हिमाचल: 'चिनाब बेसिन में प्रस्तावित विद्युत परियोजनाओं पर LAC विवाद का नहीं होगा असर'

चिनाब बेसिन में तीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स लगाने की अनुमति एसजेवीएन को मिली है.
चिनाब बेसिन में तीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स लगाने की अनुमति एसजेवीएन को मिली है.

चिनाब बेसिन (Chenab Basin) में कुल 6 जल विद्युत परियोजनाएं (Hydropower Projects) लगनी हैं, जिनमें से तीन एसजेवीएन को आवंटित की गई है.

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शिमला. देश की मिनी रत्न कंपनी सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) को हिमाचल के लाहौल-स्पीति जिले में चिनाब बेसिन (Chenab Basin) में जल विद्युत परियोजनाएं (Hydropower Projects) बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हिमाचल सरकार ने कंपनी को इस बेसिन में 778 मेगावाट की तीन परियोजनाएं आवंटित की है. स्पीति के कुछ इलाके चीन की सीमाओं से लगते हैं. ऐसे में आशंका है कि भारत का चीन के साथ एलएसी पर चल रहे विवाद का असर इन परियोजनाओं पर पड़ सकता है. हालांकि कंपनी ने ऐसी किसी चुनौती से इनकार किया है.

एसजेवीएन के सीएमडी नंद लाल शर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं पर सुरक्षा कोई चुनौती नहीं है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थिति और मौसम सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि अटल टनल बनने से इन परियोजनाओं के निर्माण में आसानी होगी.

चिनाब बेसिन में कुल 6 जल विद्युत परियोजनाएं बननी हैं. जिनमें से तीन एसजेवीएन को आवंटित की गई है. इनमें 210 मेगावाट की पुर्थी जल विद्युत परियोजना, 138 मेगावाट की बारदंग और 430 मेगावाट का रिओली दुगली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट शामिल हैं.



एसजेवीएन के सीएमडी नंद लाल शर्मा ने कहा कि परियोजनाओं पर इन्वेसटिगेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है. इन्वेसटिगेशन का कार्य जल्द पूरा कर परियोजना का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा.
सीएमडी ने कहा कि शीत- मरूस्थल की कठिन भौगोलिक परिस्थिति और मौसम परियोजना निर्माण में कड़ी परीक्षा लेगा. लेकिन रोहतांग में अटल टनल बन जाने से ये कार्य थोड़ा आसान हो गया है. साल के ज्यादातर समय अब लाहौल-स्पीति के लिए आवाजाही होती रहेगी. निर्माण सामग्री के अलावा, लेबर और मशीनों को लाने और ले जाने समेत कई कार्यों में आसानी होगी.

हिमाचल में 35 हजार करोड़ का निवेश
एसजेवीएन आगामी 5 वर्षों में हिमाचल में 35 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी. प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं के अलावा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी निवेश किया जाएगा. बता दें कि एसजेवीएन में भारत सरकार की हिस्सेदारी 59.8 फीसदी, हिमाचल सरकार की 26.85 और पब्लिक शेयर 13 फीसदी है.
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