VIDEO: कोरोना संकट में मदद मांगने गए छात्र को HPU चीफ वॉर्डन ने धक्के मारकर बाहर निकाला
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VIDEO: कोरोना संकट में मदद मांगने गए छात्र को HPU चीफ वॉर्डन ने धक्के मारकर बाहर निकाला
बिहार का रहने वाला मानवेंद्र सिंह यादव एचपीयू में एन्वार्यन्मेंटल सांइस में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा है.

डीन ऑफ स्टूडेंट वेल्फेयर प्रो. कमलजीत ने भी इन्हीं नियमों का हवाला दिया और कहा कि 5 दिन के लिए हॉस्टल में रहने की अनुमति दी गई है.

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  • Last Updated: June 21, 2020, 11:53 AM IST
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शिमला. कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौरान जरूरतमंदों की मदद करने के लिए बहुत लोग आगे आ रहे हैं, लेकिन एचपीयू में एक परेशान और हैरान करने वाला वाक्या सामने आया है. जरूरतमंद छात्र मदद के लिए प्रशासन के पास पहुंचा, लेकिन वहां से धक्के मारकर भगा दिया गया. इस छात्र का दुखड़ा एसडीएम ने सुनाया तो एसडीएम (SDM) के कहने पर फौरी मदद की गई, वो भी 19 दिन बाद.
जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का प्रोफेसर नैन सिंह चीफ वॉर्डन हैं. इन पर आरोप है कि इन्होंने छात्र को धक्का देकर अपने दफ्तर से निकाल है. इसका वीडियो भी सामने आया है.

मार्च महीने में सभी छात्रावास बंद
दरअसल, बिहार का रहने वाला मानवेंद्र सिंह यादव एचपीयू में एन्वार्यन्मेंटल सांइस में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा है. एचपीयू प्रशासन ने केंद्र के निर्देशों के तहत मार्च महीने में सभी छात्रावास बंद कर दिए थे. प्रशासन ने छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए मात्र दो दिन का समय दिया. उस वक्त मानवेंद्र अपने घर नहीं जा पाया. उसके साथ पढ़ने वाला पुष्पेंद्र बालूगंज में किराए के कमरे रहता है. हिमाचल में कर्फ्यू लागू होने के चलते पुष्पेंद्र अपने घर बिलासपुर चला गया और मानवेंद्र को अपना कमरा रहने को दिया. कमरे का किराया 10 हजार रुपये प्रतिमाह है. ऐसे में पुष्पेंद्र के घरवालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया तो उन्होंने कमरा छोड़ने के लिए कह दिया, लेकिन मानवेंद्र की हालत को देखते हुए उसे थोड़ा समय दे दिया. मानवेंद्र के
सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया.




इंटरस्टेट ट्रांसपोर्टेशन सुविधा नहीं है. कालका से ट्रैन नहीं चल रही. दिल्ली से ट्रैन है, लेकिन दिल्ली तक कैसे पहुंचा जाए ये भी समस्या है. टिकिट कन्फर्म होगा या नहीं, इसका भी पता नहीं. घर चले जाएं तो समस्या ये है कि कैमूर जिला रेड जोन में है. घर में माता-पिता के अलावा दादा दादी भी है. घर जाए तो कहीं इन्फेक्शन लेकर न पहुंच जाए और परिवार को संक्रमित न हो जाए या खुद वहां जाकर संक्रमित न हो जाए. नेट जेआरफ की तैयारी चल रही है. एक दो महीने बाद स्थिति सामान्य हुई तो दोबारा शिमला आना पड़ेगा. कोर्स के तहत शोध निबंध (Dissertation) का काम चल रहा है. सारी स्थितियों को देखते हुए शिमला में रहना ही बेहतर विकल्प नजर आया. हॉस्टल के अलावा कोई सहारा नहीं है.सड़क पर रहना संभव नहीं है. दोस्त ने भरपुर मदद की. संकट दूर करने के लिए मानवेंद्र 1 जून से जद्दोजहद में जुट गया और अपने हॉस्टल वापस जाने कीअनुमति मांगी.

वीसी ने बात सुनी और चीफ वॉर्डन को कदम उठाने के निर्देश दिए
मानवेंद्र ने आरोप लगाया कि उसे इधर से उधर भटकाया गया. कभी वाइस चांसलर के पास तो कभी चीफ वॉर्डन के पास तो कभी डीन ऑफ स्टूडेंट वेल्फेयर के पास. चीफ वॉर्डन प्रो. नैन सिंह ने बात नहीं सुनी. वीसी प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने बात सुनी और चीफ वॉर्डन को उचित कदम उठाने के निर्देश दिए. डीन ऑफ स्टूडेंट वेल्फेयर प्रो.कमलजीत सिंह ने भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई.नियमों और केंद्र की गाइडलाइन का हवाला देते रहे. दो हफ्ते से ज्यादा समय तक ये खेल चलता रहा.

