हिमाचलः सेब कार्टन के दाम 20 रुपए बढ़ाने से बागवान नाराज, 80 से 90 करोड़ का बढ़ेगा भार

प्राकृतिक आपदा जैसे भारी ओलावृष्टि, वर्षा और बर्फबारी से पहले ही सेब और अन्य फसलों को करीब 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है.

Apple Carton Rate increased in himachal: बीते साल बाज़ार में कार्टन 45 रुपये से 55 रुपये था, लेकिन इस वर्ष सरकार ने इसकी कीमत बढ़ाकर 55 से 75 रुपये कर दी है. बागवानी मंत्री ने भरोसा दिया था कि कार्टन के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे, लेकिन 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है.

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शिमला. हिमाचल के सेब बागवान (Apple Gardener) सरकार से खासे नाराज हैं. नाराजगी की वजह है सेब की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कार्टन की कीमतें बढ़ना. हिमाचल किसान संघर्ष समिति (Himachal Kisan Sangharsh Samiti) का कहना है कि सरकार के उपक्रम एचपीएमसी और अन्य एजेंसियों ने सेब और अन्य फलों की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है. इस संकट के दौर में अप्रत्याशित वृद्धि का निर्णय किसान और बागवान (Farmers And Gardener) विरोधी है.

बीते साल बाज़ार में कार्टन 45 रुपये से 55 रुपये के दामों पर उपलब्ध हो रहा था, लेकिन इस वर्ष सरकार ने इसकी कीमत बढ़ाकर 55 रुपये से 75 रुपये तक कर दिया है. 25 से 30 प्रतिशत तक की गई इस वृद्धि से बागवानों अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. हिमाचल के सेब बागवानों पर करीब 80 से 90 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. किसान संघर्ष समिति ने इस फैसले का विरोध किया है और दाम कम करने की मांग की है. बागवानों ने चेतावनी दी है कि अगर कीमतें कम नहीं हुईं तो आंदोलन किया जाएगा.

फैसले का विपरीत असर
फल-फूल सब्जी उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि सेब बागवानों पर इस फैसले का विपरीत असर पड़ेगा और साथ ही आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा. उन्होंने सरकार से मांग की है कि फैसले को वापस लिया जाए और सरकार अपनी गत्ता फैक्ट्री शुरू करे, ताकि किसानों-बागवानों को कम कीमत में कार्टन उपलब्ध हो सके. उन्होंने मांग की है कि मंडियों में अन्य फलों की तर्ज पर क्रेट के हिसाब से फल बेचने की व्यवस्था की जाए, जिससे किसानों की बचत होगी. लेबर पर होने वाला खर्च भी कम होगा.

बागवानों की कमर तोड़ी
किसान संघर्ष समिति के नेता संजय चौहान का कहना है कि हाल में प्रदेश सरकार में बागवानी मंत्री ने बयान दिया था कि इस वर्ष कार्टन के दामों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी और सरकार बागवानों को पिछले वर्ष के दाम पर ही कार्टन उपलब्ध करवाएगी, लेकिन इस बयान के 20 दिनों बाद ही सरकार ने कार्टन के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि कर बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है. सरकार की इस प्रकार की कार्यशैली से सरकार व मंत्री दोनों की मंशा पर संशय पैदा होता है और सरकार प्रदेश के बागवानों के प्रति कितनी संजीदा है, उस पर भी सवालिया निशान लगता है. समिति ने आरोप लगाया है कि कार्टन के दामों में की गई बढ़ोतरी से स्पष्ट हो गया है कि सरकार कार्टन निर्माताओं के दबाव में आकर कार्य कर रही है.

बारिश की पड़ी है मार
संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश का किसान-बागवान अत्यंत संकट के दौर से गुजर रहा है. एक ओर प्राकृतिक आपदा जैसे भारी ओलावृष्टि, वर्षा और बर्फबारी से पहले ही सेब और अन्य फसलों को करीब 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है. सरकार ने इसका कुछ आंकलन किया, लेकिन आजतक एक भी रुपये की भी राहत किसानों व बागवानों को नहीं दी गई है. उन्होंने समिति की ओर से सरकार से मांग की है कि इस फैसले को वापस लिया जाए. कार्टन समेत अन्य लागत की वस्तुएं सब्सिडी पर सस्ते दामों पर किसानों-बागवानों को उपलब्ध करवाईं जाएं. साथ ही प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और सहायता भी प्रदान किया जाए.

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