Video : जब HRTC की पहली महिला बस चालक ने पहली बार लांघी हिमाचल की ‘सीमा’, पिता को याद कर हुईं भावुक

निगम में महिला बस चालक सीमा ठाकुर बुधवार को पहली बार शिमला से चंडीगढ़ बस चलाई.

निगम में महिला बस चालक सीमा ठाकुर बुधवार को पहली बार शिमला से चंडीगढ़ बस चलाई.

HRTC First Women Driver: सीमा ने शिमला के कोटशेरा कॉलेज ने बीए की पढ़ाई की है. इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मास्टर्स करने के बाद बस चालक बनने का फैसला किया. सीमा के पिता बलि राम भी एचआरटीसी में बस चालक थे.

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शिमला. जो लोग यह सोचते हैं कि महिलाएं पुरुषों से कमतर या कमजोर होती हैं, उन लोगों की सोच को गलत साबित करते हुए बेटियों के लिए हौसले और हिम्मत की मिसाल बन गई हैं हिमाचल की बेटी सीमा. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में एचआरटीसी (HRTC) की पहली महिला बस चालक सीमा ठाकुर ने इतिहास रचा है. सीमा प्रदेश की पहली ऐसी महिला बस चालक बन गई हैं, जिसने एक राज्य से दूसरे राज्य के लिए बस चलाई है. बुधवार सुबह सीमा ने शिमला-चंडीगढ़ (Shimla-Chandigarh) रूट पर बस चलाकर महिला सशक्‍तीकरण की नई मिसाल पेश की है.31 वर्षीय सीमा सोलन जिले के अर्की की रहने वाली हैं और उन्होंने अपने शौक को जुनून में बदल दिया.

निगम में महिला बस चालक सीमा ठाकुर ने बुधवार को पहली बार शिमला से चंडीगढ़ बस चलाई. यह बस शिमला से 7 बजकर 55 मिनट पर रवाना हुई. चंडीगढ़ से 12:30 बजे सीमा शिमला के लिए रवाना हुई और शाम को करीब साढ़े 5 बजे शिमला पहुंची. बता दें कि अभी तक सीमा ठाकुर शिमला-सोलन से इलेक्ट्रिकल बस चलाती रही हैं. वहीं, शिमला में भी वह एचआरटीसी की टैक्सी सर्विस में सेवा दे चुकी हैं. बस में सफर कर रही महिला और पुरूष सवारी सीमा की तारिफ करते हुए नजर आए. एक महिला ने यहां तक कहा कि वो चाहती हैं जो बस सीमा चलाती हैं, उसी में ज्यादा सफर करने को मिले. सभी ने इसे गर्व का क्षण बताया है.

न्यूज-18 से की बात करते हुए भावुक हो गईं सीमा

शिमला पहुंचने पर न्यूज-18 से बातचीत के दौरान सीमा काफी भावुक हुई. उन्होंने कहा कि “आज जो कुछ भी हैं वो अपने माता-पिता की वजह से हैं.” उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, वो भी बस चालक थे. सीमा अपने पिता को याद कर काफी भावुक हुईं. उन्होंने कहा कि “मेरे पिता हर वक्त मेरे साथ हैं, मेरे मां-बाप मेरी दुनिया हैं.” साथ ही कहा कि “जो लोग ये सोचते हैं कि महिलाएं पुरूष के कमतर हैं तो ये गलत सोच हैं.” सीमा ने कहा कि इससे पहले भी वो कई बार इंटर स्टेट बस चला चुकी हैं. चंडीगढ़ जैसी जगह पर गाड़ी चलाना चुनौती जरूर है, लेकिन अनुभव और सही तरीके से नियमों की पालना करते हुए बस चलाने से मुश्किल नहीं होती. उन्होंने कहा कि “अब वोल्वो बस चलाना उनका सपना है.”


‘कुछ ड्राइवरों और अधिकारियों की वजह से माहौल ठीक नहीं’

एचआरटीसी में कुछ ड्राइवरों और अधिकारियों की वजह से माहौल ठीक नहीं है. इस पर सीमा ने ज्यादा कुछ तो नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर कहा कि ये एक मिसाल है, उन कर्मियों के लिए जो कामचोर हैं और जुआ खेलते हैं. साथ ही कहा कि वो किसी चुनौती के लिए तैयार हैं, कहीं भी किसी भी समय ड्यूटी के लिए तैयार हैं. सीमा ने कहा कि काम करने वालों के साथ न्याय होना चाहिए. सीमा ने कहा कि सुबह काउंटर से जिस तरह से गाड़ी सुरक्षित निकली है, उसी तरह सुरक्षित शाम को पहुंची भी है.



सीमा ने 5 मई 2016 में एचआरटीसी Join की थी

सीमा ने शिमला के कोटशेरा कॉलेज ने बीए की पढ़ाई की है. इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से एमए की. अंग्रेजी में एमए भी करने के बाद उन्होंने बस चालक बनने का फैसला किया. सीमा के पिता बलि राम भी एचआरटीसी में चालक थे. हालांकि, उनका निधन हो चुका है. सीमा ने 5 मई 2016 में एचआरटीसी ज्वाइन की थी. कोरोना काल के दौरान भी उन्होंने राज्य में सेवा की. सूबे के मुख्यमंत्री ने भी उन्हें सम्मानित किया है. बता दें कि हिमाचल में हेवी व्हीकल चलाने वाली नाममात्र महिलाएं हैं. ऐसे में सीमा का भारी वाहन चलाना लोगों के लिए मिसाल है.
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