धारा-118 : भाजपा सरकार की गले की फांस बने हिमाचल के चुनाव आयुक्त पी. मित्रा

मित्रा के प्रधान सचिव राजस्व रहने के दौरान एक साल में 250 से ज्यादा लोगों को धारा-118 के तहत मंजूरी दी गई.

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 11, 2018, 12:40 PM IST
धारा-118 : भाजपा सरकार की गले की फांस बने हिमाचल के चुनाव आयुक्त पी. मित्रा
हिमाचल के राज्य चुनाव आयुक्त पी मित्रा. (फाइल फोटो)
Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 11, 2018, 12:40 PM IST
धारा-118 की उल्लंघना और गैर हिमाचलियों को जमीन दिलवाने में कथित घूस लेने के मामले में फंसे पूर्व मुख्य सचिव और मौजूदा राज्य चुनाव आयुक्त पी मित्रा अब सरकार की गले की फांस भी बन गए हैं.

पुख्ता जानकारी के मुताबिक, विजिलेंस ने पी मित्रा से पूछताछ के बाद शिकंजा कस दिया है. विजिलेंस अधिकारी पी मित्रा से सामान्य आरोपी की तरह जांच करना चाहते हैं. जांच प्रकिया में नार्को टेस्ट भी शामिल हैं. लेकिन पी मित्रा के संवैधानिक पद पर होने के चलते विजिलेंस की राह में कई रोड़े हैं.

पी मित्रा वर्तमान में राज्य चुनाव आयुक्त हैं, ऐसे में उनकी सामान्य आरोपी की तरह जांच की अनुमति की फाइल सरकार के पास है. मुख्यमंत्री कार्यालय में यह फाइल काफी समय से दबी पड़ी है.

जानकारी के मुताबिक, सरकार के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि पी मित्रा के पास कई राज हैं. मामला 2010 में सामने आया था, लेकिन यह प्रदेश में धूमल सरकार के कार्यकाल से जुड़ा है.

ऐसे में धूमल सरकार के कई राज बाहर आ गए तो भाजपा को परेशानी हो सकती है. जाहिर सी बात है कि यह मंजूरी पी मित्रा ने अकेले नहीं दी होगी. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने न्यूज18 से कहा कि इस विषय में अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है. मुख्यमंत्री एक लाइन में ही जबाव दे गए. यह भी नहीं कहा कि इस पर फैसला कब लेना है.

250 से ज्यादा लोगों को दी मंजूरी
विजिलेंस ब्यूरो ने बीते सप्ताह तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व और मौजूदा राज्य चुनाव आयुक्त पी. मित्रा से इस संबंध में कई बार बात की है. उन पर आरोप है कि मित्रा के प्रधान सचिव राजस्व रहने के दौरान एक साल में 250 से ज्यादा लोगों को धारा-118 के तहत मंजूरी दी गई.

कोर्ट में विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट रिजेक्ट
धारा-118 के तहत मंजूरी देने के एवज में घूस लेने के कथित मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने 25 मई 2018 को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन इसे कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था. कोर्ट ने फटकार लगाकर ब्यूरो को नए सिरे से जांच शुरू करने को कहा था. मामले में 2 दर्जन लोगों के बयान लिए जा चुके हैं. लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए भी कई लोगों को नोटिस दिए गए हैं.
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