PG Admission: प्रवेश परीक्षा पर छात्र संगठनों और HPU में ठनी, SFI खटखटाएगी कोर्ट का दरवाजा

SFI 8 अक्टूबर को प्रदर्शन करने वाला है. 
SFI 8 अक्टूबर को प्रदर्शन करने वाला है. 

छात्र संगठन एसएफआई (SFI) का कहना है कि प्रवेश परीक्षा होने से सभी बच्चों को समान अवसर मिलेंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका खामियाजा सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को उठाना पड़ेगा. 

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शिमला. पोस्ट ग्रेजुएशन (Post Graduation) में दाखिले को लेकर छात्र संगठनों और एचपीयू प्रशासन के बीच ठन गई है. एचपीयू (HPU) के कुलपति साफ कर चुके हैं कि 2020-21 के सत्र के लिए मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा लेकिन छात्र संगठन प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिले करवाने की मांग पर अड़े हैं. इसी कड़ी में बुधवार को एसएफआई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए. साथ ही ऐलान किया कि गुरुवार को इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी. एसएफआई का कहना है कि प्रवेश परीक्षा होने से सबको समान अवसर मिलेंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के छात्र को उठाना पड़ेगा. एसएफआई ने कहा कि जो दलीलें प्रशासन दे रहा है वो तर्कसंगत नहीं है. अगर प्रवेश परीक्षा नहीं करवाई गई तो आंदोलन किया जाएगा.


ये बोले एसएफआई के नेता

एसएफआई की एचपीयू इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रवेश परीक्षा न करवाने के पीछे तर्क दे रहा है कि विश्वविद्यालयों को यूजीसी की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है जिसमें उन्हें किसी भी हालत में नवंबर महीने से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करना है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने 1 मई 2020 को नोटिफिकेशन जारी की जिसमें उन्होंने सभी पीजी और लॉ कोर्स में एंट्रेंस के आधार पर प्रवेश का फैसला लिया था जिसे देखते हुए छात्रों ने पीजी कोर्सिज के लिए 700 रुपये एमफिल और एलएलएम में एक हजार रुपये फीस देकर आवेदन  भी किया है. आवेदन करने वालों की संख्या लगभग 17000 है. अब अगर विश्वविद्यालय प्रशासन मेरिट के आधार पर दाखिले करवाता है तो आवेदन करने वाले तमाम छात्रों के पैसों की लूट साबित होगी.
'ग्रामीण क्षेत्र का छात्र पिछड़ जाएगा'




एसएफआई का कहना है कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता एक समान नहीं है. कुछ क्षेत्रों के महाविद्यालयों में अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर फर्निचर और उपयुक्त संख्या में शिक्षक भी हैं. ग्रामीण क्षेत्र के महाविद्यालयों में शहरों के बजाए कम सुविधाए हैं, जिससे साफ जाहिर है कि शहरी क्षेत्रों के मुकाबले में ग्रामीण और कम सुविधा में पढ़ने वाले छात्र मेरिट में पीछे रह जाएंगे, अब तक भी पिछड़ते आ रहे हैं.


आंदोलन का ऐलान, कोर्ट में जाएगी एसएफआई


SFI ने ऐलान किया कि  8 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में इन्ही मांगो को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा. 10 अक्टूबर को प्रदेशभर से शिक्षा मंत्री को मांग पत्र सौंपे जाएंगे. 12 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे और 13 अक्टूबर को राज्यपाल महोदय को मांगपत्र सौंपा जाएगा. साथ ही कहा कि मेरिट के आधार पर दाखिला देने के इस निर्णय के खिलाफ SFI वीरवार को  हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेगी.
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