कोटखाई रेप-मर्डर Exclusive: ये है शिमला की 'गुड़िया' के साथ हुई दरिंदगी की फोरेंसिक रिपोर्ट
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कोटखाई रेप-मर्डर Exclusive: ये है शिमला की 'गुड़िया' के साथ हुई दरिंदगी की फोरेंसिक रिपोर्ट
शिमला का गुड़िया रेप और मर्डर केस. (सांकेतिक तस्वीर)

Shimla Gudia Rape and Murder case: चार जुलाई 2017 को शिमला के कोटखाई की नाबालिग का रेप और मर्डर कर दिया गया था. छह जुलाई को उसकी लाश मिली थी. मामले की सीबीआई ने जांच की है. सीबीआई ने एक युवक को आरोपी बनाया है, जबकि पुलिस ने 5 आरोपी पकड़े थे.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजधानी शिमला (Shimla) के कोटखाई रेप और मर्डर केस (Gudia Rape and Murder Case) में कांग्रेस सरकार में पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा के आरोपों के बाद मामला फिर सुर्खियों में है. हाईकोर्ट (Himachal High court) के वकील विनय शर्मा ने फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट मीडिया से साझा की है. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं. इस रिपोर्ट की वैधता पर अदालत ने क्या कुछ कहा, विशेषज्ञों के क्रॉस एक्जामिनेशन में अदालत ने क्या पूछा, इसकी जानकारी नहीं है. लेकिन जो बातें इसमें लिखी हैं, वह सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाती हैं. 4 जुलाई 2017 का यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है.

पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा की ओर से मीडिया से साझा की इस रिपोर्ट को सीबीआई हेडक्वार्टर में एसपी, स्पेशल क्राइम को 13 अक्टूबर 2017 को सौंपा गया था.  गुजरात के गांधीनगर स्थित डायरेक्ट्रेट ऑफ फ़ॉरेंसिक साइंस की यह रिपोर्ट डॉ. एचवी आचार्य और एचआर शाह ने तैयार की है.

पहले ब्रेन प्रिंटिंग टेस्ट के बारे में जानिए
इस रिपोर्ट में बताया गया कि हिमाचल पुलिस की SIT ने जो आरोपी पकड़े थे, उनकी Brain Electrical Oscillation Signature Profiling (BEOSP) करवाई गई थी. इसे ब्रेन प्रिंटिंग टेस्ट भी कहा जाता है. इस टेस्ट में दिमाग को पढ़ा जाता है. क्योंकि जब कोई बड़ी घटना होती है तो उस दौरान इंसान के दिमाग में घटना को लेकर कुछ बातें हमेशा याद रहती हैं. इस टेस्ट में उस घटना से संबंधित परिदृश्य बताए जाते हैं, बातें बताई जाती है. उस परिदृश्य में जो बातें सही से याद हों, उसे एक्सपिरिएंश्यल नॉलेज (EK) कहा जाता है. इसे EK से अंकित किया जाता है. जो सही से याद नहीं है या भूल गए हों, या फिर याद न आए तो उसे एनकोडिंग और प्राइमरी प्रोसेसिंग के रूप में अंकित किया जाता है. जवाब को सिग्ननेचर की श्रेणी में रखा जाता है. इसके अलावा, नार्को टेस्ट और बयानों का सचझूठ जानने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवाया गया था. इस रिपोर्ट में BESOP, नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट के बारे में विस्तार से बताया गया है. इस रिपोर्ट में जो बातें लिखी गई हैं वो हम आपको अक्षरश: बता रहे हैं.



दो राउंड में हुए इनके टेस्ट


आरोपी आशीष चौहान का 22 और 26 सितंबर 2017, आरोपी राजेंद्र उर्फ राजू का 25 और 27 सितंबर 2017, आरोपी लोकजन का 22 और सितंबर 2017, आरोपी सुभाष का 26 सितंबर 2017 को BEOSP टेस्ट करवाया गया था. पांचवें आरोपी दीपक का टेस्ट स्किन इन्फेक्शन की वजह से नहीं हो पाया. BEOSP टेस्ट दो राउंड में किए गए.

