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जानिए- हिमाचल की टूरिज्म इंडस्ट्री पर कितना भारी पड़ेगा ‘कुदरत का कहर’?

मनाली के पास ब्यास नदी में बहा चंडीगढ़ मनाली हाईवे का हिस्सा. (फाइल फोटो)

मनाली के पास ब्यास नदी में बहा चंडीगढ़ मनाली हाईवे का हिस्सा. (फाइल फोटो)

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून सीजन में 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. वहीं, प्रदेश में इस दौरान 300 से अधिक मौ ...अधिक पढ़ें

    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), बारिश और पानी ने हिमाचल प्रदेश की टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है. एनजीटी ने जहां हिमाचल के कुल्लू, मनाली और रोहतांग में टूरिस्ट एक्टिविटी पर लगाम लगाई है. वहीं शिमला में पानी के क्राइसिस की वजह से भी यहां के टूरिज्म सेक्टर को तगड़ा झटका लगा है.

    हिमाचल में 2017 में आए दो करोड़ के करीब सैलानी
    हिमाचल टूरिज्म विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते साल जनवरी से लेकर दिसंबर तक 1 करोड़ 91 लाख 30 हजार 541 पर्यटकों ने हिमाचल का रुख किया था. इनमें से 4,70992 विदेशी पर्यटक थे. वहीं, कुल्लू और मनाली में बीते साल 37 लाख 32 हजार 44 सैलानी पहुंचे. इसके अलावा, शिमला में 33 लाख 18 हजार 829 सैलानियों ने दस्तक दी. विभाग के अनुसार, 2016 के मुकाबले हिमाचल में साढ़े छह फीसदी अधिक टूरिस्ट हिमाचल में आए हैं.

    ‘रिकवरी करने में लगेंगे तीन से चार साल’
    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मानसून की विदाई से ठीक पहले भारी बारिश से सबसे अधिक नुकसान हुआ है. हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में जियोग्राफी के प्रोफसर और आपदा प्रबंधन के जानकार डीडी शर्मा बताते हैं कि फिलहाल नुकसान से रिकवरी का आंकलन करना मुश्किल है, लेकिन बीते समय में शिमला के रामपुर में इसी तरह बाढ़ आई थी, तो वहां पर हालात सुधरने में कम से कम दो से तीन साल लगे थे. इसी तरह कुल्लू को भी दोबारा पटरी पर लौटने के लिए काफी वक्त लगेगा.

    कुल्लू-मनाली को लगा गहरा झटका: डीटीडीओ
    कुल्लू में जिला टूरिज्म अधिकारी भाग चंद नेगी कहते हैं कि बारिश की वजह से सड़कों सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. इस वजह से टूरिज्म सेक्टर को बड़ा झटका लगा है. उनका कहना है कि अभी नुकसान का आंकलन नहीं हुआ है, लेकिन हालात सुधरने में वक्त लगेगा. नेगी बताते हैं कि कुल्लू जिले में कुल 1000 हजार के करीब होटल होम स्टे टूरिज्म विभाग के पास पंजीकृत हैं. बता दें कि वैसे यह आंकड़ा 2000 के करीब है.

    हिमाचल के पास नहीं अपनी टूरिज्म पॉलिसी
    पर्यटन को लेकर हर साल लाखों सैलानी हिमाचल आते हैं, लेकिन हिमाचल के पास ना तो अलग से कोई पर्यटन मंत्रालय है ना ही सरकार के पास कोई टूरिज्म पॉलिसी. बीते माह खत्म हुए विधानसभा के मानसून सत्र में सीएम जयराम ठाकुर विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के सवाल के जवाब में सदन में सीएम ने कहा था कि प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं. इसे लेकर जल्द ही सरकार टूरिज्म पॉलिसी बनाएगी. उन्होंने कहा था कि रोहडू के चांशल में स्कीं सहित साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं है. चांशल में स्की सर्वेक्षण के लिए 13.65 करोड़ का प्रावधान सर्वेक्षण के लिए उपलब्ध करवाया है. बता दें कि बीते सरकार में तीन बार पॉलिसी बनाने को लेकर कोशिशें हुई थी, लेकिन नीति नहीं  बन पाई थी.

