जानिए क्यों, HPU के प्रोफेसरों को नहीं भा रहा पढ़ाना और शोध कराना

एचपीयू के ऑर्डिनेंस में चुनाव लड़ने की व्यवस्था थी, लेकिन तत्तकालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस व्यवस्था को हटा दिया था.

Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 5, 2019, 8:28 AM IST
जानिए क्यों, HPU के प्रोफेसरों को नहीं भा रहा पढ़ाना और शोध कराना
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों को कक्षाओं में पढ़ाना रास नहीं आ रहा है. वे नेता बनना चाहते हैं.
Ranbir Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 5, 2019, 8:28 AM IST
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों को कक्षाओं में पढ़ाना रास नहीं आ रहा है. यहां के कुछ प्रोफेसरों की शोध करने या कराने में कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है. कुछ कर्मचारी नेताओं को भी विश्वविद्यालय में काम करना नहीं भा रहा है. वजह यह है कि वो नेता बनना चाहते हैं. उन्हें चुनाव लड़ना है. उनकी इच्छा विधायक बनने की है. पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि, एचपीयू के ऑर्डिनेंस में चुनाव लड़ने की व्यवस्था थी, लेकिन तत्तकालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस व्यवस्था को हटा दिया था. नेता बनने की चाहत पाले लोगों ने रोक को हटाने के लिए कई बार गुहार लगाई लेकिन हर बार फटकार के अलावा कुछ नहीं मिला है.

इस मुद्दे को कार्यकारिणी परिषद में ले जाया गया था

कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार -sikandar kumar vc
कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार का कहना है कि प्रोफेसर और कर्मचारी नेता कह रहे हैं कि उनका हक छीना गया है. यही वजह है कि इस मुद्दे को कार्यकारिणी परिषद में ले जाया गया.


प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रोफेसरों की राजनीतिक इच्छाएं कुलांचे मारने लगीं. सरकार में रसूख रखने वाले प्रोफेसरों और कर्मचारी नेताओं ने कार्यकारिणी परिषद को मजबूर किया कि पूर्व में लिया गया फैसला बदल दिया जाए. इस फैसले पर चुपके से मुहर लगा दी गई और फाइल अब प्रदेश के मुखिया के दर पर पहुंच गई है. HPU के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार का कहना है कि प्रोफेसर और कर्मचारी नेता कह रहे हैं कि उनका हक छीना गया है. यही वजह है कि इस मुद्दे को कार्यकारिणी परिषद में ले जाया गया, जिसपर फैसला सरकार को लेना है.

पूर्व में भी कुछ प्रोफेसर चुनाव लड़ चुके हैं

आपको बता दें कि पूर्व में भी कुछ प्रोफेसर चुनाव लड़ चुके हैं. एचपीयू में छात्रों से लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों के भाजपा, कांग्रेस और माकपा से सीधे संबंध हैं. एचपीयू के बहुत सारे लोग नेताओं के आगे—पीछे करते हुए देखे जाते हैं. कुछ तो पार्टियों के पदाधिकारी भी रह चुके हैं. पार्टी के पदाधिकारी होने के चलते एचपीयू में उनका राजनीतिक दखल ज्यादा होता है. ज्यादातर फैसले राजनीतिक हितों को देखते हुए लिए जाते हैं.

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First published: August 5, 2019, 8:28 AM IST
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