कोटखाई रेप-मर्डर: दोषी नीलू की सजा पर हुई बहस, CBI ने मांगी फांसी, 3 दिन बाद आएगा फैसला

कोटखाई मर्डर और रेप केस में दोषी करार नीलू.

Kotkhai Rape and Murder: सीबीआई ने इस मामले में 13 अप्रैल 2018 को एक नीलू नामक एक चिरानी को गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ जुलाई 2018 में कोर्ट में चालान पेश किया था. 28 अप्रैल 2021 को आरोपी नीलू को दोषी करार दिया गया था.

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शिमला.हिमाचल प्रदेश के शिमला (Shimla) जिले के चर्चित कोटखाई रेप और मर्डर केस में दोषी नीलू की सजा पर बहस को लेकर मंगलवार को शिमला जिला अदालत (Court) में सुनवाई हुई. इस दौरान सीबीआई (CBI) के वकील और बचाव पक्ष के वकील ने अपनी अपनी दलीलें रखी. अब मामले में 18 जून को सजा का ऐलान किया जाएगा. बता दें कि पिछली पांच सुनवाईयां कोरोना के चलते टाल दी गई थी और 28 अप्रैल को नीलू को दोषी करार दिया गया था.

मंगलवार को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि दोषी ने इस घटना को प्लानिंग के तहत अंजाम नहीं दिया था. ऐसे में सजा-ए-मौत की सजा नहीं सुनाई जाए. वहीं, सीबीआई के वकील ने कहा कि दोषी पेशेवर अपराधी है. सीबीआई के वकील ने इस संबंध में निर्भया केस का जिक्र किया और कहा कि दोषी को फांसी की सजा सुनाई जाए. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोषी की मां उस पर निर्भर है. जबकि सीबीआई के वकील ने कहा कि दोषी के दो और भाई हैं. वह मां की देखभाल कर सकते हैं. अब 18 जून को दोनों पक्षों को कोर्ट में बुलाया गया है.

सीबीआई ने क्या दलील दी

सीबीआई के वकील और बचाव पक्ष के वकील ने अपनी अपनी दलीलें रखी. बहस के दौरान सीबीआई ने इसे जघन्य अपराध बताया और योजनाबद्ध तरीके से किया गया जुर्म करार दिया. साथ ही दलील पेश की कि दोषी इससे पहले भी नाहन में एक मामले में दोषी करार दिया गया है, साथ ही कई अन्य दलील पेश करते हुए मौत की सजा की मांग की. सीबीआई के वकील वर्चुअली जुड़े थे जबकि नीलू के वकील महेंद्र ठाकुर कोर्ट रूम में मौजूद रहे. बचाव पक्ष ने कई केसों में विभिन्न अदालतों में दोषियों को सुनाई गई सजा का हवाला देते हुए दलील दी कि मौत की सजा नहीं सुनाई गई. साथ ही दलील पेश की कि दोषी पर बुजुर्ग मां को पालने की जिम्मेदारी है, वो बीपीएल परिवार से संबंध रखता है. इस पर सीबीआई की ओर से कहा गया कि उसके दो और भी भाई हैं, अपराधी के आर्थिक और सामाजिक आधार पर सजा कम नहीं की जा सकती. सीबीआई ने बहस के दौरान निर्भया केस के दोषी मुकेश का भी उदाहरण पेश किया. बचाव पक्ष ने दलील दी कि मुकेश के खिलाफ सर्कमस्टेंशियल एविडेंस थे, विक्टिम का डाइंग डिक्लेरेशन था. यहां पर किसी तरह से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम नहीं दिया गया, वो सब क्षणिक आवेश में और शराब के नशे में हुआ है.

जुलाई 2017 का मामला
शिमला जिले के कोटखाई के महासू स्कूल की दसवीं की छात्रा 4 जुलाई 2017 को स्कूल से आने के बाद अचानक लापता हो गई थी. दो दिन बाद 6 जुलाई को उसकी लाश दांदी के जंगल में नग्न अवस्था में मिली थी. फॉरेंसिक रिपोर्ट में छात्रा के साथ रेप के बाद हत्या की बात सामने आई थी. शुरूआत में शिमला पुलिस ने इसकी जांच की थी. गैंगरेप की धाराओं में मामला दर्ज किया था और पांच आरोपी भी गिरफ्तार किए थे. एसआईटी जांच से जनता संतुष्ट नहीं थी और सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. ये पांचों आरोपी बाद में बेल पर छोड़ दिए गए थे और सीबीआई की ओर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.

शिमला में जिला अदालत में सुनवाई के दौरान दोषी.


एक संदिग्ध आरोपी की मौत
18 जुलाई 2017 को कोटखाई थाने में एक आरोपी की संदिग्ध मौत के बाद जनाक्रोश भड़का और कई स्थानों पर उग्र प्रदर्शन हुए. कोटखाई थाना जला दिया गया था. केंद्र की ओर से सीबीआई जांच को लेकर स्थिती स्पष्ट नहीं हो पाई. इस बीच प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिती बिगड़ते देख सरकार सीबीआई जांच को लेक हाई कोर्ट गई और हाई कोर्ट ने सीबीआई को जांच करने के आदेश जारी किए थे. सीबीआई ने इस मामले में 13 अप्रैल 2018 को एक नीलू नामक एक चिरानी को गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ जुलाई 2018 में कोर्ट में चालान पेश किया था. 28 अप्रैल 2021 को आरोपी नीलू को दोषी करार दिया गया था.

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