आरोप-चीफ वॉर्डन ने पूरी बात तक सुनना गवारा नहीं समझा
आरोप है कि चीफ वॉर्डन ने तो पूरी बात तक सुनना गवारा नहीं समझा, मदद तो दूर की बात है, इसलिए मानवेंद्र ने फैसला किया वीडियो बनाया जाए, ताकि जो भी बात हो उसका रिकॉर्ड रखा जा सके. लेकिन वीडियो थोड़ा सा बन पाया, धक्का खाना पड़ा. छात्र ने आरोप लगाया कि प्रो. नैन सिंह ने उसे बिहारी कहकर अभद्र व्यवहार किया. कई बाते सुनाई, जो सहन करने योग्य नहीं है.

 

एसडीएम नीरज चांदला के पास पहुंचा
मानवेंद्र ने बताया कि निराशा और मानसिक प्रताड़ना के इस दौर में जान देने तक के ख्याल आने लगे. लेकिन इस बीच उनके शिक्षक डॉ. रविंद्र रांटा और अन्य शिक्षक उसकी मदद करते रहे. किसी ने सुझाव ने दिया कि शहर कि एसडीएम नीरज चांदला से मदद लेनी चाहिए. छात्र एसडीएम नीरज चांदला के पास पहुंचा और पूरा दुखड़ा सुनाया. एसडीएम ने पहले बालूगंज थाने की पुलिस से वैरिफिकेशन करवाई. इस बात का पता लगाया कि वो सच बोल रहा है या नहीं. वो यहीं पर रह रहा था या कहीं बाहर से आया है. एसडीएम ने कहा कि सारी चीजें पता करने बाद उन्होंने विवि प्रशासन से बात की. छात्र की अर्जी पर दस्तखत किए और प्रशासन को मौखिक तौर भी निर्देश दिए कि मानवीय आधार पर उसे रहने दिया जाए.

छात्र की मदद की जाएगी: एसडीएम
एसडीएम ने कहा कि आगे भी कोई मदद की जरूरत होगी तो छात्र की मदद की जाएगी. एसडीएम के निर्देशों के बाद प्रशासन के हाथ पांव फूले और उसके रहने की व्यवस्था करने लगे. पहले फैक्लटी गेस्ट हॉउस में रखने की सोची गई, लेकिन वहां बात नहीं बनी, फिर एचपीयू की डिस्पेंसरी का ख्याल आया, वहां छात्र ने रहने से इनकार कर दिया. अंतत: उसे हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया. एसबीएस हॉस्टल कमरा नंबर 221, जोकि उसे दाखिले के बाद अलॉट हुआ था. इस पर भी फरमान सुनाया है कि 5 दिन में अपने रहने या जाने की व्यवस्था करे नहीं तो हॉस्टल खाली करना होगा. इस पूरी प्रकिया में 19 दिन बीत गए.

प्रो.नैन सिंह ने सारे आरोप नकार दिए
प्रो. नैन सिंह लॉ विभाग के शिक्षक अभिषेक नेगी को चार्ज सौंप कर अपने गांव निकल गए. फोन पर बात हुई प्रो.नैन सिंह ने सारे आरोप नकार दिए. उसे झूठ करार दिया. बोले कि नियम कायदों के तहत की विवि में फैसले लिए जाते हैं. कोविड की एक कमेटी भी है उसमें भी चर्चा हुई. एमएचआरडी के भी निर्देशों के तहत भी हॉस्टल नहीं खोला जा सकता. उन्होंने कहा कि हम तो उल्टा मानवेंद्र की मदद कर रहे हैं. लेकिन वीडियो बता रहा है कि कैसी मदद की गई.

नियमों का हवाला दिया 

डीन ऑफ स्टूडेंट वेल्फेयर प्रो. कमलजीत ने भी इन्हीं नियमों का हवाला दिया और कहा कि 5 दिन के लिए हॉस्टल में रहने की अनुमति दी गई है. अब 5 दिन बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा.. लेकिन जो 5 विदेशी छात्र अभी भी हॉस्टल में रह रहे हैं. और सुरक्षाकर्मी भी उसी हॉस्टल में रह रहे हैं, उस पर कुछ नहीं बोल पाए. केवल इतना कहा कि इंटरनेशनल स्टूडेंट के लिए अलग से निर्देश पहले से ही केंद्र ने जारी किए थे. कार्यवाहक चीफ वॉर्डन अभिषेक नेगी ने कहा कि छात्र की पूरी मदद की जा रही है. उसके घर जाने की व्यवस्था भी की जाएगी. घर जाने की व्यवस्था हुई तो उसका पूरा खर्च प्रशासन उठाएगा. वहीं दूसरी ओर इस मामले पर वीसी से बात नहीं हो पाई.
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