जानिये, किस बैंक को भारी नुकसान पहुंचाने की फिराक में था APG यूनिवर्सिटी प्रबंधन

एपीजी यूनिवर्सिटी प्रबंधन कैनरा बैंक को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था.

एपीजी यूनिवर्सिटी प्रबंधन कैनरा बैंक को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था.

एपीजी यूनिवर्सिटी प्रबंधन (APG) यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) के कुछ अधिकारियों से मिलकर कैनरा बैंक (Canara Bank) को भारी नुकसान पहुंचाने की फिराक में था.

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शिमला. शिमला का एक शिक्षण संस्थान बैंक को चूना लगाने की फिराक में था. पुख्ता सूत्रों के अनुसार एपीजी यूनिवर्सिटी (APG UNIVERSITY) प्रबंधन यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank Of India) के कुछ अधिकारियों से मिलकर कैनरा बैंक (Canara Bank) को चूना लगाने की फिराक में था. कैनरा बैंक से एपीजी यूनिवर्सिटी ने करोड़ों का कर्ज लिया है. करोड़ों के इस लोन की राशि को एपीजी प्रबंधन एनपीए घोषित करवाना चाहता है. इसके लिए प्रबंधन ने चुपके से मॉल रोड स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में खाता खुलवा लिया. बैंक के नियमों के तहत यह खाता कैनरा बैंक की एनओसी के बिना नहीं खुल सकता था, लेकिन यूनियन बैंक के अधिकारियों से सांठगांठ के चलते खाता खुलवा दिया. बैंक अकाउंट खोलने के लिए गलत जानकारी दी गई. गलत जानकारी देने और एनओसी नहीं होने की सूरत में यूनियन बैंक खाता खुलवाने वाले के खिलाफ कार्रवाई कर सकता था. एफआईआर भी करवा सकता था लेकिन बैंक प्रबंधन ने ऐसा कुछ नहीं किया. इस बात पुष्टि एक ईमेल से हो रही है.



कैनरा बैंक ने यूनियन बैंक को नोटिस भिजवाया



एपीजी प्रशासन ने 10 अक्तूबर को अपने टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को ईमेल के जरिए आदेश दिए कि अपना सैलरी अकॉउंट माल रोड स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में खुलवा लें. सैलरी ट्रांसफर में आसानी का हवाला दिया गया था. यह भी आश्वासन दिया गया था कि इस संबंध में बैंक के अधिकारी यूनिवर्सिटी कैंपस आएंगे. यूनियन बैंक में खाता खुलावाने की सूचना जैसे ही कैनरा बैंक को मिली तब प्रबंधन तुरंत हरकत में आया. कैनरा बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही यूनियन बैंक को नोटिस जारी करवाया गया और उस खाते को सीज करवा दिया गया है. इस संबंध में एपीजी प्रबंधन को भी तलब किया गया है.





email
एपीजी यूनिवर्सिटी प्रबंधन के नीयत की पुष्टि इस ईमेल से हो रही है.

इस मामले में एपीजी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने ओढ़ी चुप्पी



इस बाबत एपीजी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार आर के कायस्थ ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर आर. के. चौधरी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. वहीं दूसरी ओर यूनियन बैंक के अधिकारी संतोष सिंह ने कहा कि बैंक के गोपनीयता के नियमों के तहत किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी जा सकती है. निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के चैयरमेन के. के. कटौच का कहना है कि यह यूनिवर्सिटी का अंदरूनी मामला है.



कर्मचारियों को समय पर कभी भी नहीं मिलता वेतन



अब पूरे मसले को ध्यान से समझने का प्रयास करें तो एक बड़ी साजिश की बू आ रही है. एपीजी यूनिवर्सिटी हमेशा से विवादों में रही है. कर्मचारियों को वेतन तो कभी भी समय पर नहीं मिलता है. वित्तीय अनियमितताओं से लेकर अन्य गड़बड़झाले के मामले अक्सर सामने आते हैं और विभिन्न तरह की शिकायतें आयोग के पास भी पहुंचती हैं.



वित्तीय अनियमितताओं के बावजूद नहीं हुई अबतक कोई कार्रवाई



एपीजी यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर आरोप यह भी लगते रहे हैं कि शिक्षा से कोई सरोकार नहीं बल्कि मुनाफा कमाने के लिए ही यह संस्थान खोला गया है. ऐसे में अकाउंट ट्रांसफर करने के पीछे बड़ी साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता. एपीजी प्रंबधन में हाल ही में बड़े बदलाव किए गए हैं. करीब एक महीने पहले ही राजन सहगल को अचानक हटाकर आर के कायस्थ को रजिस्ट्रार बनाया गया. हैरानी इस बात पर भी है कि लगातार विवादों के बावजूद सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए हैं.



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