लाइव टीवी

पढ़ाना छोड़ राजनीति में उतर आए शिक्षक, पुलिस और कोर्ट तक पहुंची लड़ाई

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: November 19, 2019, 5:41 PM IST
पढ़ाना छोड़ राजनीति में उतर आए शिक्षक, पुलिस और कोर्ट तक पहुंची लड़ाई
एक गुट ने दूसरे गुट के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने राजधानी शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि निष्कासित लोगों ने लाखों सदस्य के शुल्क को जमा नहीं करवाया, जोकि सरासर चोरी है.

  • Share this:
शिमला. ऐसा नजर आ रहा है कि अब हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई (Teaching) में कोई विशेष रूचि नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें राजनीति ज्यादा भा रही है. हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (Himachal Teachers Union) में चल रही आपसी लड़ाई को देख कर यही कहा जा सकता है.अध्यापक संघ दो गुटों में बंट गया है. ऐसा नजर आ रहा है कि शिक्षक संगठन नहीं, बल्कि राजनीतिक दल (Political Party) है. आपसी खींचतान और गुटबाजी की यह लड़ाई पुलिस थाने से होती हुई अदालत तक पहुंच गई है.

एक गुट ने दूसरे गुट पर लगाए आरोप
34 हजार शिक्षकों के साथ होने का दावा कर रहे एक गुट ने दूसरे गुट के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं. एक गुट ने दूसरे गुट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाए हैं कि संघ के संविधान और चुनाव आयोग की शक्तियों का दुरुपयोग कर सामान्तर संगठन खड़ा करने की कोशिश की गई. यह सब वे 7 लोग कर रहे हैं, जिन्हें बर्खास्त किया गया है.

सदस्यता शुल्क जमा नहीं करवाया: राजकीय अध्यापक संघ

राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने राजधानी शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि निष्कासित लोगों ने लाखों सदस्य के शुल्क को जमा नहीं करवाया, जोकि सरासर चोरी है.16 लाख 83 हजार 920 रुपये का गबन किया गया. इसके खिलाफ ढली थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई और 15 नवंबर को कोर्ट में केस किया गया.

कोर्ट ने दिए आदेश
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि कोर्ट ने सदस्यता के रूप में जमा लाखों रुपये, संघ के नाम और चिन्ह का प्रयोग पर रोक लगाई है. इसके अलावा अलग से चुनाव करवाने से लेकर अन्य मुद्दों पर 30 नवंबर को जबाव देने का आदेश दिया है.उन्होंने कहा कि अदालत के आदेशों की कॉपी शिक्षा विभाग और शिक्षा बोर्ड को सौंपी गई है.व्यक्तिगत मुद्दे ज्यादा हावी
बता दें कि लंबे समय से इस संगठन में खींचतान चल रही है. दरअसल, पूरी लड़ाई कुर्सी की नजर आ रही है. संगठन में पद को लेकर आपसी लड़ाई खुलकर बाहर आ गई है. अब इन सब बातों से लग यही रहा है कि संगठन का काम कम हो रहा और व्यक्तिगत मुद्दे ज्यादा हावी हैं. शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े मुद्दे फिलहाल गौण हैं. वहीं दूसरी ओर, वीरेंद्र चौहान यहां तक कहना है कि संगठन के दो फाड़ नहीं हुए हैं और एकजुट है. जैसे शरीर के किसी भाग में कैंसर हो जाने पर उस हिस्से को काटकर फेंका जाता है, उसी तरह कुछ लोगों को बाहर किया गया है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए शिमला से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 19, 2019, 5:41 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर