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Jubbal Kotkhai By-elections: क्या रोहित ठाकुर दादा और चेतन बरागटा पिता की विरासत संभाल पाएंगे?

कांग्रेस के पूर्व विधायक रोहित ठाकुर और भाजपा नेता चेतन बरागटा. (FILE PHOTO)

कांग्रेस के पूर्व विधायक रोहित ठाकुर और भाजपा नेता चेतन बरागटा. (FILE PHOTO)

Jubbal Kotkhai By-elections: कांग्रेस के रोहित ठाकुर 2003 और 2012 में यहां से चुनाव जीते थे. वह अपने पिता रामलाल ठाकुर की विरासत को यहां से आगे ले जाने में कामयाब हुए थे. अब उनका मुकाबला नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा से हो सकता है.

  • News18Hindi
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शिमला. हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव के लिए बिगुल बज चुका है. यहां पर ठंड में अब सियासी पारा बढ़ गया है. सूबे में तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए मतदान होना है. शिमला में जुब्बल-कोटखाई विधानसभा सीट पूर्व मंत्री और तत्कालीन मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा के निधन के बाद खाली हो गई थी. कांग्रेस की परंपरागत इस सीट पर जहां भाजपा चुनौती पेश कर रही है. वहीं, भाजपा के लिए भी अब 2017 चुनाव में जीती इस सीट को बचाना चुनौती होगा. फिलहाल, टिकट के चाहवानों की धुकधुकी बढ़ गई है.

जुब्बल-कोटखाई विधानसभा सीट पर दो ही पार्टियों में मुकाबला है. कांग्रेस से पूर्व विधायक रोहित ठाकुर और दिवंगत नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा के बीच मुकाबला हो सकता है. चेतन बरागटा भाजपा आईटी सेल के प्रभारी भी रहे हैं. वहीं, रोहित ठाकुर यहां से विधायक रह चुके हैं और पूर्व सीएम राम लाल ठाकुर के पोते हैं. इस सीट पर भाजपा से जिला परिषद सदस्य रही नीलम सरैक और संघ की पृष्ठभूमि के सुशांत देष्टा भी भाजपा से टिकट चाह रहे हैं.

हालांकि, यहां से माना जा रहा है कि कांग्रेस के रोहित ठाकुर और भाजपा के चेतन बरागटा के बीच ही चुनाव होगा. हालांकि, जुब्बल-कोटखाई में नीलम सरैक कई बार दावेदारी और खुलेआम टिकट के लिए अपनी बात कह चुकी हैं. कांग्रेस अगर रोहित ठाकुर को चुनावी समर में उतारती है तो उन्हें पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष महेंद्र स्तान, यशवंत छाजटा और स्थानीय नेताओं को साथ लेकर चलना होगा.

क्या कहता है सीट का इतिहास
यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है. बीते 1951 से अब तक हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दस बार इस सीट पर कब्जा जमाया है. कांग्रेस के रामलाल ठाकुर यहां से सबसे ज्यादा 6 बार विधायक रहे हैं. वहीं, उनके पोते रोहित ठाकुर ने 2012 में यहां से चुनाव लड़ा था. रोचक बात यह है कि इस सीट पर 1990 के चुनाव में वीरभद्र सिंह को रामलाल ठाकुर के हाथों हार मिली थी. भाजपा के खाते में दो बार यह सीट गई है. नरेंद्र बरागटा यहां से दो बार विधायक रहे हैं. वहीं, जनता दल ने 1990 में एक बार यह सीट जीती थी. 13 बार इस सीट पर चुनाव हुए और 10 मर्तबा कांग्रेस को यहां से जीत मिली है. 1990, 2007 और 2021 के चुनाव को छोड़ दें तो बाकी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमाया है.
दो बार के विधायक का नए नेता से मुकाबला?
कांग्रेस के रोहित ठाकुर 2003 और 2012 में यहां से चुनाव जीते थे. वह अपने दादा रामलाल ठाकुर की विरासत को यहां से आगे ले जाने में कामयाब हुए थे. अब उनका मुकाबला नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा से हो सकता है. दोनों पर ही अपने परिवार की सियासी विरासत को आगे ले जाने का जिम्मा है. दोनों के पिता यहां से दिग्गज नेता रह चुके हैं. चेतन बरागटा का यह पहला चुनाव है. हालांकि, उन्हें पिता की मौत की सहानुभूति का फायदा मिल सकता है. लेकिन उनकी राह आसान नहीं होगी.

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