आशीष चौहान का BEOSP टेस्ट
पहले राउंड में आशीष से 213 सवाल और 17 परिदृश्य रखे गए. कुछ परिदृश्यों में सामान्य से सवाल होते हैं. इनमें आरोपी के घर परिवार, दैनिक जीवन और आदतों के बारे में बताता है. अन्य परिदृश्य आरोपों के आधार पर रखे जाते हैं जिन पर आरोपी अपनी बात रखता है. परिदृश्य 5 में आशीष शिमला से कोटखाई गांव गया था. परिदृश्य 8 में आशीष ने 6 जुलाई को RSS के सुंदर नाहरैक को कॉल किया. आशीष- मैंने सुंदर भैया से पूछा कि आप कहां हो? और फिर एक्सपर्ट का सवाल, जिसका आशीष कोई जबाव नहीं देता है. एक और सवाल पर आशीष का जवाब, सुंदर भैया ने कहा कि कब हुआ मालूम नहीं, पर मर्डर हुआ है. मैंने सुंदर भैया से कहा- यह तो बहुत बुरा हुआ.

ये सवाल भी पूछे गए
परिदृश्य 11 के तहत शाम को डिनर करते वक्त मम्मी-पापा से केस के सिलसिले में डिस्कशन हुआ. परिदृश्य-13 के अनुसार, आशीष 8 जुलाई को महासू मंदिर गया था. मंदिर के बाहर कुछ लड़कों से बातें कीं. आशीष ने सवाल के जबाव पर कहा कि हम लोग लड़की के केस के बारे में बात कर रहे थे. 9 जुलाई को पुलिस ने आशीष को पुलिस कस्टडी में लिया गया. परिदृश्य 15 के तहत जवाब में आशीष कहता है कि पुलिस वाले ने मुझे बताया कि आपको हमारे साथ बानकुफर इन्वेस्टिगेशन के लिए आना है. परिदृश्य 16 के अनुसार, आशीष को पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर किया और जबरदस्ती गुनाह कबूल करने को कहा. इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया. परिदृश्य 17 में जब पूछा गया कि गुड़िया के केस में आशीष को झूठा फंसाया गया तो उसने कोई जवाब नहीं दिया.

चार जुलाई 2017 को गुड़िया रेप और मर्डर केस हुआ था. (सांकेतिक तस्वीर)
चार जुलाई 2017 को गुड़िया रेप और मर्डर केस हुआ था. (सांकेतिक तस्वीर)


राउंड टू में 159 सवाल पूछे गए
परिदृश्य 4 के अनुसार, आशीष ने माना कि कॉलेज लाइफ में लड़कियों का शौक था. परिदृश्य 5 में आशीष ने माना कि लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध थे. मैं लड़कियों के साथ देर रात तक घूमता रहता था. मुझे सेक्स करने के लिए अलग-अलग लड़कियां चाहिए. परिदृश्य 6 के अनुसार, आशीष को पिता जी की बीमारी की वजह से शिमला आना पड़ा. साथ ही कहा कि मुझे हफ्ते में 2-3 लड़कियों से सेक्स करने की आदत है. अपनी इसी आदत के कारण मैं शिमला जाता था.

सवालों के दिए ये जवाब
परिदृश्य 8 के अनुसार, आशीष और उसके दोस्तों ने लड़की को मौका देखकर हलाईला जंगल में रोक कर रखा. जवाब में कहा कि गुड़िया उपनी उम्र की लड़कियों के मुकाबले हट्टीकट्टी लग रही थी. जब आशीष से पूछा गया कि सबसे पहले गुड़िया के साथ उसने दुष्कर्म किया तो आशीष ने जवाब में कहा कि मैंने गुड़िया को उसके कपड़े उतारने को कहा था. आशीष से जब यह सवाल पूछा गया कि उसके दोस्तों ने भी गुड़िया के साथ रेप किया तो वह बोला कि मेरे दोस्त गुटखा खा रहे थे. फिर अगला सवाल पूछा गया कि आशीष और उसके दोस्तों ने गुड़िया के साथ गलत काम किया? तो जवाब में आशीष बोला कि मैं और मेरे साथ वाला दोस्त, हम दोनों बाहर की साइड रास्ते पर नजर रखने चले गए. बाद में गुड़िया बहुत कमजोर हो गई थी. आशीष और उसके दोस्तों ने मिलकर गुड़िया को हलाईला जंगल में मार डाला, इस सवाल पर आशीष ने कोई जवाब नहीं दिया.

गुजरात के गांधीनगर स्थित डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिंक सांइस की यह रिपोर्ट डॉ. एचवी आचार्य और एचआर शाह ने तैयार की है. (सांकेतिक तस्वीर)
गुजरात के गांधीनगर स्थित डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिंक सांइस की यह रिपोर्ट डॉ. एचवी आचार्य और एचआर शाह ने तैयार की है. (सांकेतिक तस्वीर)


राजेद्र उर्फ राजू से पहला राउंड में 106 सवाल.
परिदृश्य 9: 6 तारीख को पुलिस ने राजेंद्र को पूछताछ के लिए बुलाया. एक सवाल पर राजू ने कहा कि पुलिस ने मुझसे पूछताछ की. पुलिस ने राजेंद्र को थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया. राजू ने कहा कि पुलिस झूठे कबूलनामे के लिए मारती रही. डेढ़ घंटे बाद सुभाष को रिमांड पर लिया. पुलिस ने राजेंद्र पर सूरज की हत्या का झूठा आरोप लगाया था, इस सवाल पर राजेंद्र कुछ नहीं बोल पाया. पहले राउंड के टेस्ट में राजेंद्र ने कहा कि पुलिस ने उसे बुरी तरह मारा. जुर्म कबूल करने के लिए दबाव डाला.

राउंड टू में राजेंद्र उर्फ राजू से 93 सवाल
4 जुलाई 2017 को राजेंद्र घासनी के बगीचे पर था और रास्ते से अकेली जा रही महासू स्कूल की गुड़िया से छेड़खानी की. राजेंद्र ने माना-सूरज ने गुड़िया का जबरदस्ती हाथ खींचा था.  12वें सवाल के जवाब में राजेंद्र ने कहा कि मैंने गुड़िया की सलवार खींचकर निकाल दी.

नेपाली लोकजन से राउंड 1 में 157 सवाल.
नेपाली लोकजन ने बताया कि वह नेपाल के वाई गांव का रहने वाला है. पहले राउंड में लोकजन ने कबूल किया कि 4 जुलाई 2017 को राजेंद्र सिंह अपनी महिंद्रा पिकअप गाड़ी से नेगी के बगीचे में पहुंचा था. स्प्रे की बात कही. लंच के 30 मिनट बाद हलाईला काम पर लौटने का जिक्र किया. बेल्ट और लकड़ी से पिटाई की बात कही. राउंड 2. में 89 सवाल पूछे गए.

पहले भी की थी छेड़खानी
एक्सपर्ट का सवाल था कि 4 जुलाई 2017 को लोकजन घासनी के बगीचे में था और रास्ते से अकेली जा रही महासू स्कूल की गुड़िया से छेड़खानी की? इस पर लोकजन ने कहा कि मैंने देखा वह सफेद सलवार में थी. वहीं, 35वें सवाल में बताया कि राजेंद्र ने उसके दोनों पैर पकड़े. लोकजन ने 47वें सवाल पर कहा कि मैंने जंगल में दोबारा हिमालया ऑरेंज दारू पी और.... (लोकजन यहां रुक गया). इसके बाद सवाल पर कुछ नहीं कहा.

