शिमला में खाना पीना हुआ महंगा! जयराम सरकार ने ढाबा-होटल संचालकों की दी लूट की खुली छूट

हिमाचल की राजधानी शिमला में खाने पीने के दामों में दोगुना इजाफा हुआ है.

Inflation in Himachal: एसेंशियल कॉमोडिटी एक्ट के दो नियमों के तहत दाम तय होते हैं और समय-समय पर चैकिंग होती है. लेकिन सरकार ने नए साल में इन दो नियमों का रिन्यूअल नहीं किया है, जिस वजह से खूली लूट मचाई जा रही है.

  • Share this:
शिमला. हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों की रानी शिमला (Shimla) में चाय से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बेलगाम हो गए है. ढाबा संचालक से लेकर चाइनीज फास्ट फूड संचालक ने अपनी मनमर्जी खाने पीने की वस्तुओं के दाम डेढ़ से दो गुना बढ़ा दिए हैं जिससे शहरवासियों में खासी नाराजगी दिखाई दे रही है. शहर के मुख्य क्षेत्रों में जो चाय (Tea) दस रुपए के हिसाब से बिकती थी, वही, चाय अब इन ढाबों में 15 रुपए की बिक रही है. इसके अलावा, समोसा 10 रुपए से बढ़कर 20 रुपए, परांठा 20 से बढ़कर 50 रुपए, खाना 60 रुपए से बढ़कर 90 से 120 रुपये कर दिया है.

इसके अलावा, फास्ट फूड (Fast Food) खाने वालों पर भी ढाबा संचालको ने अपनी मनमर्जी के रेट बढ़ाकर चाउमीन के दाम 40 से 80 रुपए कर दिया हैं. मोमोज और चाइनीज परांठा भी 80 से 100 रुपए कर दिया है, जिससे घर से बाहर खाने वालों की कमर तोड़ दी है.

मनमर्जी से बढ़ा रहे दाम

शहरवासियों का कहना है कि भले ही सरकार ने पैट्रोल,डीजल और घरेलू सिलेंडर के दामों में बढ़ौतरी कर दी है, लेकिन दूध और चायपत्ती के दाम वही हैं. फिर भी ढाबा मालिकों ने रेट में इजाफा कर दिया है, जिससे आम जनता का खाना पीना मुश्किल हो गया है. एक ओर कोरोना वायरस के चलते आर्थिक मंदी और नौकरी चली गई है और लोगों को अपना जीवन यापन करने के लिए मेहमत और मजदूरी करनी पड़ रही है. दूसरी ओर, ढाबा मालिक अपनी मनमर्जी से खाने पीने की चीज़ों के दाम बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मामले को लेकर पूरी तरह से बेखबर है और न तो स्वयं संज्ञान लेता है और न ही बाजार में रेट लिस्ट चेक करता है. प्रशासन की मंजूरी के बिना इस तरह के रेट बढ़ाना जायज नहीं है और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई कर रेट निर्धारित करने चाहिए.

बता दें कि देश मे पेट्रोल,डीजल और गैस के दाम बढने के तुरन्त बाद शिमला में कुछ एक ढाबा मालिकों ने 10 की चाय 15 रुपये बेचना शुरू कर दी है.हालांकि प्रशासन द्वारा तय चाय का रेट 9 रुपये है, लेकिन फिर भी ढाबा मालिक अपनी मर्जी से 10 रुपये की चाय बेच रहे थे, लेकिन अब तो हद है. ढाबा मालिकों ने अपनी मर्जी से ही लोगों को लूटना शुरू कर दिया है.

बता दें कि जिला में खाद्यय सामाग्री के दाम जिला प्रशासन के द्वारा तय किए जाते है. हर एक वस्तुओं के दाम प्रशासन तय करता है.उसी दाम के तहत ही दुकानदार अपने खाद्यय सामाग्री को बेच सकते है. मगर दुकानदारों ने जिला प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मनमर्जी से खाद्यय सामाग्री के दामों में बढ़ोतरी कर दी है. जिला प्रशासन की ओर से अभी तक खाद्याय सामाग्री के कोई दाम नहीं बढ़ाए गए है. प्रशासन ने दाम बढाने को लेकर अभी तक कोई नई नोटिफिकेशन जारी नहीं की है.

सरकार की अधिसूचना के बाद होगी कार्रवाई

डीसी शिमला आदित्य नेगी का कहना है कि जिला प्रशासन पहले दाम तय करता था. यह दाम एसेंशियल कॉमोडिटी एक्ट के दो नियमों के तहत खाद्य वास्तु के दाम तय और चैकिंग करता था. इन ऑर्डर को सरकार समय दर समय जारी करती थी, लेकिन दिसंबर 2020 के बाद यह आर्डर जारी नहीं हुए हैं. ऐसे में न तो जिला प्रशासन रेट तय कर पा रहा है और न ही चैकिंग. शिमला में कुछ दुकानदारों ने अपने स्तर पर रेट बढा दिए है. रेट बढाने को लेकर प्रशासन ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की है.जब तक सरकार की ओर से आर्डर नहीं आते है तब तक दामों की चैकिंग करना मुश्किल है.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.