Exclusive कोटखाई गैंगरेप-2017: CBI का शिमला में रहने का खर्च पहुंचा 21.70 लाख रुपये

सीबीआई की टीम के लिए शिमला में होटल के कमरे बुक हैं.
सीबीआई की टीम के लिए शिमला में होटल के कमरे बुक हैं.

Kotkhai Gang rape and murder: सीबीआई ने किस आधार पर ये मान लिया कि इस जघन्य अपराध को अकेले व्यक्ति ने अंजाम दिया है. गुड़िया की एक जुराब कहां है? पुलिस और अन्य लोगों से जब्त किए गए करीब 50 मोबाइल कहां हैं और उनसे क्या हासिल हुआ. क्या एक चिरानी को बचाने के लिए डीआईजी,एसपी से लेकर डीएसपी और अन्य पुलिसकर्मी जेल चले गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 3:14 PM IST
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शिमला. हिमाचल प्रदेश के शिमला (Shimla) जिले के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड (Gudia Rape and Murder Case) मामले पर सीबीआई जांच को 3 साल पूरा हो गए हैं. लेकिन जांच पर सवाल अब भी जस के तस हैं. सीबीआई (CBI) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है, सरकार जांच और खर्च पर चुप्पी साधे हुई है. ये जांच सरकार को खासी महंगी पड़ रही है. सीबीआई (CBI) की टीम के शिमला (Shimla) में रहने का खर्च अब तक 21 लाख 70 हजार रू. को पार कर चुका है. सरकार के शानदार स्टेट गेस्ट पीटरहॉफ में सीबीआई की टीम ने 25 जुलाई 2017 से डेरा जमाया हुआ है. पीटरहॉफ (Peter off) में सीबीआई के नाम पर कमरा नंबर 101,102 और 103 अब भी बुक हैं.

बीते 6 महीने में केवल एक बार आए अधिकारी
पीटरहॉफ से जानकारी मिली है कि अब कभी-कभार ही सीबीआई के अधिकारी यहां पर आते हैं लेकिन कमरे अब भी बुक हैं. बीते 6 महीने में केवल एक बार ही एक अधिकारी आया है. बकाया जमा करने के लिए पर्यटन निगम कई बार सीबीआई और सरकार से पत्राचार कर चुका है लेकिन एक रूपया भी जमा नहीं किया गया है. गुड़िया केस का ट्रायल जिला अदालत में चल रहा है और इससे जुड़े सूरज हत्याकांड का मामला चंडीगढ़ में सीबीआई कोर्ट में चल रहा है. ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी फंड का दुरूपयोग किया जा रहा है. बीते साल भी टैक्सी के किराए के भुगतान का मामला सामने आया था, वो करीब 64 हजार रू था. इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई थी.

परिजन फिर से हाईकोर्ट की शरण में
गुड़िया के परिजन अब तक न्याय के लिए भटक रहे हैं. इंसाफ की आस में सुप्रीम कोर्ट से होते हुए अब दोबारा हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं. हाईकोर्ट से मामले की निगरानी में दोबारा जांच की मांग कर रहे हैं, 15 अक्तूबर को फिर से याचिका लगाई गई है. सीबीआई ने साफ किया है कि इस जघन्य अपराध को करीब चार फुट के अनिल कुमार ऊर्फ नीलू ने अंजाम दिया है.



जांच पर सवाल
सीबीआई जांच पर अब भी सवाल उठ रहे हैं कि अकेला चिरानी क्या दुराचार और हत्या को अंजाम दे सकता है. डीएनए टेस्ट के बाद सीबीआई नीलू को मुख्य आरोपी मान चुकी है. इस अपराध में नीलू के अलावा अन्य लोगों के शामिल होने के सवाल पर सीबीआई खामोश है. सवाल ये भी हैं कि अगर जबरन रेप उसी स्थान पर हुआ था,जहां गुड़िया का शव मिला था तो कपड़े फटे क्यों नहीं थे? साथ में क्यों रखे गए थे, मिट्टी तक नहीं लगी थी उनमें. ऐसा नजर आ रहा था जैसे खोलकर रखे गए हैं. शिमला पुलिस ने तो दावा किया था कि ये गैंगरेप है, गैंगरेप को साबित करने के लिए पुलिस ने जो सबुत जुटाए थे,उनका क्या हुआ. सीबीआई ने किस आधार पर ये मान लिया कि इस जघन्य अपराध को अकेले व्यक्ति ने अंजाम दिया है. गुड़िया की एक जुराब कहां है? पुलिस और अन्य लोगों से जब्त किए गए करीब 50 मोबाइल कहां हैं और उनसे क्या हासिल हुआ. क्या एक चिरानी को बचाने के लिए डीआईजी,एसपी से लेकर डीएसपी और अन्य पुलिसकर्मी जेल चले गए. एक आरोपी की कस्टडी में हत्या की गई? क्या चिरानी इतना प्रभावशाली है. इसके अलावा भी बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनका जबाव नहीं मिल पा रहा है.

गुडिया केस में कब क्या हुआ
4 जुलाई 2017 को कोटखाई के महासू स्कूल की दसवीं की छात्रा लापता हुई.
5 जुलाई को परिजनों ने छात्रा की तलाश की.
6 जुलाई को गुड़िया(काल्पनिक नाम) की लाश नग्न अवस्था में हलाईला के जंगल में मिली, पुलिस ने की जांच शुरू की.
7 जुलाई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि.
10 जुलाई को सरकार ने आईजी जहूर जैदी के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया.
11 जुलाई को चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.
13 जुलाई को पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 55 घंटे के भीतर मामला सुलझाने का दावा किया, 5 आरोपी गिरफ्तार किए गए.
14 जुलाई को जनता भड़की, तत्तकालीन वीरभद्र सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश की.
18 जुलाई को आधी रात को पुलिस हिरासत में एक कथित आरोपी मौत.
19 जुलाई को कोटखाई थाना फूंका गया, केंद्र ने सीबीआई जांच की सिफारिश पर गौर नहीं किया, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए.
22 जुलाई को सीबीआई ने दिल्ली में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए, जांच शुरू की.
29 अगस्त को सीबीआई ने आइजी समेत आठ पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए.
16 नवंबर को शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी गिरफ्तार.
25 नवंबर को सीबीआई ने सूरज कस्टोडियल डेथ मामले पर एसआइटी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
13 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने कोटखाई से आरोपी नीलू को गिरफ्तार किया.
25 अप्रैल 2018 को-सीबीआई ने हाईकोर्ट में फाइनल स्टेटस रिपोर्ट पेश की.
29 मई को सीबीआई ने नीलू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.

यह है मामला
4 जुलाई 2017 का यह मामला है. शिमला के कोटखाई में दांदी जंगल में 16 साल की नाबालिग स्कूली छात्रा मृत मिली थी. हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को दी थी. मामले में लॉकअप में पूछताछ के दौरान एक नेपाली को मौत के घाट उतारा गया, जिसके आरोपी आईजी, एसपी समेत नौ पुलिसकर्मी बनाए गए. सीबीआई ने मामले में एक चिरानी नीलू को गिरफ्तार किया. उसे ही इस हत्या और दुराचार का आरोपी बनाकर मामले में कोर्ट में चालान पेश किया. अब कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है. वहीं, मामले के एक आरोपी सूरज कस्टोडियल डेथ केस में चंडीगढ़ में सुनवाई चल रही है.
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