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हिमाचल की सियासत : युवा कंधों पर ‘बुढ़ापे’ का बोझ

सीएम वीरभद्र सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल,
सीएम वीरभद्र सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल,

12वीं विधानसभा में भी बुढ़े नेताओं का ही दबदबा रहा है. 68 विधायकों में से 48 ऐसे थे, जिनकी उम्र पचास के पार थी. 51 से 55 साल तक के 13 विधायक विधानसभा पहुंचे थे. 30 से 35 साल के बीच तो केवल दो ही विधायक बीती विधानसभा में थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2017, 5:54 PM IST
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एक ओर जहां हिमाचल विधानसभा चुनाव में युवाओं की भागदारी बड़ी है. वहीं, सियासत में अब भी बूढ़ों का दबदबा है. प्रदेश की राजनीति में जवानी पर बुढ़ापा भारी है. सूबे के युवा कंधों पर बुढ़ापे का बोझ है.

दरअसल, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस लेकर भाजपा के जितने भी कद्दावर नेता हैं, सभी कि उम्र 60 साल के पार है. चाहे कांग्रेस के वीरभद्र सिंह हों या भाजपा धूमल, दोनों सत्तर साल से ऊपर हैं. इसके अलावा, दूसरे नेता भी 60 से अस्सी साल के बीच में हैं.

प्रदेश में 46 फीसदी वोटर युवा
हिमाचल में कुल 49 लाख 5 हजार 667 मतदाता हैं. इनमें से 22 लाख 48 हजार वोटर 39 साल से कम हैं. आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, 18-19 आयु वर्ग में 40 हजार 567 मतदाता पहली बार वोट डालेंगे. इसके अलावा, 20 से 29 आयु वर्ग के 9 लाख 97 हजार 218 और 30 से 39 आयु वर्ग के 11 लाख 40 हजार 901 वोटर आयोग के पास दर्ज हुए हैं. बता दें कि आयोग ने विधानसभा चुनाव में वोटर जागरूकता कैंपेन के लिए 22 साल की युवती मुस्कान को ही ‘यूथ आईकॉन’ बनाया.
सीएम सबसे उम्रदराज प्रत्याशी और उनके बेटे सबसे युवा


सीएम वीरभद्र सिंह फिलहाल सियासी मैदान में सबसे उम्र दराज प्रत्याशी हैं. वह 83 साल के हो चुके हैं. छह बार प्रदेश के सीएम बने हैं और सातवीं बार दावेदारी ठोक रहे हैं. सीएम अपने राजनीतिक करियर में पांच लोकसभा और आठ विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं.

फिलहाल अर्की से चुनाव लड़ रहे हैं. सीएम के बेटे विक्रमादित्य सिंह (27) सबसे युवा उम्मीदवार और नेता हैं. पहली बार शिमला ग्रामीण से चुनावी मैदान में हैं. उनके अलावा, उनके मौजूदा मंत्री और नेता भी साठ और अस्सी साल के बीच हैं. स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर मंडी के पधर से चुनाव लड़ रहे हैं. वह नौवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं. वे केवल एक ही बार 1990 में चुनाव हारे हैं.

कांग्रेस की जमात में ज्यादा बुढ़े
कांग्रेस पार्टी में ज्यादातार नेता उम्रदराज हैं. विद्या स्टोक्स (90), विधासनभा स्पीकर बृज बिहारी बुटेल (76), मंत्री धनी राम शांडिल (76), ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया(74), वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी (70) के अलावा, जीएस बाली भी साठ बसंत देख चुके हैं. मंत्रीमंडल में शामिल मुकेश अग्निहोत्री की उम्र 55 साल है.

भाजपा में भी बूढ़ों का ही दबदबा
भाजपा में बूढ़े नेताओं का दबदबा है. पूर्व मंख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल 73 साल के हो चुके हैं. उन्होंने 1994 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा. इस दौरान हालांकि वह हार गए, लेकिन बाद में 1996 लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत मिली.

1998 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और सूबे के सीएम बने. तब से वे अब तक जीतते आ रहे हैं. भाजपा के ही महेश्वर सिंह (66) मंडी से दो बार सांसद रहे. इसी तरह दिग्गज नेता और पूर्व केंद्री मंत्री सुख राम के बेटे और हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए अनिल शर्मा भी साठ की उम्र पार चुके हैं. उनके अलावा, सरकाघाट से विधायक कर्नल इंद्र सिंह (73) और पांच बार के विधायक गुलाब सिंह ठाकुर भी सत्तर साल के हो चुके हैं.

भाजपा-कांग्रेस में इस बार 40 साल के कम ये प्रत्याशी
चुनावी मैदान में इस बार दोनों पार्टियों ने कुछ युवाओं को तरजीह दी है. इंदौरा सीट से रीता धीमान को भाजपा ने मैदान में उतारा है. वह चालीस साल से कम उम्र की हैं. रीता धीमान के अलावा कुल्लू के बंजार से सुरेंद्र शौरी (37), चुराह से 34 साल के हंसराज, नाचन से 36 साल विनोद कुमार और सुंदरनगर से राकेश जमवाल(40) भाजपा प्रत्याशी हैं.

विक्रमादित्य सिंह सबसे कम 27 साल की उम्र में चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने कसौली से विनोद सुल्तानपुरी (35) और पूर्व आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री कर्ण सिंह के बेटे आदित्य विक्रम सिंह(32) को बंजार से टिकट दिया है.

जयसिंहपुर से कांग्रेस ने मौजूदा विधायक यादवेंद्र गोमा (31), रेणुका में मौजूदा विधायक विनय कुमार (39) और कसुम्पटी से मौजूदा विधायक अनिरुद्ध सिंह (40) भी मैदान में हैं. इससे पहले, 12वीं विधानसभा में यादवेंद्र गोमा सबसे कम उम्र के विधायक हैं.

बीते विधानसभा में 50 साल से ऊपर चुनकर आए थे 48 विधायक
12वीं विधानसभा में भी बुढ़े नेताओं का ही दबदबा रहा है. 68 विधायकों में से 48 ऐसे थे, जिनकी उम्र पचास के पार थी. 51 से 55 साल तक के 13 विधायक विधानसभा पहुंचे थे. 30 से 35 साल के बीच तो केवल दो ही विधायक बीती विधानसभा में थे.
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