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    Karvachauth in Shimla: रिज पर चांद के दीदार तो होंगे, लेकिन आयोजन पर रोक

    शिमला में बाजार में भीड़.
    शिमला में बाजार में भीड़.

    Karva Chauth in Shimla: एनसीसी कैडेट्स की सहायता से लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य निर्देशों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाएगा.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 4, 2020, 9:22 AM IST
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    शिमला. महिलाओं और नवविवाहिताओं को हर साल करवा चौथ (Karva Chauth) का इंतजार रहता है. लेकिन इस बार कोरोना के चलते हर त्योहार पर मार पड़ी है. शिमला में महिलाओं में रिज मैदान से चांद (Moon) का दीदार करने का काफी क्रेज होता है. ऐसा इसलिए है कि क्योंकि पूरे शिमला (Shimla) में रिज मैदान पर ही सबसे पहले चांद निकलता है.

    इस बार रिज मैदान पर रात को 8 बज कर 6 मिनट पर चांद देखा जा सकता है. खास बात यह है कि इस बार व्रत के समय में भद्रा नहीं है. जिसके चलते चांद देखने पर व्रत तोड़ा जा सकता है. रिज पर किसी भी तरह के कार्यक्रम पर रोक रहेगी.

    शिमला में बाजार में उमड़ी भीड़.




    क्या है कहानी
    पंडित वासुदेव ने बताया कि करवा चौथ का त्यौहार गणेश चतुर्थी के दिन मनाया जाता है और चार करवे रखकर ही इस दिन पूजा की जाती है. इसके पीछे एक कहानी है की जिन घड़ों के जरिए करवा चौथ में पूजा की जाती है, उन्हें करवा क्यों कहा जाता है. कहा जाता है कि पुराने समय में एक महिला थी, जिसका नाम करवा था. एक बार करवा का पति पानी लाने के लिए नदी में जाता है और उस वक्त उस पर एक मगरमच्छ हमला कर देता है. जान बचाने के लिए वह अपनी पत्नी का नाम करवा चिल्लाता है. उस दिन करवा ने गणेश चतुर्थी पर व्रत रखा था और उस वक्त करवा भगवान गणेश की पूजा कर रही थी. आवाज सुनते ही करवा दौड़ी-दौड़ी अपने पति को बचाने के लिए नदी के पास पहुंचती है और साथ में सूत का धागा भी लाती है. भगवान से प्रार्थना करते हुए करवा कहती है कि अगर उसने सच्चे मन से भगवान की सेवा की है तो धागे से मगरमच्छ बंध जाए. यह सोच कर करवा ने सूत नदी में फेंक देती है और देखते ही देखते मगरमच्छ उससे बंध जाता है और करवा का पति उसके चंगुल से छूट जाता है. तभी से इस व्रत का नाम करवा करवाचौथ पड़ा. यह पर्व गणेश चतुर्थी के दिन आता है.

    शिमला में जमकर लोगों ने खरीदारी की है.


    कोरोना के चलते डर

    करवा चौथ के दिन शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में नजारा देखने वाला होता था, क्योंकि हजारों महिलाएं इस दिन सज धज कर यहां पहुंच कर चांद का दीदार करने के लिए आती थी. कोरोना के चलते इस बार लोगों में काफी डर देखने को मिल रहा है. क्योंकि भीड़ होने की वजह से कोरोना फैलने का खतरा बना हुआ है. शिमला के डीसी आदित्य नेगी ने बताया कि इस बार शिमला को अलग-अलग सेक्टर्स में बांटा गया है एडीएम लॉयन ऑर्डर को शिमला का नोडल ऑफिसर बनाया गया है. हर एक सेक्टर मजिस्ट्रेट के अंडर होगा और मजिस्ट्रेट का काम लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग करना, मास्क पहनना जैसे निर्देशों का पालन लोग कर रहे हैं या नहीं, इस पर चेक रखना होगा. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जो लोग घर पर रह कर ही चांद देख सकते हैं, वो घर से ही पूजा करें. इसके अलावा त्योहारों में बाजार में बढ़ रही भीड़ को नियंत्रण करने के लिए एडिशनल पुलिस की सहायता ली जाएगी. एनसीसी कैडेट्स की सहायता से लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य निर्देशों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाएगा.
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