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मिलिये, HPU में संस्कृत के प्रोफेसर रहे और पद्मश्री से नवाजे गए अभिराज राजेंद्र मिश्र से
Shimla News in Hindi

News18 Himachal Pradesh
Updated: January 27, 2020, 11:47 AM IST
मिलिये, HPU में संस्कृत के प्रोफेसर रहे और पद्मश्री से नवाजे गए अभिराज राजेंद्र मिश्र से
अभिराज मिश्र मूल रूप से यूपी के रहने वाले हैं, लेकिन शिमला में ही रहते हैं.

Padam Shree Award Winner Abhiraj Rajender Mishra: अभिराज मिश्र को साल 1988 में संस्कृत के लिए साहित्य अकादमी सम्मान भी मिला. अभिराज मिश्र का जन्म साल 1943 में हुआ. उन्हें त्रिवेणी कवि के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने हिंदी और संस्कृत में कई कविताएं भी लिखी हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में संस्कृत विभाग की स्थापना करने वाले प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र को पद्मश्री अवार्ड (Padam Shri Award) से नवाजा गया है. बीते शनिवार को पद्मश्री अवॉर्ड पाने वालों के नामों की की घोषणा हुई, इसमें हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी (एचपीयू) के संस्कृत विभाग (Sanskrit Department) के संस्थापक और विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर अभिराज भी शामिल रहे. अभिराज ने शिमला (Shimla) के समरहिल में घर बनाया है. हालांकि, वह मूल रूप से बनारस से हैं. लेकिन लंबे समय से शिमला में रहते हैं.

2003 में रिटायर हुए
अभिराज 2003 में एचपीयू से रिटायर हुए और इसके बाद वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी के कुलपति भी रहे. वह देश-दुनिया में संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए प्रयासरत रहे. इसके अलावा, संस्कृत में भी कविता पाठ करने के लिए जाने जाते हैं. एचपीयू का कुलगीत भी इनकी ही रचना है. संस्कृत में पाठ करने के चलते ही उन्हें कविराज की उपाधि दी गई. मिश्र को विश्वविद्यालय में दी गई अपनी सेवाओं व संस्कृत के प्रचार-प्रसार को लेकर किए गए प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया गया है.

अभिराज राजेंद्र मिश्र. (File Photo)
अभिराज राजेंद्र मिश्र. (File Photo)


कवि, वक्ता एवं संस्कृत कविता पाठ
अभिराज राजेन्द मिश्र की प्रारम्भिक शिक्षा उनके पैतृक गाँव के प्राइमरी स्कूल से हुई. इसके बाद छठी से 12वीं तक की शिक्षा उन्होंने यूपी के जौनपुर में प्राप्त की. इसके बाद वह उच्चशिक्षा के लिए इलाहाबाद आ गए. मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 1962 में बीए, 1964 में कला संकाय से प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए एमए की.10 दिसम्बर 1966 ई. में उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विभागीय प्रवक्ता पद पर नियुक्ति मिली. उन्हें काफी अच्छा वक्ता माना जाता है. वह इंडोनेशिया में सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी में गेस्ट लेक्चरर भी रहे चुके हैं.

साहित्य अकादमी सम्मान भी मिलाअभिराज मिश्र को साल 1988 में संस्कृत के लिए साहित्य अकादमी सम्मान भी मिला. अभिराज मिश्र का जन्म साल 1943 में हुआ. उन्हें त्रिवेणी कवि के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने हिंदी और संस्कृत में कई कविताएं भी लिखी हैं.

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First published: January 27, 2020, 11:40 AM IST
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