्मीर के बहाने हिमाचल में धारा-118 मुद्दा सुलगाने की कोशिश?
हिमाचल में धारा-118 का मुद्दा.
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Updated: August 8, 2019, 11:01 AM IST
जम्मू एवं कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा-35A हटाने और राज्य के पुनर्गठन के बाद अब वहां देश का कोई भी नागरिक जमीन खरीद सकता है. लेकिन केंद्र सरकार के इस फैसले की वजह से हिमाचल प्रदेश पर भी असर पड़ने लगा है. कई नेता अब हिमाचल में जमीन खरीदने पर लगाई गई रोक पर सवाल उठा रहे हैं. कश्मीर के जरिये हिमाचल में धारा-118 के मुद्दे को उठाने की कोशिश की जा रही है.

कांग्रेस ने किया विरोध
धारा-118 को लेकर बयानबाजी पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा कि 370 की आड़ में जानबूझ कर धारा-118 को उछालने का प्रयास किया जा रहा है. धारा-370 कश्मीर को स्पेशल स्टेट के राज्य का दर्जा दिलाता था, जो जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य राज्यों से अलग करता था, लेकिन प्रदेश की धारा-118 महज गरीब किसानों की जमीन को महफूज करती है. ऐसे में दोनों धाराओं को एक ही सियासी चश्में से देखना सही नहीं होगा.

पार्टी ने सेव हिमाचल अभियान शुरू किया

प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि हिमाचल का देश की सुरक्षा, बिजली और अन्य देशहित कार्यों के सहयोग में किसी भी बड़े राज्य से कम नहीं हैं. हिमाचल का किसान गरीबी में अपनी जमीन न बेंचे इसके लिए प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाईएस परमार ने यह प्रावधान किया था, कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत में धारा-118 से छेड़छाड़ नहीं करने देगी और इसी के लिए पार्टी ने सेव हिमाचल अभियान शुरू किया है. कांग्रेस विधायक और वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने आंशका जताते हुए लिखा कि अब हिमाचल में लोगों में धारा-118 हल्के करने को लेकर भी डर है. हालांकि, उन्होंने कहा अगर किया जाता है तो कांग्रेस उसका डटकर विरोध करेगी और यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्‍त नहीं करेगी.

ये बोली भाजपा
न्यूज18 से फोन पर बातचीत में हिमाचल भाजपा के उपाध्यक्ष गणेश दत्त का कहना है कि हालांकि, वह आवैसी और सुखबीर बादल के बयान से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन वह चाहते हैं 1972 के पहले के बोनोफाइड हिमाचलियों को यहां जमीन खरीदने का हक मिलना चाहिए. उन्हें धारा-118 से बाहर रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बहुत से हिमाचली, जो, साल 1972 से पहले यहां से अपनी कृषि भूमि बेचकर बाहरी राज्यों में बस गए थे, उन्हें यहां जमीन खरीदने की अनुमति मिलनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि एक देश में अलग-अलग तरह का कानून नहीं होना चाहिए. गणेश दत्त ने कहा कि अनुच्छेद 370 और धारा 118 दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं.
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आवैसी के बाद सुखबीर ने की मांग
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बाद अब पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम और सांसद सुखबीर सिंह बादल ने भी मांग की है कि हिमाचल में जमीन खरीदने पर लगी रोक हटनी चाहिए. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि पंजाब में हर भारतीय बिजनेस और उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीद सकता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है. सुखबीर ने कहा कि एक देश के अंदर इस तरह का प्र‌ावधान खत्म होना चाहिए.

ये बोले थे आवैशी
इससे पहले, लोकसभा (Lok Sabha) में मंगलवार जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया और कहा कि वह कब हिमाचल में एग्रीकल्चर लैंड खरीद सकते हैं? असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद भी हैं. वह जम्मू कश्मीर से जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35a हटाने संबधी बिल को लेकर हो रही चर्चा में बोल रहे थे.

क्या है अनुछेद 118
साल 1972 में हिमाचल में एक विशेष कानून बनाया गया. ऐसा इसलिए किया गया, ताकि दूसरे राज्यों के पैसे वाले और सुविधा संपन्न लोग प्रदेश में जमीनें ना सकें. दरअसल, 70 के दशक में हिमाचल की जनता आर्थिक तौर पर इतनी मजबूत नहीं थी. आशंका जताई गई कि लोग जमीनें बेच देंगे और हिमाचली भूमिहीन हो जाएंगे.

इन्हें जाता है धारा-118 का श्रेय
हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले सीएम डॉक्टर यशवंत सिंह परमार सरकार ने यह कानून बनाया था. हिमाचल प्रदेश टेनंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट 1972 में विशेष प्रावधान किया गया. एक्ट के 11वें चैप्टर 'कंट्रोल ऑन ट्रांसफर ऑफ लैंड' में धारा-118 के तहत 'गैर-कृषकों को जमीन बेचने पर रोक लगा दी गई. साथ ही ऐसे किसी भी व्यक्ति को जमीन ट्रांसफर नहीं की जा सकती है, जो कृषक नहीं है.

धूमल सरकार ने किया था संशोधन
2007 में धूमल सरकार बनी तो उन्होंने धारा-118 में संशोधन किया और प्र‌ावधान किया कि बाहरी राज्य का व्यक्ति जो हिमाचल में 15 साल से रहता हो और बोनोफाइनड हों, वह जमीन खरीद सकता है. इसका विरोध हुआ. बाद में कांग्रेस सरकार ने इस शर्त को बढ़ाकर 30 साल कर दिया था.

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First published: August 8, 2019, 10:37 AM IST
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