करगिल विजय दिवस: हिमाचल से 52 जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान

ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि नरेंन्द्र मोदी उस समय हिमाचल भाजपा के प्रभारी थे और 5 और 6 जुलाई 1999 को सेना का हौंसला बढ़ाने के लिए के लिए सीमा पर पहुंचे थे. उनके साथ हिमाचल के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और मंत्री रहे गुलाब सिंह ठाकुर भी थे.

News18 Himachal Pradesh
Updated: July 26, 2019, 12:40 PM IST
करगिल विजय दिवस: हिमाचल से 52 जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
करगिल विजय दिवस.
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Updated: July 26, 2019, 12:40 PM IST
हिमाचल के अलावा पूरे देश में करगिल विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई जा रही है. देश के विभिन्न हिस्सों में दिल्ली से लेह और करगिल तक कार्यक्रम हो रहे हैं. गौरतलब है कि इस वॉर में देश भर से सैनिकों ने अपने प्राणों का सर्वाच्च बलिदान दिया. इस युद्ध में हिमाचल से 52 सैनिकों ने शहादत का जाम पीया. विक्रम बत्रा और सौरभ कालिया जैसे नामों में साहस का परिचय दिया और दुश्मनों के छक्के छुड़ाए और शहीद हो गए.

सबसे ऊंची चोटी पर कब्जे ने बदला रुख
करगिल युद्व के हीरो रहे हिमाचल के मंडी के नगवाईं कस्बे के ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने युद्ध की यादों को ताजा करते हुए बताया कि जब चार जुलाई 1999 को सबसे मुश्किल चोटी टाइगर हिल पर सेना ने जीत दर्ज कर ली तो युद्व में भारत का पलडा भारी हो गया. चार जुलाई 1999 का दिन हर भारतीय को याद रहेगा. 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाकर वहां पर अपना तिरंगा फहराया था. 17 हजार फिट ऊंची टाइगर हिल पर तिरंगा लहराते ही पाकिस्तान की कमर टूट गई. दुश्मन टाइगर हिल की चोटी पर था और वहां से दुश्मन सीधे श्रीनगर, द्रास, करगिल और लेह मार्ग पर गोलाबारी कर बाधा पहुंचा रहा था. इसके बाद टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने का जिम्मा 18 ग्रेनेडियर को दिया था.

18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व खुशहाल ठाकुर ने किया

17 हजार फिट ऊंची टाइगर हिल के लिए 18 ग्रेनेडियर ने करीब 36 घंटे आपरेशन चलाया और टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया. 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व सेवानिवृत्त ब्रिग्रेडियर खुशहाल ठाकुर ने किया. खुशहाल ठाकुर ने बताया कि 18 ग्रेनेडियर की कमांडों टीम की अगुवाई कैप्टन बलवान सिंह ने की. 36 घंटे चले इस आपरेशन के लिए 18 ग्रेनेडियर के जवानों के अपने खाने के सामान को कम करने असलाह और बारूद भर लिया. टाइगर हिल को कब्जाने के लिए हवलदार योगेंद्र यादव ने लहुलूहान और बुरी तरह घायल होने के बावजूद दुश्मनों की कई चौकियों को तबाह कर दिया था और इसी वीरता के लिए हवलदार योगेंद्र यादव को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा गया.

Kargil vijay diwas
करगिल युद्ध के दौरान पूजा करते हुए खुशहाल ठाकुर और अन्य जवान.


खुशहाल ठाकुर को युद्ध सेवा मेडल
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18 ग्रेनेडियर की कमाड़ों टीम का नेतृत्व करने वाले कैप्टन बलवान सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया. टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने लिए कैप्टन सचिन और हवलदार मदन लाल को वीरचक्र से नवाजा गया था. टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए चले 36 घंटे के आपरेशन में 18 ग्रेनेडियर के 9 जवान शहीद हुए. कारगिल युद्ध में अदम्य साहस के लिए 18 ग्रेनेडियर को 52 वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए. 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व करने वाले खुशहाल ठाकुर को युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया. उन्होंने बताया कि इस युद्ध में हिमाचल से 54 जवान शहीद हुए थे. मंडी से 12 जवान शहीद हुए थे.

kargil vijay diwas
करगिल की एक चोटी पर भारतीय जवान.


एक घास का तिनका नहीं
खुशहाल ठाकुर ने बताया कि टाइगर हिल की लड़ाई बहुत कठिन थी. 17000 फिट की ऊंचाई पर आक्सीजन की कमी थी, सुखी और पत्थरीली सीधी चढ़ाई थी, दुश्मन चोटी पर था और छिपने के लिए एक घास का तिनका तक नहीं था. खुशहाल ठाकुर ने बताया कि जैसे ही टाइगर हिल पर भारतीय सेना ने तिरंगा लहराया पाकिस्तान की कमर टटू गई थी. ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि नरेंन्द्र मोदी उस समय हिमाचल भाजपा के प्रभारी थे और 5 और 6 जुलाई 1999 को सेना का हौंसला बढ़ाने के लिए के लिए सीमा पर पहुंचे थे. उनके साथ हिमाचल के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और मंत्री रहे गुलाब सिंह ठाकुर भी थे.

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First published: July 26, 2019, 9:27 AM IST
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