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हिमाचल उपचुनाव: BJP से बागी दयाल प्यारी ने बदले समीकरण, पच्छाद में तिकोना मुकाबला!

हिमाचल में पच्छाद सीट से तिकोना मुकाबला होने की उम्मीद है.
हिमाचल में पच्छाद सीट से तिकोना मुकाबला होने की उम्मीद है.

By Election in Himachal: भाजपा की रीना कश्पय और बागी दयाल प्यारी (Dayal Pyari) के सामने कांग्रेस के गंगू राम मुसाफिर हैं. गंगूराम मुसाफिर सात बार के विधायक रहे चुके हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला (Dharamshala) और सिरमौर की पच्छाद (Pacchad) सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं. धर्मशाला में जहां सात प्रत्याशी चुनावी समर में हैं. वहीं, पच्छाद में 5 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. धर्मशाला में मुख्य मुकाबला कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP) में है, वहीं, पच्छाद में भाजपा की बागी दयाल प्यारी की वजह से मुकाबला रोचक होने के आसार हैं.

नामांकन (Nomination) वापस लेने के अंतिम दिन 3 अक्तूबर को शिमला (Shimla) से लेकर सिरमौर तक खूब सियासी ड्रामा हुआ. बुधवार को सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) से मुलाकात के बाद भाजपा के बागी आशीष सिक्टा और दयाल प्यारी ने नामांकन वापस लेने की हामी भर दी थी. आशीष सिक्टा (Aashish Sikta) ने तो गुरुवार को नामांकन वापस ले लिया, लेकिन दयाल प्यारी ने नामांकन वापस लेने से इंकार कर दिया. इस दौरान सोलन में उन्हें जबरन गाड़ी में ले जाने का एक वीडियो भी सामने आया. दयाल प्यारी पर नामांकन वापस लेने का दवाब था. लेकिन उन्होंने नामांकन वापस नहीं लिया. ऐसे में अब पच्छाद सीट से उन्होंने चुनावी ताल ठोकते हुए प्रचार शुरू कर दिया है. इस कारण अब वहां मुकाबला तिकोना हो गया.

इसलिए दयाल प्यारी हैं भारी
दयाल प्यारी पच्छाद से तीन बार जिला परिषद के चुनाव जीती हैं. एक बार जिला परिषद की चेयरपर्सन भी बनी हैं. वह तीनों बार अलग-अलग वार्ड से विजयी हुईं. पहली बार उन्होंने बाग-पशोग से चुनाव लड़ा और जीता. इसके बाद दूसरी बार वह नारग से विजय हुईं. मौजूदा समय में बाग-पशोग से जिला परिषद की सदस्य हैं.  उनकी इलाके में पक़ड़ का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी, तब वह जिला परिषद की चेयरपर्सन थी. करीब ढाई दर्जन पंचायतों में उनका प्रभाव है. पच्छाद सीट आरक्षित है.
 हिमाचल में दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं.
हिमाचल में दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं.




भाजपा का दावा भी मजबूत
भाजपा ने पच्छाद से 34 साल की रीना कश्यप को टिकट दिया है. पिछले दो चुनावों से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है. 2012 और 2017 विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा के सुरेश कश्यप जीते थी. 2017 में सुरेश कश्यप को यहां 30243 वोट मिले थे, जबकि गंगूराम मुसाफिर को 23816 वोट पड़े थे. वहीं, शिमला लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पच्छाद से लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को करीब 16 हजार वोटों की लीड मिली थी. वहीं, एक बागी आशीष सिक्टा के यहां से अपना नामांकन वापस लेने से भी भाजपा के लिए राहत की खबर है.

पच्छाद सीट आरक्षित है.
पच्छाद सीट आरक्षित है.


कांग्रेस इसलिए दे सकती है टक्कर
भाजपा की रीना कश्पय और बागी दयाल प्यारी (Dayal Pyari) के सामने कांग्रेस के गंगू राम मुसाफिर हैं. गंगूराम मुसाफिर सात बार के विधायक रहे चुके हैं. कांग्रेस ने पच्छाद सीट से साल 2017 विधानसभा चुनाव में भी गंगूराम मुसाफिर को उतारा था. वह भाजपा के सुरेश कश्यप से हार गए थे. इससे पहले 2012 में भी मुसाफिर को भाजपा के सुरेश कुमार कश्यप से 2805 वोटों से हार मिली थी. गंगूराम मुसाफिर कांग्रेस एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं. साल 2012 में हारने से पहले, वह 1982 से इस सीट पर जीतते आ रहे थे. 1982 में मुसाफिर ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीता, लेकिन 1985 से वह कांग्रेस (Congress) के टिकट पर चुनाव लड़े थे. वह मंत्री के अलावा, हिमाचल विधानसभा (Himachal Vidhansabha) के स्पीकर भी रह चुके हैं.

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