हिमाचल: साल 2008 में हुआ था MoU, विवादों में भी रह चुका है 1810.56 करोड़ का लुहरी हाईड्रो प्रोजेक्ट

शिमला में लुहरी प्रोजेक्ट.
शिमला में लुहरी प्रोजेक्ट.

हिमाचल के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है. इनेबलिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए भारत सरकार से 66.19 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता भी शामिल है, जिससे विद्युत टैरिफ को कम करने में सहायता मिली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 10:58 AM IST
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शिमला. केंद्रीय कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में रामपुर में लुहरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (Luhri Hydro Power Project) स्टेज-1 में निवेश को मंजूरी दी है. पीएम नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने इस जलविद्युत परियोजना के लिए 1810.56 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है. 210 मेगावाट की ये जल विद्युत परियोजना हिमाचल के शिमला और कुल्‍लू जिले में सतलुज नदी (Satluj River) पर बन रही है. लेकिन यह परिजयोजना शुरूआत में ही विवादों में आ गई थी.

क्यों विवादों में रही है परियोजना
लुहरी परियोजना कई कारणों से लंबे समय तक विवादों में रही है. परियोजना को लेकर एसजेवीएन ने हिमाचल सरकार के साथ 27 अक्तूबर 2008 को एमओयू साइन किया था. पहले 38 किलोमीटर लंबी टनल का प्रस्ताव था, जिस पर स्थानीय लोगों के अलावा राज्य सरकार को भी आपत्ति थी. विरोध भी हुआ था. क्योंकि, इससे सतलुज नदी का एक बड़ा भाग सूख सकता था. सतलुज जल विद्यूत निगम (एसजेवीएन) की डीपीआर पर भी कई सवाल उठे. परियोजना 700 मेगावाट से ज्यादा की थी और एक ही स्टेज पर बननी थी. उसके बाद मार्च, 2015 में प्रदेश सरकार ने फिर से संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया. नई डीपीआर में इसे तीन चरणों में बनाने को मंजूरी दी गई. 210 मेगावाट लूहरी चरण-, 172 मेगावाट लूहरी चरण-।। और स्टेज III 382 मेगावाट की सुन्‍नी बांध जलविद्युत परियोजना के रूप में डिजाइन किया गया. उसके बाद ये सभी परियेाजनाएं एसजेवीएन को 29 अगस्त 2017 को दोबारा आवंटित की गई.

इन्वेस्टर मीट में पीएम की मौजूदगी में एमओयू
साल 2019 में हिमाचल सरकार की धर्मशाला ग्लोबल इन्वेस्टर मीट में पीएम की मौजदूगी में स्‍टैंड एलोन आधार पर इन परियेाजनाओं के निर्माण के लिए हिमाचल सरकार के साथ एमओयू किए गए थे.



क्या बोले सीएमडी
एसजेवीएन के सीएमडी नंद लाल शर्मा ने बताया कि 210 मेगावाट की लूहरी चरण- परि‍योजना को बिल्‍ड-ओन-ऑपरेट-मेंटेन (बूम) आधार पर हिमाचल शिमला और कुल्‍लू जिलों में एनएच-5 के साथ नीरथ गांव के समीप सतलुज नदी पर बनाया जा रहा है. स्टेज-। परियोजना 3.40 घंटे के लिए पीकिंग जलाशय के साथ एक रन-ऑफ-द-रिवर योजना है. इसके लिए 80 मी.ऊंचा, 225 मी. लंबा तथा 8 मी. चौड़ा, एक कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा, जिससे लगभग 6 किलोमीटर के जलाशय का निर्माण होगा. बांध निर्माण को सक्षम करने के लिए, नदी के प्रवाह को 10 मी. के व्‍यास एवं 567 मी. लंबी हार्स-शू आकार की डायवर्जन टनल के माध्‍यम से मोड़ा जाएगा. नंद लाल शर्मा ने बताया कि 644 क्‍यूमेक्‍स के डिस्‍चार्ज का उपयोग चार इनटेकों के माध्‍यम से किया जाएगा जो 90 मी. लंबे चार पेनस्‍टॉकों से गुजरते हुए टरबाइन में प्रवेश करेगा.

5 साल में तैयार करने का लक्ष्य
परियोजना से सालाना 758 मिलियन यूनिट बिजली का उत्‍पादन होगा. परियोजना के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 62 माह का लक्ष्य तय किया है. इस परियोजना से 2000 लोगों के लिए रोजगार मिलेगा. इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश को 40 वर्षों तक लगभग 1050 करोड़ रुपए की नि:शुल्‍क बिजली दी जाएगी.

प्रभावितों को 100 यूनिट मुफ्त बिजली
सीएमडी के मुताबिक, परियोजना प्रभावित परिवारों को 10 साल तक प्रति माह 100 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी. साथ ही परियोजना की कमाई के 1% अतिरिक्‍त स्‍थानीय क्षेत्र विकास निधि (लगभग 3.08 करोड़ रुपए प्रति वर्ष) खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा परियोजना के निष्‍पादन से सड़कों एवं पुलों, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल सेवाओं और अन्‍य स्‍थानीय अवसंरचनाओं का विकास होगा. नंद लाल शर्मा ने इस परियोजना के लिए सहयोग देने के लिए विद्युत एवं एमएनआरई के राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) आरके सिंह और हिमाचल के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है. इनेबलिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए भारत सरकार से 66.19 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता भी शामिल है, जिससे विद्युत टैरिफ को कम करने में सहायता मिली है.
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