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मॉनसून सत्र: ट्रिब्यूनल बंद करने का बिल पारित, कांग्रेस का वॉकआउट

हिमाचल विधानसभा से वॉकआउट के दौरान कांग्रेस विधायक.
हिमाचल विधानसभा से वॉकआउट के दौरान कांग्रेस विधायक.

हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (himachal administrative tribunal) को लेकर कांग्रेस और भाजपा सरकार में खींचतान चलती रही है. धूमल सरकार के इसे भंग करने के बाद कांग्रेस सरकार ने बहाल कर दिया था. अब भाजपा सरकार ने इसे भंग कर दिया. 1 सितंबर 1986 में पहली बार इस ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई थी.

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा (Himachal Pradesh Vidhan) के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) के नौवें दिन एक बार फिर से सदन में हंगामा देखने को मिला है. कांग्रेस ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (Himachal Administrative Tribunal) बंद करने को लेकर सदन में पेश किए गए बिल का विरोध करते हुए वॉकआउट कर दिया. विपक्ष ने ट्रिब्यूनल बंद करने का विरोध जताया और सदन से वॉकऑउट (Walkout) कर दिया.

इसके बाद विपक्ष की गैरमौजूदगी में ट्रिब्यूनल को बंद करने का विधयेक सदन में पारित कर दिया गया. पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने सरकार के  इसे फैसले का विरोध किया. कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन चौहान और सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा सरकार कर्मचारी विरोधी है. पिछले कार्यकाल में भी भाजपा ने ट्रिब्यूनल बंद कर दिया था, जिसे बाद में कांग्रेस ने बहाल किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े कर्मचारियों को प्रताडि़त किया जा रहा था.

2008 में भंग फिर 2015 में बहार
गौलतब है कि हिमाचल सरकार ने बीते माह प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को भंग कर दिया था. इससे पहले, धूमल सरकार ने जुलाई 2008 में ट्रिब्यूनल को भंग किया था. लेकिन फरवरी 2015 में कांग्रेस सरकार ने इसे फिर बहाल कर दिया. अब इसे भंग कर दिया गया है. 2008 में सारे मामले हाईकोर्ट को शिफ्ट किए गए थे.
कांग्रेस और भाजपा में खींचतान


हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को लेकर कांग्रेस और भाजपा सरकार में खींचतान चलती रही है. धूमल सरकार के इसे भंग करने के बाद कांग्रेस सरकार ने बहाल कर दिया था. अब भाजपा सरकार ने इसे भंग कर दिया. 1 सितंबर 1986 में पहली बार इस ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई थी.

इतने मामले निपटाए थे
हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के पास 30 जून, 2019 तक कुल 34111 मूल आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 23125 मामलों का अन्तिम निपटारा किया जा चुका है. 18 अप्रैल, 2017 तथा 14 अप्रैल, 2018 को दो सदस्यों (प्रशासन) का कार्यकाल पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष और एक न्यायिक सदस्य कार्य कर रहा था. अब ट्रिब्यूनल के 21 हजार मामलों के हाईकोर्ट में स्थानंतरित किया जाएगा और इससे कर्मचारियों को न्याय मिलने में लंबा समय लगेगा.

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