होम /न्यूज /हिमाचल प्रदेश /

किसानों और बागवानों का जेल भरो आंदोलन, धारा 144 तोड़कर किया प्रदर्शन, मॉल रोड पर दीं गिरफ्तारियां

किसानों और बागवानों का जेल भरो आंदोलन, धारा 144 तोड़कर किया प्रदर्शन, मॉल रोड पर दीं गिरफ्तारियां

रिज मैदान और मॉल रोड प्रतिबंधित हैं, यहां पर प्रदर्शन और नारेबाजी की इजाजत नहीं है.

रिज मैदान और मॉल रोड प्रतिबंधित हैं, यहां पर प्रदर्शन और नारेबाजी की इजाजत नहीं है.

Himachal News: संयुक्त किसान मंच के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों बागवान शामिल हुए, इनमें काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं. प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की भी देखने को मिली. कई किसान नेताओं को पुलिस की ओर से जबरन उठाया गया.

अधिक पढ़ें ...

    हाइलाइट्स

    रिज मैदान और मॉल रोड प्रतिबंधित हैं, यहां पर प्रदर्शन और नारेबाजी की इजाजत नहीं है.
    हरीश चौहान ने कहा कि सरकार ने अगर जल्द मांगे नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
    संयुक्त किसान मंच के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों बागवान शामिल हुए.

    शिमला. हिमाचल प्रदेश का सेब बागवान सरकार से खासा नाराज चल रहा है. सेब पैकेजिंग मैटिरियल में जीएसटी लागू होने समेत खाद, स्प्रे की दवाइयों सहित अन्य सभी चीजों के दामों में बढ़ौतरी खिलाफ बुधवार को जेल भरो आंदोलन की शुरूआत की गई. किसान-बागवानों में राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान और मॉल रोड पर लगी धारा 144 को तोड़कर प्रदर्शन किया और गिरफ्तारियां दीं. रिज मैदान और मॉल रोड प्रतिबंधित हैं, यहां पर प्रदर्शन और नारेबाजी की इजाजत नहीं है.

    संयुक्त किसान मंच के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों बागवान शामिल हुए, इनमें काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं. प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की भी देखने को मिली. कई किसान नेताओं को पुलिस की ओर से जबरन उठाया गया. मंच के संयोजक हरीश चौहान, सह संयोजक संजय चौहान, माकपा विधायक राकेश सिंघा समेत अन्य किसान नेताओं के नेतृत्व में बागवानों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोला. किसान मंच ने साफ किया कि 20 सूत्रीय मांग पत्र पर सरकार ने केवल 5 मांगों पर आश्वासन दिया है, वो मांगे पूरी नहीं हुई हैं और 15 मांगो पर सरकार चुप्पी साधी है.

    सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे
    हरीश चौहान ने कहा कि सरकार ने अगर जल्द मांगे नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को राज्य सचिवालय के बाहर हुए आंदोलन के बाद मुख्य सचिव ने वार्ता के लिए बुलाया था लेकिन वार्ता विफल रही. राज्य सरकार की ओर से कोई मदद नहीं की गई. उन्होंने कहा कि इन सेब उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे किसानों बागवानो की लागत बढ़ गई है. और मंडियों में उत्पाद का सही दाम नहीं मिलता है. उन्होंने कहा कि इसी तरह बागवानों की अनदेखी जारी रही तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

    Tags: Himachal Police, Himachal pradesh news, Shimla News

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर