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Leopard in Shimla: 4 घंटे तक वन विभाग के दफ्तर में प्रदर्शन, जमीन पर बिठाया हिमाचल का सबसे बड़ा वन अधिकारी

Leopard in Shimla: 4 घंटे तक वन विभाग के दफ्तर में प्रदर्शन, जमीन पर बिठाया हिमाचल का सबसे बड़ा वन अधिकारी

हिमाचल में वन विभाग के दफ्तर में प्रदर्शन करते हुए लोग. तेंदुएं की दहशत के चलते लोग मुखर हुए हैं.

हिमाचल में वन विभाग के दफ्तर में प्रदर्शन करते हुए लोग. तेंदुएं की दहशत के चलते लोग मुखर हुए हैं.

Leopard in Shimla: आदमखोर तेंदुए के न पकड़े जाने पर वन विभाग के खिलाफ लोगों को गुस्सा बढ़ता ही जा रही है. इस मामले पर शिमला नागरिक सभा उग्र हो गई है. कनलोग व डाउनडेल में तेंदुए के हमलों का शिकार हुए दोनों बच्चों के हादसों में एक समानता यह है कि ये घटनाक्रम गरीब बस्तियों में हुए जहां पर स्ट्रीट लाइटों व अन्य सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण तेंदुए को ये हमले करने का मौका मिला.

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शिमला.हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजधानी शिमला (Shimla) में दीवाली वाली रात तेंदुएं ने एक मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाया था. इस मामले पर एक ओर जहां शहर में तेंदुए (Leopard) की दहशत है वहीं दूसरी ओर आदमखोर तेंदुए के न पकड़े जाने पर वन विभाग के खिलाफ लोगों को गुस्सा बढ़ता ही जा रही है. इस मामले पर शिमला नागरिक सभा उग्र हो गई है.

मंगलवार को शिमला नागरिक सभा के सदस्यों ने वन विभाग के मुख्य अरण्यपाल के कार्यालय में जबरदस्त प्रदर्शन किया और करीब 4 घंटे तक दफ्तर के भीतर धरना दिया. इस दौरान कार्यालय के भीतर नागरिक सभा ने जमकर प्रदर्शन किया. इतना ही नहीं नागरिक सभा के सदस्य इतने उग्र हो गए कि वन विभाग के मुख्य अधिकारी PCCF को जमीन पर बिठा दिया. मुख्य अरण्यपाल अजय श्रीवास्तव को जमीन पर बैठकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी पड़ी.

शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान के नेतृत्व में नागरिक सभा ने प्रदर्शन किया. विभाग के अधिकारी काफी देर तक प्रदर्शनकारियों को समझाते और आश्वासन देते रहे, पुख्ता तौर पर आश्वासन मिलने के बाद ही वहां से निकले. करीब सवा तीन महीने पहले हुई घटना और दीवाली रात हुई घटना पर नागरिक सभा ने पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रूपये मुआवजा देने की मांग की. साथ ही शहर में जंगल से सटे इलाकों में फेंसिंग,कैमरों व स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था करने की मांग की.

पूर्व मेयर ने अधिकारी को घेरा
पूर्व मेयर संजय चौहान ने शिमला शहर के बीचों-बीच इस तरह की घटनाओं पर हैरानी व्यक्त की. उन्होंने इसे प्रदेश सरकार,नगर निगम शिमला व वन विभाग की नाकामयाबी करार दिया. संजय चौहान ने कहा कि डाउन डेल शहर के बीचों-बीच है, जब इस तरह की घटना यहां पर हो सकती है तो फिर शिमला शहर के साथ लगते इलाकों में नागरिकों की जानमाल की सुरक्षा की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है, इस से साफ है कि शिमला नगर निगम व इसके इर्द-गिर्द के इलाके में कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है. उन्होंने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि डाउन डेल,नाभा,फागली व कनलोग जैसे शहर के रिहायशी इलाकों में तेंदुएं लगातार घूम रहें हैं.

पिछले कल नाभा में लोगो द्वारा दिन के समय भी तेंदुआ देखा गया, जिससे पूरे शिमला में डर का माहौल बन गया है. तेंदुए बेखौफ घूम रहे हैं और वन विभाग संवेदनहीन है. उन्होंने कहा कि वाइल्ड लाइफ विंग लीपापोती के सिवाए कुछ भी नहीं कर रहा है, अगर कनलोग में अगस्त के महीने में बच्ची को तेंदुए द्वारा उठाने की घटना को वन विभाग ने गम्भीरता से लिया होता तो डाउनडेल की यह घटना नहीं होती. साथ ही कहा कि नगर निगम भी नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गम्भीर नहीं है. शहर के रिहायशी इलाकों में या तो स्ट्रीट लाइटें कई महीनों से खराब पड़ी हैं या फिर हैं ही नहीं. इन दोनों की लापरवाही का खामियाजा निर्दोष जनता को भुगतना पड़ रहा है.

तीन महीनों में तेंदुआ दो बच्चों को खा गया 
नागरिक सभा के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश सरकार,नगर निगम शिमला व वन विभाग की भूमिका संवेदनहीन रही है. शिमला शहर में पिछले तीन महीनों में तेंदुआ दो बच्चों की जान ले चुका है लेकिन वन विभाग तेंदुए को आदमखोर घोषित करने में आनाकानी कर रहा है. नागरिक सभा का कहना है कि घटना के बाद जिस तरह की कार्रवाई और लीपापोती चल रही है, उस से पता चलता है कि शिमला शहर जैसी जगह में भी सुरक्षा व छानबीन के न्यूनतम प्रबंध नहीं हैं.

कनलोग व डाउनडेल में तेंदुए के हमलों का शिकार हुए दोनों बच्चों के हादसों में एक समानता यह है कि ये घटनाक्रम गरीब बस्तियों में हुए जहां पर स्ट्रीट लाइटों व अन्य सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण तेंदुए को ये हमले करने का मौका मिला. इसलिए प्रदेश सरकार व नगर निगम भी ऐसे हादसों से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकता है. नागरिक सभा ने मांग की कि वैज्ञानिक तौर तरीके से वन्य प्राणियों से मानव की रक्षा के लिए तरीकों को अख्तियार किया जाए और वार्ड स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाए.

Tags: Himachal Police, Leopard, Leopard hunt

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