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हिमाचल चुनाव: 3 वोट की कीमत रामदास से पूछो बाबू..

प्रतीकात्मक तस्वीर.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

चुटकी भर सिंदूर की कीमत तुम क्या जानू रमेश बाबू…ईश्वर का आशीर्वाद होता है एक चुटकी सिंदूर… ये डायलॉग हिमाचल विधानसभा चुनाव पर भी फिट बैठता है. क्योंकि यहां एक-एक वोट की कीमत प्रत्याशी को पता है. कम से कम उन्हें तो, जो बीते चुनावों में कम अंतर से चुनाव जीते.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 6, 2017, 7:51 PM IST
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चुटकी भर सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू… हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए भी यह डायलॉग शायद फिट बैठता है. सिर्फ़ तीन वोटों से जीतने वाले रामदास से बेहतर कौन बता सकता है कि एक वोट की क़ीमत क्या होती है.

2017 हिमाचल विधानसभा से पहले कई चुनावों में मामूली मार्जिन से भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी जीते हैं.

सबसे कम अंतर से जीते भाजपा प्रत्याशी
1977 से अब तक विधानसभा चुनावों में आठ ऐसे मौके आए, जब जीत का अंतर 100 वोट से भी कम रहा. दो बार तो दहाई के आंकड़े से भी कम वोटों से जीत तय हुई. दस से कम वोटों ने जीत का फासला तय किया.
1998 में हिमाचल के कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रामदास ने मात्र तीन वोट से जीत हासिल की. सबसे कम वोटों से जीत का रिकॉर्ड इन्हीं के नाम है. कांग्रेस और भाजपा के इतने प्रत्याशी 500 से कम अंतर से जीते.



1977 से लेकर 2012 तक, नौ विधानसभा चुनावों में 19 मौके ऐसे आए, जब 500 से कम वोटों से कई प्रत्याशी जीते. हिमाचल में नौ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दस प्रत्याशी ऐसे रहे, जिनकी जीत का अंतर 500 वोटों से कम रहा. तीन कैंडिडेट तो सौ से कम वोटों से जीते.

11 भाजपाई प्रत्याशियों की जीत का अंतर 500 मत से कम रहा. इनमें भी चार ऐसे थे, जिनकी जीत 100 मतों के भी कम अंतर से हुई है. इसमें कई क़द्दावर नेता हैं. केवल दो ही आजाद प्रत्याशी ऐसे थे, जिनकी जीत का अंतर 500 से कम था. इससे साफ है कि चुनाव में एक-एक वोट की अपनी कीमत होती है.

रोचक आंकड़े
शिलाई से कांग्रेस के प्रत्याशी गुमान सिंह ने साल 1977 विधानसभा चुनाव में अपने विरोधी को 95 वोटों से हराया. साल 1985 में कांगड़ा के ज्वालामुखी से आजाद उम्मीदवार के बतौर लड़े ईश्वरचंद की जीत का मार्जिन 09 वोट रहा.

सबसे कम वोट से जीत का सेहरा कुटलैहड़ से भाजपा प्रत्याशी रहे रामदास के नाम रहा. 1998 के चुनाव में वह महज 3 वोटों से जीते. इस दौरान भाजपा ने हिमाचल विकास कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. इसी चुनाव में कांग्रेस की क़द्दावर नेता आशा कुमारी को बनीखेत से 42 वोटों से जीत नसीब हुई. सोलन से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा मोहिनी की जीत का मार्जिन भी 26 वोट रहा.

मौजूदा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती बीते पंद्रह साल से विधायक हैं. ऊना सीट से लड़ने वाले सत्ती ने 2003 विस चुनाव 51 वोटों से जीता था.

ये 500 से कम वोटों से जीते
घुमारवीं से भाजपा प्रत्याशी रहे नारायण सिंह साल 1982 चुनाव में 486 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे.
इसी तरह कोटकहलूर से कांग्रेस के नेता राम लाल साल 1985 में 444 से विजयी हुए. कभी भाजपा के नेता रहे राजन सुशांत ज्वाली से 1985 का चुनाव लड़े और 356 से विरोधी को हराया. भाजपा की सरकार में मंत्री रहे आईडी धीमान मेवा हलके 1993 में 447 वोटों से जीते.

धर्मशाला से भाजपा नेता गद्दी समुदाय से आने वाले किशन कपूर ने 1993 में 417 वोटों से अपने विरोधी को हराया. वे भाजपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं. मंडी के बल्ह क्षेत्र से दामोदर दास को भाजपा ने 2003 विधानसभा चुनाव में उतारा. उन्हें भी जीत के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा और उनकी जीत का मार्जन 188 वोट रहा.

कुछ इसी तरह जसवां से कांग्रेस के निखिल राजौर 2007 विधानसभा चुनाव में 118 वोटों से जीतकर राजधानी पहुंचे. 2012 विधानसभा चुनाव में चिंतपूर्णी से कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप सिंह का जीत का अंतर 438 वोट रहा.
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