    रोजाना आ रहे 500 से छह कैंसलेशन कॉल्स
    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी ट्रैवल एंजेसी चलाने वाले नवीन पाल बताते हैं कि सूबे में आपदा से टूरिज्म इंडस्ट्री पर नकारात्मक असर पड़ा है. रोजाना 500 से छह सौ फोन बुकिंग्स को रद्द करने के लिए आ रहे हैं. उनका कहना है कि हाल ही में शिमला में पानी की कमी हो गई थी. आज भी टूरिस्ट जब भी संपर्क करते हैं तो पूछते हैं कि शिमला में पानी है या नहीं.

    इतने बड़े नुकसान के पीछे के कारण
    हिमाचल प्रदेश में 21 से 23 सितंबर तक हुई बर्फबारी की वजह से बड़े पैमाने पर जान और माल का नुकसान हुआ है. एचपीयू के प्रोफेसर डीडी शर्मा कहते हैं कि यह एक मैनमेड डिस्साटर है. क्योंकि नदी के ठीक किनारे पर बस स्टैंड बनाया गया है. साथ ही काफी ज्यादा इन्क्रोचमेंट भी की गई है. वह नुकसान के पीछे फोरलेन को भी एक वजह मानते हैं. क्योंकि फोरलेन की वजह से काफी पेड़ काटे गए हैं और इस वजह से मिट्टी की पकड़ ढीली हुई है.

    मनाली से विधायक और मंत्री बोले-कुल्लू को 200 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
    कुल्लू के मनाली से विधायक और मौजूदा सरकार में मंत्री गोविंद ठाकुर का कहना है कि अकेले कुल्लू को इस त्रासदी से दो सौ करोड़ से ज्यादा रुपये का नुकसान हुआ है. उनका कहना है कि सरकार पुनर्वास को लेकर प्रयासरत है. उनका मानना है कि इस आपदा की वजह से टूरिज्म इंडस्ट्री पर खासा असर हुआ है, क्योंकि सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है. कुल्लू को दोबारा पटरी पर लाना चुनौती है और इसके लिए वह दिन रात एक किए हुए हैं.

    एनजीटी और हाईकोर्ट का डंडा
    हिमाचल के कुल्लू की मणिकर्ण घाटी में हाईकोर्ट के आदेश पर बीते 20 सितंबर को ही तीसरे चरण में 47 होटल, होमस्टे व रेस्ट्रोरेंट को सील बंद किया गया है. इसके लिए प्रशासन ने तीन एक्शन कमेटियां बनाई थी. तीसरे चरण में 63 अवैध व्यावसायिक संस्थानों के डिमार्केशन व दस्तावेज की स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में भेजी थी. लेकिन 16 व्यावसायिक संस्थान मालिकों ने डिमार्केशन व सरकारी नियमों के मुताबिक सभी दस्तावेज पूरे कर लिए हैं. प्रशासन ने 47 अवैध व्यावसायिक संस्थानों को बंद कर दिया है.

    वहीं, एनजीटी ने कुल्लू-मनाली और रोहतांग के आसपास भी टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगाई थी. एनजीटी और हाईकोर्ट ने खीरगंगा के आसपास कैंपिंग पर रोक लगाई है, लेकिन इस वजह से प्रकृति को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. बता दें कि इससे पहले, रोहतांग जाने पर भी कोई रोकटोक नहीं थी, लेकिन लेकिन एनजीटी के आदेशों के चलते अब केवल 1200 ही वाहन रोजाना रोहतांग जाते हैं.

    एशियन विकास बैंक ने टूरिज्म प्रोजेक्ट को दी मंजूरी
    हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 1892 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान कर दी है. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हाल ही में मॉनसून सेशन में सदन में पर्यटन नीति को लेकर हुई चर्चा को जवाब दिया था कि प्रोजेक्ट को केंद्र एशियन विकास बैंक से फंडिंग के लिए भेजा था, जिसे मंजूर कर लिया है. इस महत्वाकांक्षी प्रोजैक्ट के माध्यम से प्रदेश के अनछुए क्षेत्रों में पर्यटन को विकसित किया जाएगा.

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