HRTC कंडक्टर भर्ती घोटाला: 300 पदों पर 378 की भर्ती और 18000 पन्नों की चार्जशीट

14 मार्च 2017 को शिमला के सदर थाने में IPC की धारा 420, 120-बी और सेक्शन 13(a) के तहत तत्कालीन एमडी दलजीत सिंह डोगरा, डीएम धर्मशाला एकके गुप्ता, डीएम हमीरपुर एसपी छेतारजी, डीएम शिमला मथुरा दास शर्मा और डीएम रिंगचिंन नेगी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. उसके बाद एसआईटी का गठन किया गया.

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 12, 2019, 2:00 PM IST
HRTC कंडक्टर भर्ती घोटाला: 300 पदों पर 378 की भर्ती और 18000 पन्नों की चार्जशीट
एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती घोटाला 2003-04 में हुआ था.
Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: July 12, 2019, 2:00 PM IST
साल 2003-04 के बहुचर्चित हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) कंडक्टर भर्ती घोटालए में बड़ा खुलासा हुआ है. इस मामले में पुलिस ने 18 हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार की है.

तत्कालीन वीरभद्र सरकार के दौरान हुई इस भर्ती के मामले पर पुलिस ने आरोप पत्र तैयार कर लिया है. जल्द ही करीब 18 हजार पन्नों की चार्जशीट को अदालत में दाखिल कर दिया जाएगा. इस मामले पर एक पूर्व आईएएस समेत 5 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. पुलिस दावा कर रही है कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटा लिए गए हैं. यह साक्ष्य उन्हें दोषी साबित करने के लिए काफी हैं.



Hrtc Conductor recruitment Scam.
छह गठरियों में शिमला में रखी गई चार्जशीट.


300 पद भरे जाने थे

2 अगस्त 2003 को HRTC के निदेशक मंडल की एक बैठक होटल होलीडे होम में हुई, जिसमें कंडक्टरों 300 पद भरने को मंजूरी दी गई. इसके तहत सामान्य वर्ग के 166, ओबीसी के 54, SC के 66 और ST के 14 पद भरे जाने थे. 23 सिंतबर को ये विज्ञापित किए गए.18 जनवरी 2004 को 17 हजार 890 अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा दी, जिसमें से 14 हजार 107 अभ्यर्थियों ने 50 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए. 1 जून 2004 को डिवीजन लेवल पर साक्षात्कार हुए.

इसलिए हुआ विवाद
यह भर्ती विवादों में तब आई जब परिणाम सामने आया. आरोप यह लगा कि केवल 300 पद विज्ञापित किए गए थे, लेकिन 378 पद भरे गए. 78 पद बिना विज्ञापन के ही भरे गए. बिलासपुर के रहने वाले एक व्यक्ति ने इस पर सवाल उठाए थे और शिकायत दर्ज करवाई थी. इस मामले की जांच सबसे पहले डीएसपी वीरेंद्र कालिया ने की थी और 19 जुलाई 2012 को एक जांच रिपोर्ट विजिलेंस ने तत्कालीन मुख्य सचिव को सौंपी थी. रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्रकिया में मैरिट जानबूझकर डिवीजन वाइज बनाई गई.
Loading...

Hrtc कंडक्टर भर्ती स्कैम की जांच करने वाले एसआईटी प्रमुख दिनेश शर्मा.
Hrtc कंडक्टर भर्ती स्कैम की जांच करने वाले एसआईटी प्रमुख दिनेश शर्मा.


बाली के इलाके से सबसे ज्यादा लगे
प्रदेश में एक ही मैरिट लिस्ट बननी चाहिए थी. सबसे ज्यादा 147 कंडक्टर धर्मशाला डिवीजन से चयनित किए गए. इनमें से तत्कालीन परिवहन मंत्री जीएस बाली के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 चुने गए थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र रोहड़ू से 35 लोगों का चयन किया गया था.

इन पर हुआ केस
इस मामले पर 14 मार्च 2017 को शिमला के सदर थाने में IPC की धारा 420, 120-बी और सेक्शन 13(a) के तहत तत्कालीन एमडी दलजीत सिंह डोगरा, डीएम धर्मशाला एचके गुप्ता, डीएम हमीरपुर एसपी छेतारजी, डीएम शिमला मथुरा दास शर्मा और डीएम रिंगचिंन नेगी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. उसके बाद एसआईटी का गठन किया गया.

23 अभ्यर्थी बिना इंटरव्यू के रखे
सूत्रों की मानें तो मैरिट संबंधित दस्तावेजों में कटिंग पाई गई है. कहीं ओवर राइटिंग हैं, जहां अभ्यर्थी को नंबर दिए गए हैं, उनमें भी कई जगह कटिंग पाई गई है. 23 ऐसे अभ्यर्थी पाए गए हैं, जिनको बिना इंटरव्यू दिए नौकरी मिल गई. इस मामले पर पुलिस ज्यादा कुछ कहने को तैयार नहीं, लेकिन यह दावा जरूर किया जा रहा है कि सभी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत हैं. सभी आरोपी दोषी करार दिए जाएंगे.

एक आरोपी को सशर्त जमानत
10 जुलाई 2019 को हिमाचल हाईकोर्ट ने भर्ती घोटाले के आरोपी एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक एचके गुप्ता को सशर्त अग्रिम जमानत दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है. सीजीएम एचके गुप्ता साल 2003-04 में हुई कंडक्टर भर्ती मामले में आरोपी हैं. वे इन भर्तियों के दौरान धर्मशाला में डीएम के पद पर तैनात रहे. कंडक्टर भर्तियों के लिए भर्ती बोर्ड डिविजन स्तर पर बनाए गए थे.
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...