52वें सवाल के जवाब में बोला कि गुड़िया का नग्न शरीर देखकर मैं अपना आपा खो बैठा. मैं गुड़िया के कपड़े निकाल रहा था तभी उसने मुझे लात मारी. 61वें सवाल पर बताया कि दीपक ने गुड़िया के दोनों हाथ पकड़े थे. परिदृश्य 6 में एक्सपर्ट ने पूछा कि  लोकजन ने गुड़िया के शरीर पर काटा-नोचा और पैरों से घसीटा था? इस परिदृश्य  में 74वें सवाल के जबाव में लोकजन ने कहा-नग्न अवस्था में कराहती गुड़िया को देखकर..... (चुप्पी). लेकिन, फिर 80वें सवाल के जवाब में बोला, ‘‘मैं घबरा गया था.”

आरोपी सुभाष, उत्तराखंड से राउंड वन में 124 सवाल
परिदृश्य-11 में राजू के घर जाने की बात कही. पुलिस की पिटाई के बारे में बताया कि उसे पुलिस ने बहुत मारा. राउंड टू में 91 सवाल पर किसी भी सवाल के बारे में नहीं बोल पाया. वहीं, दीपक ऊर्फ दीपू के सिर में एलर्जी हुई थी. उसे अस्पताल भेजा गया, इसलिए टेस्ट नहीं हो पाया.

टेस्ट का निष्कर्ष
टेस्ट के निष्कर्ष में षड़यंत्र, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की बात सामने नहीं आई. यानी जिसने जो भी किया अपनी मर्जी से किया. सबका एक ही इरादा नहीं था, अलग-अलग इरादे थे. टेस्ट में राजेंद्र ऊर्फ राजू द्वारा लॉकअप में सूरज की हत्या की बात भी सामने नहीं आई.

नार्को टेस्ट: पांचों आरोपियों के नार्को टेस्ट में दुष्कर्म और हत्या के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली. राजू पर लॉकअप में सूरज की हत्या के आरोपों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली. नार्को टेस्ट में खुलासा हुआ कि पुलिस के टॉर्चर और लोकल पुलिस की धमकी की वजह से दीपक ने जुर्म कबूल किया था.

पॉलीग्राफ टेस्ट: पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान विशेषज्ञों की ओर से पूछे गए सवालों पर कुछ सवाल जरूर हो सकते हैं, लेकिन इस टेस्ट का निष्कर्ष कुछ और ही कहता है. निष्कर्ष में लिखा गया है कि गुड़िया दुष्कर्म और मर्डर केस से संबंधित जो भी सवाल पूछे गए हैं, उनका सही उत्तर दिया गया. यह पूरी रिपोर्ट हाल ही में चंडीगढ़ में सीबीआई कोर्ट में रखी गई थी. इस रिपोर्ट में कॉम्परिहेंन्सिव फॉरेंसिक फिजियोलॉजीकल रिपोर्ट भी दी गई है.

रिपोर्ट में लिखी बातें अहम
इस रिपोर्ट में सीन ऑफ क्राइम में लिखी गई लाइनें काफी महत्वपूर्ण हैं. पेज 6 में लिखा है कि नग्न अवस्था में मिली लाश, लाश की पोजीशन, दांतों के निशान और घाव इस ओर इशारा कर रहे हैं कि गुड़िया हवस की तीव्र भूख और प्रताड़ना का शिकार हुई. आरोपियों ने गुड़िया को कंट्रोल करने और जान से मारने के लिए शारीरिक ताकत का इस्तेमाल किया. डेड बॉडी पर जख्मों की अधिकता और सीन ऑफ क्राइम बता रहा है कि इस अपराध में एक से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है. अगर इतनी सारी बातें रिपोर्ट में लिखी गई हैं तो अब सवाल यह कि इतना कुछ इस रिपोर्ट में सामने आया था तो सीबीआई ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट में पेश क्यों नहीं की? क्या सीबीआई को लगता है कि उन्हें अपनी ही फॉरेंसिक लैब की इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है. क्या इस रिपोर्ट में कही गई बातें आधारहीन हैं?

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