हिमाचल में हो सैमुअल स्टोक्स के नाम पर स्मारक, पंगा क्वीन कंगना की CM जयराम से मांग

सैमुअल स्टोक्स को हिमाचल में सेब लाने का श्रेय जाता है.

Kangna Ranuat News: थानाधार में सोशल सर्विस करने वाले अमेरिकन सैमुअल सटोक्स के पिता की मौत 1911 में हो गई थी. वापसी के दौरान उन्होंने अमेरिकन सेब के पौधे खरीदकर दो बीघा जमीन पर लगवाएं.

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    शिमला. हिमाचल प्रदेश में पहली बार सेब (Apple in Himachal) लाने का श्रेय एक अमेरिकी नागरिक सैमुअल स्टोक्स (Satyanand Stokes) को जाता है. उन्होंने सबसे पहले सूबे की राजधानी शिमला के कोटगढ़ में सेब उगाए थे. अब चर्चा में रहने वाली और हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले तालुल्क रखने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना ने सैमुअल स्टोक्स के लिए सीएम जयराम ठाकुर से मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार उनके नाम पर किसी स्मारक या लैंडमार्क का नाम रखे. बता दें कि सैमुअल स्टोक्स ने बाद में अपना नाम सत्यानंद स्टोक्स कर लिया था. वह हिमाचल कांग्रेस की दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री और विधायक विद्या स्टोक्स के ससुर थे

    क्या बोली कंगना
    कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सैमुअल स्टोक्स भारतीय नहीं थे, लेकिन उन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और ब्रिटिश सरकार के देशद्रोह के आरोपों का सामना किया. वह एक अमीर अमेरिकी क्वेकर परिवार से थे, उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया, संस्कृत सीखी, हिंदू बने, एक स्कूल स्थापित किया और हिमाचल प्रदेश में सेब लाए. हिमाचली किसानों की ज्यादातर कमाई सेब के बागों से होती है, लेकिन उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. मैं हमारे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी से अनुरोध करती हूं कि हिमाचल में एक प्रमुख स्थल का नाम श्री सैमुअल स्टोक्स के नाम पर रखे. हमें यह उपकार स्वयं पर करना चाहिए. क्योंकि सैमुअल ने जीवन भर हिंदू धर्म का पालन किया और पितृपूजा (पूर्वजों के लिए आभार) का हमारी संस्कृति में सर्वोच्च महत्व है और हमें इस व्यक्ति को अपना सम्मान देना चाहिए. उसके कार्य, कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता आज तक हिमाचल में लाखों लोगों को रोजगार दे रही है.

    कौन से सैमुअल स्टोक्स
    करीब 111 साल पहले 1905 में अमेरिका से एक युवक हिमाचल आया था. युवका नाम था सैमुअल इवांस स्टोक्स. स्टोक्स ने शिमला के लोगों को बीमारी और रोजी-रोटी से जूझते हुए देखा तो यहीं रहकर उनकी सेवा करने का निर्णय लिया. अमेरिकन युवक स्थानीय युवती से शादी कर आर्य समाजी बन गए और अपना नाम सत्यानंद स्टोक्स रख लिया. कोटगढ़ में उस दौर में स्कूल भी खोला था.

    अमेरिका से लाए थे पौधे
    स्टोक्स ने साल 1916 में अमेरिका से रेड डेलीशियस प्रजाति पौधा लाकर कोटगढ़ की थानाधार पंचायत के बारूबाग में सेब का पहला बगीचा तैयार किया. कोटगढ़ से यह प्रजाति जल्द ही प्रदेश के दूसरे इलाकों में फैली और इसकी अन्य उन्नत किस्में प्रदेश में बड़े पैमाने पर लगाई गई. थानाधार में सोशल सर्विस करने वाले अमेरिकन सैमुअल सटोक्स के पिता की मौत 1911 में हो गई थी. वापसी के दौरान उन्होंने अमेरिकन सेब के पौधे खरीदकर दो बीघा जमीन पर लगवाएं. स्टोक्स को सेब की खेती के बारे में जानकारी नहीं थी. वे किताबों से पढ़कर इसकी खेती करने लगे. 1921 में इस बगीचे में सेब के पौधे फल देने लगे तो स्टोक्स ने बगीचे का एरिया बढ़ा दिया. 1930 के दशक के शुरू में गोल्डन सेब के पौधे भी लगा दिए गए. 1946 में सत्यानंद स्टोक्स की मृत्यु हो गई थी. बता दें कि हिमाचल में अब हर साल यहां औसतन पांच हजार करोड़ रुपये के सेब का कारोबार होता है.

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