हिमाचल बनाएगी अपनी खेल पॉलिसी, 5 राज्यों की नीति स्टडी कर रही सरकार
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हिमाचल बनाएगी अपनी खेल पॉलिसी, 5 राज्यों की नीति स्टडी कर रही सरकार
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National Sports Day: खेल मंत्री राकेश पठानिया ने माना कि हिमाचल में खेलों के लिए बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. अच्छी अकादमी, इंडाेर स्पोर्टस सहित खेलों के मैदान भी नहीं है, इसलिए प्रदेश सरकार केंद्र से भी मदद मांगेगी.

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शिमला.राष्ट्रीय खेल दिवस दिवस (National Sports Day) हर साल 29 अगस्त को मनाया जाता है. खेलों के क्षेत्र में हिमाचल का अभी बड़ा नाम नहीं है. लेकिन हमेशा इस बात पर मंथन होता रहा है कि हिमाचल के खिलाड़ी (Players) भी ओलंपिक (Olympic) और अंतर्राष्ट्रीय खेलों तक पहुंच सकें. प्रदेश में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है तो वहीं खेल नीति भी नहीं है. अब सरकार ने खेल नीति के लिए डेडलाइन तय कर ली है. हाल ही में खेल मंत्री बने राकेश पठानिया (Rakesh Pathania) ने न्यूज-18 के साथ बातचीत में कहा कि अगले महीने मानसून सत्र (Monsoon Session) के बाद सितंबर के अंत तक प्रदेश की खेल नीति तैयार हो जाएगी और उसे लागू किया जाएगा. इसमें खेलों को बढ़ावा देने के अलावा आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की भी योजना होगी.

पांच राज्यों की खेल पोलिसी का हो रहा अध्ययन

हिमाचल के खेल मंत्री राकेश पठानिया पांच राज्यों की खेल पोलिसी का अध्ययन कर रहे हैं. इसमें पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिललाडु शामिल है. इन राज्यों की पोलिसी खेल मंत्री की टेबल पर पहुंच गई हैं. खेल पोलिसी बनाने के लिए स्पोर्टस प्रोफेशनल्स, अच्छे खिलाड़ियों, कोच और खेल संघों के भी सुझाव लिए जाने हैं. इससे पहले भी खेल नीति को लेकर चार ब्रेन स्टोर्मिंग सेशन हो चुके हैं. आने वाले दिनों में कुछ और सेशन भी आयोजित किए जाएंगे.



बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
खेल मंत्री राकेश पठानिया ने माना कि हिमाचल में खेलों के लिए बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. अच्छी अकादमी, इंडाेर स्पोर्टस सहित खेलों के मैदान भी नहीं है, इसलिए प्रदेश सरकार केंद्र से भी मदद मांगेगी. हाल ही में खेल मंत्री ने केंद्रीय खेल मंत्री से भी दिल्ली में मुलाकात की है. इसमें खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत नई प्रतिभा खोज को लेकर भी चर्चा हुई. साथ ही प्रदेश सरकार प्रपोजल तैयार करके केंद्र को भी भेजेगा, ताकि फंडिंग हो सके.

खेल संघों की राजनीति भी राह में रोड़ा

हिमाचल में खेल संघों की अपनी राजनीति भी खेलों के विकास में रोड़ा है. हिमाचल में जहां शिक्षा विभाग स्कूली खेल प्रतियोगिताएं करवाता है. तो वहीं युवा सेवाएं खेल विभाग के खेल संघ भी खेलें आयोजित करते है. खेलों में ज्यादा प्रभुत्व खेल संघों का रहता है, जिसमें अच्छे खिलाड़ी कई बार इग्नोर हो जाते हैं. हालांकि खेल मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि खेल विभाग खेल संघों को फंडिंग करता है. लेकिन विभाग और खेल संघों में फ्रेंडली माहौल बनाने की कोशिश की जाएगी. कई बार खिलाड़ियों के साथ राजनीति भी होती है. ऐसे में सरकार की कोशिश रहे कि हर खिलाड़ी को सम्मान मिले. बहरहाल, देखना यह है कि नए खेल मंत्री खेल नीति को समय पर धरातल पर उतारने और हिमाचल को भी पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर खेल राज्य बनाने में कितना सक्षम हो पाते हैं.
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